27/09/2021
  • 27/09/2021

पूछ रहे हैं ग्राम वासी…कब बहुरेगा मोकामा नाजरथ अस्पताल का दिन

By on 06/05/2021 0 1 Views

प्रियदर्शन शर्मा, वरिष्ठ पत्रकार
मोकामा: यह बिहार के मोकामा का नाजरथ अस्पताल है और तस्वीर बिहार के बेहाल स्वास्थ्य व्यवस्था की अमानुषिकता को बयां करने के लिए काफी है। कतार में रखे गए ये रुमाल, झोला, टोपी आदि एक अस्पताल की ओपीडी में नम्बर लगाने वालों का है जिसमें कोई कल शाम से ही आया हुआ है तो कोई सुबह 3-4 बजे से।

आपको जानकर हैरानी होगी कि 1947 आजादी के ठीक बाद पटना से 90 किमी दूर मोकामा में 100 एकड़ में बना 250 बेड से ज्यादा का यह मिशनरी नाजरथ अस्पताल सन 2005 तक बिहार के करीब एक दर्जन जिलों का प्रमुख स्वास्थ्य केंद्र था। लेकिन आज इस अस्पताल में सिर्फ एक या 2 डॉक्टर हैं और नाम मात्र की प्राथमिक स्वास्थ्य सुविधाएं। पर मरीजों का भरोसा ऐसा कि वे सरकारी अस्पताल के बदले भरोसा नाजरथ पर ही करते हैं। और सरकारी तंत्र इतना निष्ठुर कि अस्पताल को पुनर्जीवित करने के लिए नाजरथ प्रशासन से वार्ता की कोई योजना ही नहीं दिखती।

कभी सुशासन के पर्याय बताए गए बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने वर्ष 1989 से 2004 तक हमारे संसदीय क्षेत्र का लोकसभा में प्रतिनिधित्व किया। लेकिन 2005 में मुख्यमंत्री बनने के बाद भले उनके कुशल नेतृत्व और दूरदर्शी सोच से बिहार की छवि कई क्षेत्रों में बदली है पर स्वास्थ्य व्यवस्था बेहाल ही है। और ऐसा नहीं है कि हमारा क्षेत्र राजनीतिक मोर्चे पर आज भी कमजोर हो। अब देखिए न विधानसभा अध्यक्ष विजय सिन्हा, पूर्व मंत्री नीरज कुमार, स्व घोषित छोटे सरकार अनंत सिंह हमारे ही गांव/क्षेत्र के हैं तो लोकसभा में ललन सिंह हमारे सांसद हैं। पर कहते हैं न नाम बड़े और दर्शन छोटे।

मरीजों की जेब पर नजर गड़ाए बैठे पटना के चंद चमचमाते अस्पतालों को छोड़ दें तो बीमार बिहार की बदहाली और मरीजों की बदनसीबी हमारे यहां के अस्पतालों में आसानी से देख सकते हैं। कायदे से यह तस्वीर एक राज्य के नेतृत्वकर्ता की असफलताओं को दर्शाता है। उस राज्य सरकार की गौरव गाथा को कलंकित करता है और तंत्र की कुम्भकर्णी निद्रा का प्रत्यक्ष प्रमाण है।

सच में रोजाना रुदन को रूबरू कराती ऐसी परिस्थियां कई बार सोचने पर मजबूर करती हैं, क्या सच में पाटलिपुत्र के सिंहासन पर विराजमान शासक पाशविक हैं? क्या धृतराष्ट्र को अपनी विफलताएं महसूस नहीं होती?
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नाजरथ अस्पताल की तरफ ध्यान खींचने का एक प्रयास

यह एक मुहिम है जो हमलोगों (औंटा, बड़हैया,लक्खीसराय और मोकामा)के सोशल मीडिया पेज द्वारा मोकामा नाजरथ को वापस पुनर्जीवित करने के लिये एक डिजिटल आंदोलन के रूप में शुरू की गयी है। 7 मई को शाम 7 बजे #openmokamanazareth टैग के साथ ट्वीटर पे भारी संख्या में एकसाथ ट्वीट करेंगे।

