कमलेश कुमार सिंह
ससुराल में शौचालय न होने पर दुल्हन द्वारा बैरंग बारात लौटाने या नैहर चले जाने की खबर अब पुरानी हो चुकी है. अब नई खबर आ रही है, पानी की किल्लत के कारण दुल्हन ससुराल छोडने के लिए मजबूर हो रही हैं. ऐसी खबर पूर्व सीएम जीतन राम मांझी के क्षेत्र गया के इमामगंज से आ रही है कि 15 से ज्यादा बहुएं यह कह कर कि, जब तक पानी की किल्लत दूर नहीं हो जात तब तक वापस नहीं आयेंगी, अपने नैहर जा चुकी हैं. इतना ही नहीं कई जिलों में पानी की किल्लत के कारण शादी टाल दी गयी. इन सब के बीच सूबे में पंचायत चुनाव हो रहे हैं, लेकिन पानी मुख्य मुददा नहीं है. मुददा होता तो क्या होता चुनाव के बाद मुखियाजी या मुखियापति अपने चेहेतों के दूरा के आगे ही चापाकल लगवायेंगे.
वैसे मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने सभी घरों तक जल्द ही टेप वाला यानी सप्लाई वाला पानी पहुंचाने का वादा किया है. शराबबंदी तो एक क्षण में लिया गया फेसला था. ठीक या गलत इस पर सब की अपनी आपनी राय है. लेकिन यह कहने में कोई संकोच नहीं कि पानी की समस्या को लेकर सरकार या राजनीतिक दल जरा सा भी गंभीर नहीं है. पंचायत चुनाव के दौरान चुनावी कार्य संपन्न कराके (कई चरणों के लिए मतदान हो चुके है) लौटे कई गुरुजी से बात हुई. अस्सी फीसदी ने पानी की किल्लत और खराब पानी की बात कही. अजीब विडंबना है, इसके बावजूद पेयजल संकट चुनावी मुददा नहीं है. पोखर, कुंआ, चापाकल… सब सूख रहे हैं. इससे सबसे ज्यादा प्रभावित महिलाएं हो रही हैं. गांव हो या शहर हरेक इलाके में निजी तौर पर नये बोरिंग होते देखे जा सकते हैं. इन दिनों मौसम के तल्ख़ तेवर के कारण पारा 40 के पार हो गया है.

सरायरंजन के नरघोघी गांव में पानी की चोरी के डर से निजी हैंडपम्प में जंजीर बांधना शुरू कर दिया गया है. गांव के लोग पानी खरीदकर पीने को मजबूर हैं. वहीं नवादा जिले के विसियाइत के सुधीर यादव हर रोज 20 लीटर दूध की बिक्री करते थे, जिससे उन्हें 600 रु. की आमदनी हो जाती थी और उनके 17 सदस्यीय परिवार का चूल्हा जलता था. झुलसा देने वाली गर्मी में सुधीर के घर के चूल्हे की आंच भी मद्धिम पड़ गई है. इसकी वजह गांव में पेयजल संकट के कारण आमदनी का जरिया रही चारों भैंसों को बेचना है. इस समस्या से निपटने के लिए सुधीर ने 20,000 रु. खर्च कर 175 फुट की बोरिंग भी करवाई, लेकिन सफलता हाथ नहीं लग सकी. नतीजा, अब सुधीर के तीन भाइयों को मजदूरी के लिए परदेस जाना पड़ा है. अब पानी के कारण पलायन का नया दौर शुरु हो चुका है. अगर यह उदासीनता कायम रही तो वह दिन दूर नहीं जब पानी के लिए बड़े स्तर पर इनसान भी पलायन करेंगे.


