अपराजिता संतोष
इंडिया डिजिटल हुआ जा रहा है। महिलाओं को पंचायती राज संस्थाओं में आरक्षण के जरिए बड़ी भागीदारी दी गयी है। विशेषज्ञ इसे महिला सशक्तिकरण की ओर बढ़े कदम के रूप में देख रहे हों,लेकिन महिलाओं की यह बढ़ी हुई भागीदारी उनकी आवाज बन पा रही है,इसे लेकर संदेह है। यदि ऐसा होता तो गुजरात एवं उत्तर प्रदेश के अलीगढ के पंचायत के उस फैसले का जरूर विरोध होता जिसमें 18 वर्ष से कम उम्र की लड़कियों के मोबाईल के इस्तेमाल पर प्रतिबंध लगा दिया गया है । अलीगढ़ में एक गांव की पंचायत ने तालिबानी फरमान सुनाते हुए 18 साल से कम उम्र की लड़कियों के मोबाइल इस्तेमाल पर पाबंदी लगा दी है। यह मामला अलीगढ़ स्थित बसौली गांव में सामने आया है। पंचायत का कहना है कि मोबाइल फोन लड़कियों को बिगाड़ रहा है। इस फरमान को न मानने वाली लड़कियां के परिवारों को गांव की सड़कें साफ करनी होंगी। इतना ही नहीं यह सजा शराब की बिक्री और सेवन पर भी लागू होगी।
गांव के बुजुर्ग रामवीर सिंह ने मीडिया को बताया कि उन्होंने इस आदेश के सख्त पालन के लिए तीन तरह की समितियां बनाई हैं। यह समितियां आदेश का पालन हो यह सुनिश्चित करने के साथ ही इस पर नजर रखेंगी कि कहीं कोई इस आदेश का उल्लंघन तो नहीं कर रहा। रामवीर के मुताबिक, अगर कोई व्यक्ति शराब बेचता या सेवन करता हुआ पाया गया तो उसे सजा भी दी जाएगी। अगर कोई 18 साल से कम उम्र की लड़की मोबाइल फोन के साथ पाई गई तो उसे भी आठ दिनों तक सजा दी जाएगी। सजा के तौर पर उस व्यक्ति को आधा किलोमीटर सड़क की सफाई करनी पड़ेगी।
इस बीच शहर के एडीएम संजय चौहान ने कहा कि किसी को भी कानून अपने हाथ में लेने की इजाजत नहीं है. अगर कोई संगठन किसी व्यक्ति के संवैधानिक अधिकारों का हनन करता है तो उसके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। संजय चौहान ने एएनआई को बताया, “पंचायत के इस फरमान के बारे में हमें केवल मीडिया खबरों से ही पता चला है। पंचायतों की स्थापना छोटे मुद्दों को बातचीत से हल करने के लिए की गई थी। लेकिन इसका यह मतलब कतई नहीं कि यह किसी व्यक्ति को मिले संवैधानिक अधिकारों का हनन कर सकती है। ”
गुजरात के अहमदाबाद के एक पंचायत ने फैसला सुनाया है कि कुंवारी लडकियां यहां मोबाइल नहीं रख सकती। यदि कोई व्यक्ति किसी कुंवारी लडकी के पास मोबाइल पकडवाता है तो उस व्यक्ति को पंचायत 200 रूपए का ईनाम देगी और जिस कुंवारी लडकी के पास से मोबाइल मिलेगा उस पर 2100 रूपए का जुर्माना लगाया जाएगा। इस गांव के सरपंच का कहना है कि कुंवारी लडकियों को मोबाइल रखने की क्या जरूरत है। सरपंच इंटरनेट को समय और पैसे की बर्बादी मानते हैं। साथ ही उनका कहना है कि लडकियों को को अपना समय पढाई और अन्य कामों में लगाना चाहिए। इस गांव में 2500 लोगों की आबादी है और सभी ने पंचायत के इस फैसले का स्वागत किया है। गांव में यह प्रतिबंध 12 फरवरी को लगाया। –

