पंचायत खबर टोली
नयी दिल्ली: नोट बंदी के बाद देश डिजिटल हुआ जा रहा है। लेकिन हमारे सब्जी उत्पादक किसान समझ नहीं पा रहे हैं कि ये सारे फैसले उनकी बेहतरी के लिए है या फिर उनकी कमर तोड़ने के लिए। जी हां, नोटबंदी के फैसले के बाद से ही सब्जियों के दाम लगातार गिर रहे हैं। इसका सीधा मार पड़ा है किसानों पर। जिसे न तो अपने उत्पाद का सही मूल्य मिल रहा है और न ही मुनाफे की आस रह गयी है। बल्कि वो इस बात को लेकर चिंतित है कि यदि लागत नहीं निकलेगी तो वह आगे कैसे फसल लगाएगा। नवंबर—दिसंबर के माह में वैसे भी सब्जियों के दाम कम होते हैं,लेकिन इस बार जैसी स्थिति है उससे किसानों की लागत भी नहीं निकल पा रही है।
देश के ग्रामीण अंचलों के साथ ही दिल्ली जैसे महानगर में भी दिल्ली देहात और आसपास के गांवो के किसान सब्जी की खेती कर अपने परिवार का खर्च चलाते रहे हैं। इन सभी किसानों के लिए नोटबंदी परेशानी का सबब बन गया है।
सभी सब्जियों के दाम गिरे
न सिर्फ पालक, मेथी,मूली, मटर बल्कि सभी सब्जियों के दाम गिरे हैं। आलू 240 का मन बिक रहा है। वहीं प्याज 600 का। पालक 100 का मन,गोभी 280 का,बैगन 200 रूपये मन। कई सब्जियों की कीमत में पिछले वर्ष की तुलना में आधे से भी ज्यादा की गिरावट आयी है।
क्या कहते हैं किसान
यमुना किनारे मेथी,पालक,मूली,गोभी जैसी सब्जियां उगाकर अपने परिवार का भरन पोषण करने वाले रामफल कहते हैं कि टीवी में देख रहा था कि इस नोटबंदी से कालाधन खत्म होगा,लेकिन आप ही बताओ कि हमारे पास कौन सा कालाधन है। हम तो सब्जी लगाते हैं। उसको बच्चों से भी ज्यादा प्यार देकर तैयार करते हैं,और फसल काटने की बारी आयी तो हो गई नोटबंदी। अब व्यापारी आते हैं, औना—पौना दाम लगाते हैं जिससे लागत भी न निकलेगी। अगर उनकी कीमत पर ना बेचूं तो खराब होने वाली वस्तु है सब्जी खराब हो जाएगी और जो मिलने की आस थी वो भी न मिल पायेगा। इस तरह से किसानों पर दोहरा मार पड़ा है।
बटाई पर खेत लेकर लगभग 10 किले में सब्जी की खेती करने वाले शमसूद्दीन कहते हैं हम जैसों के लिए तो भूखमरी की नौबत है। क्या खेत मालिक को देंगे और क्या खुद रखेंगे। जो बचेगा वो व्यापारी ले जाएगा । खेती किसानों की तीन-चार माह की कड़ी मशक्कत के बाद खेतों में सब्जियां तैयार होती है। ऐन वक्त आ गयी नोटबंदी अब किसान सब्जियों की लागत भी नहीं निकाल पा रहे हैं।
छोटे व्यापारी भी नहीं है खुश
दिल्ली के आजादपुर मंडी से सब्जी लगाकर ईलाके में रेड़ी—पटड़ी पर सब्जी का दुकान लगाने वाले राजकिशोर कहते हैं कि सब्जियां सस्ती तो हैं लेकिन इससे फुटकर व्यापारियों को ज्यादा फायदा नहीं है। क्योंकि ग्राहक के पास भी नकदी का अभाव है। ऐसे में वह सब्जियां अपनी जरूरत को ध्यान में रखकर कम ही खरीद रहा है। हरी सब्जी खराब न हो जाए इसकी वजह से हम कम से कम कीमत पर थोड़े मुनाफे के साथ रोजगार कर रहे हैं ताकि अल्टी—पल्टी होता रहे।
गृहिणियां खुश खूब हो रहा है मोलतोल
सब्जियों के भावों में आई गिरावट से घरों में रसोई संभालने वाली गृहणियों के चेहरों पर मुस्कान देखने को मिल रही है। दाम कम होने के बावजूद वे मोलतोल से नहीं चुक रहीं। कोशिश है कि और भी अधिक कम कीमत लगाई जाए ताकि कम पैसे में अधिक हरी सब्जी खरीदगी हो। मौसम के अनुसार हरी सब्जियों आदि के दाम भी कम होने के कारण सभी कुछ बढि़या चल रहा है।