हमारा उद्देश्य: मोकामा नाज़रथ को वापस पुनर्जीवित करने हेतु संस्था और सरकार का ध्यान आकर्षण सह मेनस्ट्रीम डिजिटल,प्रिंट व सोशल मीडिया मे मोकामा नाजरथ को लाना।

नाजरथ अस्पताल एक NGO के तहत संचालित संस्था है। जो अमेरिका के सिस्टर ऑफ चैरिटी द्वारा संचालित है।भारत में उन्होंने पहली संस्था 1947 में मोकामा में ही स्थापित की थी। यहाँ सभी तरह की सुविधाएं उपलब्ध थी। सन् 1984 में यहाँ 280 बेड की क्षमता थी। नॉर्थ ईस्ट राज्यों से loge यहाँ इलाज कराने आते थे। सन् 2005 में डॉक्टर की कमी, मजदूर यूनियन की हड़ताल और मोकामा की क्षेत्रीय वर्चस्व रंजिश के कारण यह संस्था बंद होती चली गयी और सन् 2012 में पूर्ण रूप से बंद हो गयी। यह 100 एकड़ में फैला है। हॉस्पिटल के अलावे बालिका सुधार गृह, नाजरथ स्कूल, नर्स ट्रेनिंग सेंटर, माँ मरियम चर्च इत्यादि कई चीजें चल रही है।

नाज़रथ अस्पताल की जरूरत क्यों- कोरोना की वजह से हम सबने अपने घर, आस पास और जान पहचान के लोगों को खोया है। उससे पहले भी हमारे क्षेत्र में कई महिलाओं को प्रसव के दौडान, कई नवयुवको को अन्य बीमारियों में चिकित्सा के अभाव में जान गवानी पड़ी है। संसाधनों के बावजूद हमें 100 किलोमीटर दूर इलाज हेतु पटना या बेगूसराय इत्यादि जगह जाना पड़ता है। सरकार कोरोना काल में जहाँ अभी मंदिर, मस्जिद,स्कूल इत्यादि को अस्पताल के रूप में इस्तेमाल कर रही, वहीं मोकामा नाजरथ में 300 बेड से अधिक व्यवस्था, जिसे सीमित समय में 2000 बेड तक किया जा सकता है, वो महज एक डिस्पेंसरी सेंटर बन के रह गया है।10-20 लोग इलाज के अभाव में हर रोज मर रहे हैं। नाज़रथ अगर खुलता है तो लक्खीसाराय, बाढ़, बेगूसराय, शेखपुरा इत्यादि कई जिलों को लाभ पहुंचाएगा।

हमारे प्रयास :

पहला:ट्विटर ट्रेंड से संस्था, सरकार और खबर में लाने की कोशिश।

दूसरा: Sisters of Charity of Nazareth , राज्य/ केंद्र सरकार को हज़ारों पत्र और मेल के माध्यम से मदद की अपील।

तीसरा: जन प्रतिनिधियों को उनके कर्तव्यों का अनुसरण करवाना।

चौथा:हमारी लीगल टीम के द्वारा कोर्ट के शरण में जाकर मदद की अपील।

पांच: अगर इन सबसे बात नहीं बनी तो जनआंदोलन।

आप क्या कर सकते हैं- ट्वीटर पे आइये, कल शाम 7 बजे _openmokamanazareth के साथ ट्वीट करें। लोगों को इस मुहिम से जोड़ें। सुझाव कॉमेंट में दे।  मोकामा अस्पताल का खुलना बेहद जरूरी है, यह हम सबकी लडाई है। कोई किसी नेता को अगर धन्यवाद करता है, तो बहिष्कार का पात्र है।

 

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