भारत के प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी का चुनावी नारा था..न खाएंगे, न खाने देंगे। उन्ही के नक्शे कदम पर चलते हुए कारगिल शहीद हवलदार रतन सिंह के गांव में मुखिया पद के लिए चुनाव लड़ रहे उदय प्रताप सिंह बड़े दावे के साथ कहते हैं ‘न पीएंगे, न पीने देंगे’। हालांकि पीने—पिलाने वालों और इस रास्ते वोट हासिल करने वालों को उनका यह तरीका कितना पसंद आता है, यह तो चुनाव के नतीजे ही बताएंगे, लेकिन इस तरह की घोषणाओं से गांव में सकारात्मक माहौल जरूर बना है।
उदय प्रताप सिंह उन्होने कसम खाई है जीतूं या हारूं लेकिन एक रूपया भी चुनाव प्रचार हेतु गलत कामों में खर्च नहीं करूँगा ,,,जैसे दारु पिलाना या कोई और तरीका ,,,,लोगों से यही कह रहे हैं कि अगर पंचायत को मिलने वाला फंड का एक एक हिसाब चाहिए तो मुझे वोट दें ,मेरा एक ही नारा है कि ‘न पीएंगे, न पीने देंगे’, न खिलाऊंगा और न खाऊंगा,देखना ये है कि लोगों को ये बात कहाँ तक समझ में आती है।
भागलपुर जिला में गोपालपुर प्रखंड के सुकटिया बाजार पंचायत में मुख्यतः सुकटिया, रतनगंज, तिरासी , अजमा ,पकरा और मुकर्री गाँव आते हैं। अगर भौगोलिक दृष्टि से देखें तो पंचायत दो भागों में बंटा है। सुकटिया, रतनगंज और तिरासी एक जगह हैं तो वहां से अजमा, पकरा और मुकर्री टोला की दुरी करीब 6 किलोमीटर है ,जहाँ जाने के लिये आपको एक दूसरे पंचायत डुमरिया को क्रास कर के जाना पड़ता है ।
अभी भी पंचायत का कुछ हिस्से में बिजली नसीब नहीं है । सड़कें भी सही नहीं हैं । बारिश के दिनों में सबसे बड़ी समस्या जल जमाव का होता है। मनरेगा में यहाँ जम के लूट हुई है। ग्रामीणों का कहना है कि, पंचायत की समस्या को दूर करने हेतू जो मुखिया जीते पर सिर्फ अपनी गरीबी दूर कर पाये ।
कारगिल शहीद की समाधी बेजार
सुकटिया बाजार पंचायत का तिरासी गाँव शहीद हवलदार रतन सिंह का गांव हैं। शहीद के भाई नीरज प्रताप सिंह कहते हैं कि तिरासी गाँव के जब रतन सिंह जी शहीद हुए थे तब बड़ी बड़ी बातें हुई थी कि इस गाँव को आदर्श गाँव बनाया जायेगा ,लेकिन कुछ हुआ नहीं आज खुद उनका समाधी स्थल वीरान पड़ा है । उनके नाम से एक स्कूल सरकार द्वारा शुरू किया गया उसमे शिक्षक भी हैं लेकिन स्कूल का भवन नहीं होने के कारण वो पेपर पर चल रहा है। विकास के नाम पे यहाँ सिर्फ लूट ही हुई है ।
उदय प्रताप सिंह उर्फ़ ललन बाबू इस बार अनोखे रूप से चुनाव लड़ रहे हैं । उनका चुनाव चिह्न है बैंगन छाप । बिलकुल सादगी से बिना किसी तड़क भड़क के वो अभी तक पंचायत के एक एक वोटर से मिल चुके हैं। न पीएंगे, न पीने देंगे, न खिलाऊंगा और न खाऊंगा के नारे के साथ । जब वो नामिनेशन देकर वापस आ रहे थे तो एक समर्थक ने दारू की मांग की तो उन्होंने उसे वही उतार दिया कि दारू पीना है तो दूसरे के पास जाओ । उनके इस कदम को समझदार तबका सही कह रहा है तो कई लोग मजाक भी उड़ा रहे कि इस तरह कोई इलेक्शन जीतता है क्या?,

