आलोक राज
मुजफ्फरपुर: पाल वाली नैया, बहे पुरवईया,कोरोना की लड़ाई में टीकाकरण के लिहाज से तारनहार बनी है नाव व उसका खैवेया। जी हां, बिहार में बाढ़ है। गांव के गांव पानी से प्रभावित हैं। जीवन मुहाल होता जा रहा है। लेकिन इस कोरोना काल में जिस तरह से टीकाकरण अभियान चल रहा है वह निश्चित रूप से हौसला बढ़ाने वाला है और इस बढ़े हुए हौसले के कारण टीकाकरण का कार्य पूरा होते ही कोरोना निश्चित रूप से पस्त हो जाएगा। आईये आपके लिए चलते हैं मुजफ्फरपुर जिले के कटरा प्रखंड में। इस पूरे प्रखंड में बाढ़ का पानी भरा हुआ है लेकिन इसके बावजूद हर हाल में लोगों के टीकाकरण करने का जज्बा देखते बनता है। लक्ष्य है मुजफ्फरपुर जिले में कोरोना टीकाकरण के शत प्रतिशत लक्ष्य को पूरा करना। और इस लक्ष्य को पूरा करने के लिए प्रखंड के स्वास्थ्य महकमे ने एक अनोखी शुरूआत की है।

टीकाकरण वाली नाव बनी आकर्षण का केंद्र
जिले को बाढ़ से प्रभावित होता देख स्वास्थ्य महकमे ने बाढ़ प्रभावित इलाकों के लोगों को लगेगी कोरोना का टीकाकरण कराने के लिए सर्वाधिक बाढ़ प्रभावित प्रखंड कटरा में शुक्रवार को टीका वाली नाव की शुरूआत की। यह नाव आकर्षण का केन्द्र बनी हुई है। स्वाभाविक रूप से टीका वाली नाव पर सवार स्वास्थ्य कर्मी जब बाढ़ की महामारी झेल रहे लोगों के बीच पहुंचे तो लोगों के अंदर कौतूहल था और इन स्वास्थय दूतों के जज्बे को लोग सलाम करते दिखे। इसका कारण था कि नावों पर राहत सामग्री आते तो लोगों ने खूब देखा था मगर नाव पर टीका पहली बार देख रहे थे। बाढ़ के कारण अब टीका से वंचित नहीं रहेंगे। लोगों को नाव पर टीका दिया जा रहा था। टीके वाली नाव बाढ़ के पानी में तैर रहे गांवों में घर-घर पहुंच रही थी। उस पर सवार टीकाकर्मी लोगों को बुलाकर टीका लगा रहे थे।

क्या है सूरते हाल
शुक्रवार को कटरा प्रखंड में टीका वाली नाव की शुरुआत की गई। इसका उद्घाटन सिविल सर्जन डॉ विनय कुमार शर्मा ने किया। टीकाकरण के लिए राज्य में इस तरह का पहला एवं अनोखा प्रयास किया गया है।
ये है व्यवस्था
प्रत्येक नाव पर मौजूद होंगे दो एएनएम, दो वेरिफायर, गोताखोर और नाविक।
क्या कहते हैं अधिकारी
सिविल सर्जन डॉ विनय कुमार शर्मा ने बताया कि बाढ़ क्षेत्र में टीकाकरण अभियान एक चुनौती है। बावजूद इसके जिलाधिकारी द्वारा दिए गए निर्देश के आलोक में स्वास्थ्य विभाग पूरी प्रतिबद्धता के साथ टीका कार्यक्रम को सफल बनाने में लगा है।
प्रथम चरण में कटरा प्रखंड में दो टीका वाली नाव का परिचालन शुरु किया गया है, जिसमें प्रत्येक नाव पर दो एएनएम, दो वेरिफायर, गोताखोर और नाविक भी मौजूद होंगे। नाव की उपलब्धता जिला प्रशासन द्वारा सुनिश्चित की जाएगी, वहीं एएनएम तथा गोताखोर स्वास्थ्य विभाग की तरफ से दिए गए हैं। इन दोनों नावों से कटरा के बाढ़ प्रभावित 14 पंचायतों में जाकर टीकाकरण का कार्य किया जाएगा।
अन्य क्षेत्रों में भी घूमेगी नाव
सिविल सर्जन ने यह भी कहा कि आवश्यकता पड़ने पर गायघाट, औराई जैसे बाढ़ प्रभावित इलाकों मे भी इसका परिचालन किया जाएगा। नाव पर स्वास्थ्यकर्मियों के सुरक्षात्मक सारे इंतजाम किए गए हैं।
एक तरफ कोरोना संक्रमण का खतरा उपर से बाढ़ के कारण मची त्राहि-त्राहि के बीच लोगों तक स्वास्थ्य सेवाओं को पहुंचाना विभाग के लिए चुनौती भरा काम हो गया है। इस बीच कोविड टीकाकरण अभियान की तेज हुई रफ्तार पर भी ब्रेक लगने की संभावना दिख रही है,लेकिन जिस तरह के जज्बे के साथ हर हाल में टीकाकरण महाअभियान को सफल बनाने का जज्बा स्वास्थ्य कर्मियों में दिख रहा है और पूरा जिला प्रशासन इस अभियान को सफल बनाने में लगा हुआ है,ऐसा में उम्मीद की जा सकती है कि बाढ़ की चुनौतियों के बावजूद ये अभियान सफल होगा,यानी कोरोना हारेगा,बिहार से भागेगा।

मुजफ्फरपुर, मोतिहारी सहित अन्य जिलों व प्रखंडो में भी बाढ़ की चुनौती ने टीकाकरण अभियान के रफ्तार को थामने की आशंका बढ़ा दी है बावजूद इसके यदि नाव से टीकाकरण का यह प्रयोग सफलता पूर्वक चलाया जाता है तो निश्चित ही अन्य बाढ़ प्रभावित ईलाके में भी यह प्रयोग कारगर साबित हो सकता है।
