न मौसम की मार,न सिंचाई का खर्चा,नयी तकनीक से उगाएं आलू,उत्पादन दोगुना

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पंचायत खबर टोली
मऊ : किसान भाई आलू की खेती बड़े पैमाने पर करते हैं। लेकिन उनके मन में ठंढ़ के दिन में पड़ने वाले पाले को लेकर आशंकित होता है। हालांकि हमारे कृषि वैज्ञानिक किसान भाईयों की मदद के निरंतर प्रयास रहते हैं ताकि प्रकृति से फसलों का नुकसान कम से कम हो। जी हां, अब वैज्ञानिकों ने आलू उत्पादन की ऐसी नवीन तकनीक की खोज किया है जिसमें ठंड या पाला लगने का काेई डर ही नहीं है। इतना ही नहीं बोआई के बाद इसमें उर्वरक व सिंचाई की भी आवश्यकता नहीं रह जाती है और उत्पादन सामान्य से दोगुना प्राप्त होता है। मेढ़ पर बोआई से इतर सामान्य खेत में आलू को छह इंच गहरी बोआई के बाद पलेवा कर देना होगा। इसके ऊपर छह इंच पुआल की परत बिछाने के बाद सीधे फसल की खोदाई करना है।

alu_nपरंपरागत विधि से थोड़ी अलग
पंरपरागत खेती के अभ्यस्त हो चुके किसानों को यह विधि अपनाने में थोड़ी हिचकिचाहट हो रही है। इस वर्ष कई स्थान पर इस विधि से की गई बोआई पर किसानों की पैनी नजर है। वैज्ञानिकों का मानना है कि इस विधि से बोआई करने पर किसी भी तरह का रोग नहीं होता है। ताजोपुर सुखापट्टी निवासी शंकर यादव ने इस विधि से आलू की खेती किया है। वह बताते हैं कि आलू की खेती में मोटी मेढ़ पर करने का किसान आदी रहा है। ऐसे में समतल खेत में सीधी बुआई करने से अधिकांश लोग डरे हुए हैं। बावजूद इसके इस नई विधि द्वारा प्रयोग के तौर पर फसल लगाई गई है। इस पर दजर्नों किसानों की नजर है। बेहतर उत्पादन होने की दशा में अगले वर्ष से आलू को इसी विधि द्वारा बोया जाएगा। फिलहाल बिना सिंचाई व उर्वरक के फसल स्वस्थ है।alu_n
काफी असरदार है विधि
वरिष्ठ केवीके वैज्ञानिक व जिला कृषि सलाहकार डा.एनके सिंह की राय है  कि खेत की गहरी जोताई कराने के बाद छह इंच गहरा बीज लाइन से खेत में बो दिया जाता है। पलेवा कर प्रक्षेत्र को समतल कर दिया जाता है। इस बात का ध्यान रखा जाना आवश्यक है कि इस विधि में बोआई के समय पर्याप्त मात्रा में नमी उपलब्ध रहे। पलेवा करने के बाद फसल के ऊपर छह इंच पुआल की माेटी चादर बिछा देना चाहिए। इसके उपरांत जमाव से लेकर खोदाई तक फसल को सिंचाई व उर्वरक की आवश्यकता नहीं पड़ती है। इस विधि में दाेबारा कोड़ाई की आवश्यकता भी नहीं रहती है। खोदाई के समय उपर से पुआल हटाकर उत्पादन लिया जाता है। कम लागत और मेहनत के बाद भी न्यूनतम दोगुना उत्पादन इस विधि द्वारा प्राप्त किया जा सकता है।

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