विपुल शर्मा
नयी दिल्ली: गाय को लेकर चल रही सियासत के बीच कृषिमंत्री राधामोहन सिंह ने कहा कि गाय किसी धर्म-जाति की नहीं होती है, बल्कि यह किसानों की अतिरिक्त आय बढ़ाने में अहम भूमिका निभाती है। वैसे तो हमारे किसान भाई पशुपालन करते ही रहे हैं लेकिन गौ पालन से किसानों की आमदनी बढ़ती है। केंद्र सरकार भी किसानों को गौ पालन के लिए प्रोत्साहित करने में अहम भूमिका निभा रही है। देसी नस्ल की गायों को संरक्षित करने को केंद्र सरकार ने कई परियोजनाएं शुरू की हैं, जिसका नतीजा भी दिखाई देने लगा है।
गाय की देसी प्रजाति को उन्नत बनाने के लिए केंद्र सरकार ने उत्तरी और दक्षिण क्षेत्र में एक-एक राष्ट्रीय प्रजनन संस्थान की स्थापना की है।पहला राष्ट्रीय प्रजनन केंद्र आंध्र प्रदेश में स्थापित किया जा रहा है, जबकि दूसरा कामधेनु प्रजनन केंद्र मध्य प्रदेश में बनाया जा रहा है। दुग्ध उत्पादन में भारत विश्व में पहले स्थान पर है। लेकिन भविष्य में दूध की जरूरत पूरी करने के लिए सरकार देशी नस्लों के विकास व संरक्षण किया जा रहा है। पहली बार राष्ट्रीय गोकुल मिशन नामक नई योजना शुरू की गई। देशी बोवाईन नस्लों के सुधार के लिए 825 करोड़ की सहायता से गोकुल ग्रामों की स्थापना की जा रही है। पहला राष्ट्रीय प्रजनन केंद्र आंध्र प्रदेश में स्थापित किया जा रहा है, जबकि दूसरा कामधेनु प्रजनन केंद्र मध्य प्रदेश में बनाया जा रहा है। कृषि मंत्री बोले, देसी गायों के ए टू दूध की खपत बढ़ी है। ओडिशा, कर्नाटक के बाद हरियाणा में भी ए टू दूध का अलग वितरण होने लगा है, जिसका प्रसार अब दिल्ली तक हो चुका है। दूध महंगा बिकने से गाय पालन की दिशा में रुझान बढ़ रहा है। राज्यों को दी जाने वाली वित्तीय मदद में भी देसी प्रजातियों के विकास पर ही ज्यादा जोर दिया जा रहा है। उन्होंने कहा कि आजादी के बाद से किसान, पशुपालन, डेयरी क्षेत्र की उपेक्षा की गई। इसलिए देश के किसानों की आर्थिक स्थिति दयनीय बनी हुई है।
कृषि मंत्री राधामोहन सिंह ने कहा कि गत तीन वर्षो में जहां दूध का उत्पादन बढ़ा, पशु पालकों को इसका अच्छा मूल्य (33 रुपये प्रति लीटर) भी मिला। इससे उनको प्रोत्साहन मिला है। राजग सरकार ने राष्ट्रीय गोकुल मिशन की स्थापना करके एक अहम पहल की थी। उन्होंने बताया कि इसी क्रम में सबसे बड़ा कदम उठाया गया है, जिसमें उत्कृष्टता केंद्र के रूप में दो राष्ट्रीय कामधेनु प्रजनन केंद्रों की स्थापना की जा रही है। केंद्रों में उच्च गुण वाले सांड़ का पालन वीर्य उत्पादन के लिए किया जा रहा है। इसके लिए अलग केंद्र बनाया गया। प्रजनन केंद्रों में देसी जर्म प्लाज्मा का भंडार होने के अलावा देश के प्रमाणिक जेनेटिक्स के स्नोत भी होंगे।

