पंचायत की सरकार तीसरी नहीं बल्कि पहली सरकार: बाल्मीकि प्रसाद सिंह

देश में स्मार्ट सिटी और मॉडल विलेज का नारा दिया जा रहा है,लेकिन हकिकत यह है कि आज भी गांव में 80 फीसदी आबादी अभाव की जिंदगी जीने को मजबूर है। यही कारण है कि शहर में  गांव सेपलायन बढ़ रहा है,क्योंकि सरकार गांव को छोड़ शहरों को स्मार्ट बनाने में लगी हुई हैं, हालांकि बातें मॉडल विलेज की भी हो रही है। लेकिन इन बातों का जमीन पर कोई प्रभाव हो ऐसा नहीं दिख रहा है। कुछ ऐसे ही भाव बलवंत राय मेंहता की याद में अखिल भारतीय पंचायत परिषद के दो दि​वसिय राष्ट्रीय अधिवेशन में देश भर से आये पंचायत की बेहतरी के लिए काम कर रहे ज्यादातर लोगों की थी। इस कार्यक्रम का आयोजन दिल्ली स्थित पंचायत ग्राम में हुआ।

panchayattttttt_n

कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए अखिल भारतीय पंचायत परिषद के राष्ट्रीय अध्यक्ष बाल्मीकि प्रसाद सिंह ने कहा कि अक्सर कहा जाता है कि पंचायत की सरकार तीसरी सरकार है जबकि पंचायत की सरकार तीसरी नहीं बल्कि पहली सरकार होनी चाहिए तभी गांधी के गांव गणराज्य का सपना पूरा होगा। उत्तर प्रदेश के कानपुर के विधायक विक्रम सिंह ने कहा कि गांव में मोबाईल फोन तो पहुंच गया है लेकिन डिजिटल होते इंडिया में यदि गांव पिछड़ गया तो आर्थिक रूप से भी पिछड़ जायेगा। उन्होंने कहा कि गांव के विकास के लिए उसका समुचित डाटा होना जरूरी है,जिससे विकास की सही योजना बन सके। गांव को उसमें एक प्लानिंग ईकाई बनाया जाये। शहरों की तरह गांव के लिए भी एक विलेज डेवलपमेंट आथोरिटी हो,जो गांव में समुचित विकास के लिए रूपरेखा तैयार करे। आज स्थिति यह है कि एसी कमरे में बैठकर अधिकारी विशेष रूप से वो अधिकारी जिन्हें धान और गेंहूं की बालियों में अंतर पता नहीं है, वै उपज का मूल्य तय करते है। ऐसे में गांव और किसानों का विकास कैसे होगा। उन्होने कहा कि गांव के लिए योग, आयुर्वेद,कृषि क्षेत्र में हो रहे शोध को पंचायत के जरिए पहुचाये जाने की वकालत की।

बिहार में मुखिया संघ के संरक्षक डॉ विजय कुमार ने कहा कि 21 वीं सदी में विकास और सुशासन की बात हर मंच पर सुनने को मिलती है? लेकिन सवाल यही है कि क्या सुशासन एवं विकास की इच्छा व्यवस्था पूरा कर रही है। क्या पंचायती राज संस्थाएं विकास एवं सुशासन के आधार तैयार करने में योगदान दे रही हैं? क्या सचमुच में हिंदूस्तान के आम आदमी को सुशासन एवं विकास मिल गया? बिहार पंचायती राज अधिनियम 2006 के आने के बाद गांव और मोहल्ला में 70 फीसदी प्रतिनिधि सामाजिक न्याय के दायरे के लोग हैं बावजूद इसके ये अधिकार विहिन है। कहा जाता है कि ज्यादातर जन प्रतिनिधि बेईमान हैं,लेकिन यह कोई नहीं कहता कि भ्रष्टाचार से ज्यादा इन्हें भ्रष्ट बताने और अक्षम करार देने की प्रवृति राजसत्ता में है,ताकि इन्हें इनके अधिकार न मिलें। आज का पंचायती राज अधिकार विहिन और लूट की अनर्थशास्त्र पर टिका है। जिस दिन से पंचायती राज लोहिया,जेपी,बलवंत राय मेहता की ग्राम सभा और मोहलला सभा की बुनियाद पर फैसला लेना शुरू कर देगा, गांव का विकास होना श् शुरू हो जाएगा। आज तीसरी सरकार के पास न कोष है, न कार्यक्रम, न कार्यालय, न कर्मचारी..बावजूद इसके यदि कहीं अच्छा काम हो रहा है तो इसका श्रेय केंद्र और राज्य सरकारें ले जाती हैं।  केंद्र और राज्य सरकारें कदापि नहीं चाहती सत्ता और सम्पति का विकेंद्रीकरण हो। इस पंचायती राज कानून में गाँव को इकाई नहीं बल्कि आबादी को इकाई रखा गया है तंत्र, मंत्र और यन्त्र तीनो स्तर पर पंचायती राज के साथ धोखा हुआ है

पत्रकार बाबा विजेंद्र ने कहा की गाँव को अब गोबर से गूगल तक का सफ़र तै करना होगा, तभी गाँव विकास संभव हो सकेगा   गाँव को बाजार से मुकाबले का गुड सीखना होगा। कर्यक्रम के अंत में बाल्मीकि प्रसाद सिंह ने घोसना किया कि अगले वर्ष तक यहाँ पंचायत प्रतिनिधिओं के लिए प्रशिक्षण संस्थान खोला जाएगा।

दो दिवसिय संगोष्ठी में डॉ संजय पासवान, डॉ अशोक चौहान,डॉ भानु,नवीन जयहिंद,मंगू सिंह त्यागी,सहदेव भाटी सहित जाने माने पंचायत ​से जुड़े लोगों ने अपनी बात रखी।

Leave a Comment

Your email address will not be published. Required fields are marked *