मनीष अग्रहरि
जौनपुर: जल ही जीवन है। मगर इस समय जल, जंगल और जमीन का अविवेकपूर्ण दोहन किया जा रहा है। ऐसे में गांव से निकला कोई युवा यदि जलसंरक्षण के लिए अपना पूरा जीवन समर्पित कर देने का संकल्प काफी सुखद है। पंचायत खबर आपको एक ऐसे ही जलयुवा से आपका परिचय करा रहा है जो उत्तर प्रदेश के जौनपुर, इलाहाबाद आदि जिलो में जलसंरक्षण पर खासा काम कर चुके है। इतना ही उनके काम को अनेको सम्मान और पुरस्कार मिला है।
यह कहानी है मूलतः जौनपुर जिले के बरसठी तहसील अंर्तगत दतांव गांव के रहने वाले 21 साल के शारदेन्धु शौरभ की। शारदेन्धु शौरभ इस समय केंद्रीय विश्वविद्यालय इलाहाबाद में कानून के छात्र है। मगर उनका लगाव हमेशा जलसंरक्षण से बना रहा। उन्होने अपने गुरूजनो के मार्गदर्शन और सहपाठियो, ग्रामीणो के साथ मिलकर कई तालाबों को पुर्नजीवित किया और अपना अस्तित्व खो चुकी जौनपुर की वसुही नदी को सदानीरा बनाये जाने को वसुही जल संवाद यात्रा की।

शहर में रहकर भी गांव से जुड़ाव: शारदेन्धु अपने पिता और इलाहाबाद हाईकोर्ट के वकील जयशंकर मिश्र के साथ इलाहाबाद में रहते है। गर्मियो के छुट्टी में जब गाॅंव जाते थे तो पास की वसुही नदी और तालाबों को सूखा देखकर मन विचलित हो जाता था बस वही से शुरूआत हुई जल के लिये जिंदगी जीने की और आज जलयुवा के रूप में पहचान हो गयी।
तलाबों को दिया नवजीवन: जौनपुर में बंधवा बाजार के पास एक प्रदूषित तालाब को स्वच्छ करवाया। बरसठी के गंगादीन रामकुमार इंटरमीडिएट कालेज के छात्रो के सहयोग से तालाब में जमी शिल्ट को हटवाने का काम किया। यह काम उन्होने साल 2015 से श्ुारू किया और धीरे धीरे अब तालाब की सूरत ही बदल गई है। फलस्वरूप जिस तालाब का पानी पीकर निर्दोष पशु पक्षी अपनी जान गवाॅं बैठते थे, आज उसी तालाब के पानी में आक्सीजन की पर्याप्त मात्रा होने से पशु पक्षियो को जीवन मिल रहा है।
बरसठी तहसील के बारी गांव स्थित शांतिनिकेतन स्कूल के छात्र भी उनकी मुहिम से जुड़े इससे स्कूल के आस पास अनेक तालाबों की जिंदगी बदली और लोगो को तालाबों का महत्व समझ में आयां। इसी तरह बरसठी तहसील के ही दताॅंव और तिवारीपुर गाॅंव के बीच बूढ़ी का तारा नाम के तालाब में जमी शिल्ट और प्रदूषण को भी उनके पहल पर हटाया गया। इसके अलावा वे बसहरा, दियावा, सोतीपुर, पाडेंयपुर जैसे गाॅंवों में भी तालाबों को बचाने की मुहिम चला रहे है।

अस्तित्व खो चुकी नदियो के लिये किया काम : सबसे पहले जौनपुर जिले के वसुही नदी को बचाने हेतु उन्होने 2014 में वसुही जलसंवाद यात्रा निकाली। यह यात्रा उन्होने अपने सहपाठियो तथा वसुही के किनारे श्री केवला प्रसाद महाविद्यालय के छात्र छात्राओं के सहयोग से की। वसुही समेत अन्य नदियो को बचाने के लिये उन्होने जौनपुर के जिलाधिकारी, तत्कालीन मुख्यमंत्री अखिलेश यादव और सपा के संरक्षक मुलायम सिंह यादव को भी पत्र भी लिखा था। पत्र का संज्ञान लेते हुये वसुही के लिये कोई खास काम तो नहीं हुआ मगर वरूणा के लिये जरूर कुछ पहल हुई। वे इलाहाबाद में गंगा और यमुना के स्वच्छता पर भी जागरूकता कार्यक्रम कर चुके है। शारदेन्दु अब भविष्य में जौनपुर के सभी पांच नदियो (पंचगंगा) जिसमें गोमती, पीली, सई, वसुही, वरूणा के लिये काम करना चाहते है।
अब तक हुये कामो के लिये वे अपने साथियों विभव मिश्र, सलिल दुबे, लव वर्मा, शाहबाज, दीपांकर मौर्य, विजय यादव समेत अन्य साथियो का नाम लेना नही भूलते है। इसके साथ ही केंद्रीय विश्वविद्यालय इलाहाबाद के पूर्व कुलपति केजी श्रीवास्तव, अपने अधिवक्ता पिता जयशंकर मिश्र तथा बाम्बे हाईकोर्ट के अधिवक्ता महेश शुक्ल के मार्गदर्शन तथा आर्थिक सहयोग की सराहना करते है।
पंचायत में बढ़ी जागरूकता: शारदेन्दु के पहल से बरसठी तहसील के कई ग्राम प्रधान जलसंरक्षण के प्रति जगे है। जौनपुर में मछलीशहर थाना अंतर्गत तिलोरा गाॅव (अलापुर) प्रधान महेश तिवारी व सोतीपुरा, पांडेयपुरा, बसहरा समेत अन्य गाॅंव के प्रधान उनके कामों के कायल हो चुके है।अलापुर गांव के प्रधान महेश तिवारी कहते है कि शरदेन्दु की पहल से स्थितियां बदली है। अब लोग जलसंरक्षण के लिए जागरूक हुए है।
मिल चुका है कई सम्मान और पुरस्कार: शारदेन्दु के कार्यो को देखते हुये कई संस्थान उन्हे सम्मानित कर चुकी है। साल 2013 में रामकृष्ण मिशन संस्थान में कर्नाटक के तत्कालीन राज्यपाल टीएन चतुर्वेदी ने सम्मानित किया। इसके अलावा गुजरात में वहां के राज्यपाल के द्वारा भी सम्मानित हो चुके है। इलाहाबाद में वर्तमान जिलाधिकारी संजय कुमार ने राष्ट्रीय युवा पुरस्कार से सम्मानित कर चुके है।
