चंदन कुमार
नयी दिल्ली: देश में किसान रबी की बुआई में लगे हुए हैं। इस बीच केंद्र सरकार के वित्त मंत्री अरूण जेटली ने संसद में एक बड़ी घोषणा की है। जी हां, यह घोषणा है कि सरकार ने गेहूं की कम पैदावार और घटते स्टॉक के मद्देनजर विदेश से गेहूं के आयात को शुल्क मुक्त कर दिया गया है।अभी तक सरकार गेहूं पर 10 फीसदी आयात शुल्क लगाती थी। इससे पहले सरकार ने सितंबर में गेहूं आयात पर लगे 25 फीसद के शुल्क को घटाकर 10 प्रतिशत कर दिया था। वित्त मंत्री का कहना है कि इससे जिंस बाजार में बढ़ती कीमतों पर काबू पाया जा सकेगा।
कम पैदावार की आशंका
मौसम विभाग का पूर्वानुमान है कि चालू सीजन में ठंड कम पड़ेगी। कृषि विशेषज्ञों की राय है कि चालू रबी सीजन में भी गेहूं की खेती प्रभावित हो सकती है। तापमान बढ़ने का पैदावार पर असर हो रहा है। इसके साथ ही गेहूं के पैदावार के आंकड़ो में भी घालमेल की संभावना है। गेहूं की पैदावार का सरकारी अनुमान 9.35 करोड़ टन था। हालाकि विशेषज्ञ कहते हैं कि गेहूं की पैदावार किसी भी हाल में 8.60 करोड़ टन से अधिक नहीं थी। गेहूं की सरकारी खरीद भी निर्धारित लक्ष्य से कम हुई थी। मांग और आपूर्ति के अंतर को देखते हुए जिंस बाजारों में तेजी का रुख बन गया। गेहूं की कीमतें 25 से 27 रुपये प्रति किलो तक पहुंच गईं। एफसीआइ ने मांग के बावजूद बाजार में अतिरिक्त गेहूं जारी करने से मना कर दिया है। गेहूं के थोक व्यापारियों, आटा मिलों और अन्य उत्पाद बनाने वाले उद्योगों को गेहूं की बिक्री सीमित कर दी है। निगम की पहली प्राथमिकता राशन प्रणाली के लिए गेहूं का आवंटन करना है।
एहतियातन उठाए गए कदम सही
जानकारों का कहना है कि इससे गेहूं की बढ़ती कीमतों को नियंत्रित रखने में मदद मिलेगी। घरेलू बाजार में गेहूं की आपूर्ति बढ़ेगी। इस तरह की घोषणा का मतलब है कि सरकार ने यह मान लिया है कि गेहूं का उत्पादन कम रहेगा। इस अनुमान के अनुसार वर्ष 2015-16 में घरेलू पैदावार घटकर 8.6 करोड़ टन हुई थी। कीमतें बढ़ने से गेहूं उत्पाद बनाने वाली मिलों के लिए आयात करना जरूरी हो गया था। आयात शुल्क हटाने के इस फैसले को देखते हुए अंतरराष्ट्रीय जिंस बाजार में गेहूं की कीमतों में तेजी का रुख बनने लगा है। 185 डॉलर प्रति टन बिकने वाला गेहूं अचानक बढ़कर 225 डॉलर प्रति टन हो गया है।
