अमितेश सिंह, वरिष्ट पत्रकार
पूर्वी उत्तर प्रदेश के ज्यादातार इलाकों से बिहार के लोगों का न सिर्फ भाषाई मेल मिलाप है, पहनावा ओढ़ावा एक है, खान-पान एक है बल्कि बेटी-रोटी का भी रिश्ता है। अब बिहार में हुई शराबबंदी के बाद दारू और चिखना का भी रिश्ता प्रगाढ हो गया है। और इस रिश्ते को बिनानी सिमेंट वाला मजबूती देने में अहम भूमिका निभा रही है भारतीय रेल। और कभी ट्रेन छूट जाये तो फिर मोटरसाईकिल साईकिल, और पैदल भी इस रिश्ते को मजबूती प्रदान करने वालों की संख्या दारूबंदी के बाद बढ़ी है। जी हां..उत्तर प्रदेश के गाजीपुर से लगे बिहार राज्य में पूर्ण शराब बंदी के बाद शराब के शौकीनों ने अपनी तलब मिटाने के लिये एक नया रास्ता ढुढ लिया है।
मिले न मंदिर,मिले न मस्जिद..मिल जाती है मधुशाला..भेद बढ़ाते मुल्ला—पंडित.. मेल कराती मधुशाला। आज बिहार से सटे उत्तर प्रदेश की मधुशालाएं सरे शाम गुलजार हो जा रही हैं,यहां तक कि भरी दुपहरिया में बियर की ठंढई लेने के लिए भी युवा इन मधुशालाओं में देखे जा सकते हैं।ये शराब के शौक़ीन बिहार के सीमावर्ती क्षेत्र गाजीपुर जनपद में ट्रेन बाईक और पैदल आते हैं और यहाँ के मयखानों से मूड बनाकर लौट जाते हैं । इन पियक्कड़ों को पैसेंजर ट्रेन की सवारी खूब रास आ रही है । भले ही मंहगाई घटे न घटे लेकिन इन जगहों पर शराब और रेल के टिकट की बिक्री और आमदनी बढ़ गई है ए शाम को शराबियों की भीड़ के कारण मस्तानीष के रूप में ट्रेन का नया नामकरण हो गया है ।
गाजीपुर जनपद मे पूर्व मध्य रेलवे का गहमर, दिलदारनगर, भदौरा सहित कई रेलवे स्टेशन इन दिनो बिहार मे पूर्ण शराबबन्दी को ठेंगा दिखाता नजर आ रहा है। 1 अप्रैल से बिहार मे पुर्ण शराबबन्दी होने के बाद इसके शौकीनो ने अपनी तलब मिटाने के लिए अपना रास्ता ढुढ लिया है और वे जानते है की उन्हे अब अपनी तलब मिटाने के लिए भले ही थोडा पैसा अधिक खर्च करना पड सकता है लेकिन वे अपनी तलब को किसी भी हाल मे मिटा सकते है। इसके लिए इन सभी ने सीमावर्ती ईलाको के देशी अंग्रेजी और वियर की दुकानो को अपना मुफीद अड्डा बना लिया है। इसके लिए वे शाम होते ही बक्सर से मुगलसराय जाने वाली पैसेन्जर ट्रेन को जहां अपना हथियार बनाया है तो वही कुछ बाईक से भी चलकर अपनी शाम को रंगीन बनाने पहुच रहे है।
यहां पर लोग ट्रेनो से उतर 4-5 की संख्या मे स्टेशन के पास ही अंग्रेजी वीयर और देशी की दुकानो पर पहुचते नजर आते है। वीयर की दुकान के लाईंसेसधारी अखण्ड सिंह कहते हैं कि एक ओर जहां बिहार के तलबगार अपनी तलब मिटाने यहां पहुच रहे है वही इनके आने से यहां के दुकानदारो की बिक्रि पर भी असर पडना आरम्भ हो गया है। अप्रैल के बाद से कुछ लग्न के वजह से तो कुछ ऐसे नये चेहरो के वजह से इनकी बिक्रि मे ईजाफा हुआ है। जब कुछ लोगो से यह जानने की कोषिष किया गया की वे यहां किस लिये आये है तो उनका जवाब था की वे बक्सर के रहने वाले है और घुमने के लिए रोज यहां आते है। एक शख्स जो धनसोई बिहार का रहने वाला है और वह अपनी रिश्तेदारी मे आया है और बिहार मे शराब नही मिल रही है इसलिये वह अपनी तलब मिटा रहा है। इस यात्रा के दौरान उत्तर प्रदेश से लोग चोरी छिपे शराब की बोतल भी लेकर जा रहे हैं।
गहमर स्टेशन पर सीनियर बुकिंग क्लर्क के रूप में कार्यरत शियीद इनायत उल्लाह इन तलबगारो की वजह से सिर्फ शराब की बिक्रि मे ही ईजाफा नही हुआ है बल्कि स्थानीय रेलवे स्टेशन पर भी शाम की इस पैसेंजर ट्रेन की टिकट बिक्री मे भी अन्तर आया है। जहां अप्रैल के पूर्व बक्सर आदी के लिए 100 के आस पास टिकट बिकती थी वो अब बढकर 125 से 150 तक हो गई है। मस्तानीष् ट्रेन का सफर शराबियों को ज्यादा सुरक्षित लग रहा है क्योंकि सड़क मार्ग से उत्तर प्रदेश आने.जाने में चेकिंग में सख्त है। उत्तर प्रदेश की सीमा में खुली मधुशालाओं की वजह से बिहार में शराब बंदी की हवा निकल रही है। महज 20 रुपये खर्च कर शराब के तलबगार आराम से मद्यपान कर वापस अपने घर चले जाते हैं।




