संतोष कुमार सिंह
Safer Internet Day: फिल्म अभिनेता आयुष्मान खुराना (Ayushmann Khurrana) अपनी फिल्म एन एक्शन हीरो (An Action Hero) की ओटीटी (OTT) रिलीज के लिए खूब सराहना बटोर रहे हैं। जिस फिल्म ने सिनेमाघरों में खास धमाल नहीं मचाया, उसे नेटफ्लिक्स (Netflix) पर उसका श्रेय मिल रहा है। अभिनेता ने अब सुरक्षित इंटरनेट दिवस (Safer Internet Day) के अवसर पर अपने विचार साझा किए हैं जिसे दुनिया 7 फरवरी को मनाती है। इस चुनौती से बच्चों को बचाने और ऑनलाइन सुरक्षित रहने के प्रति जागरूकता बढ़ाने के लिए यूनिसेफ स्टे सेफ ऑनलाइन अभियान चला रहा है। इस अभियान के तहत इंटरनेट उपयोग करने वाले यूजर को बताया जाता है कि कुछ संशय होने पर सच्चे दोस्त से सलाह लें, किसी बड़े से बात करें या फिर चाइल्ड लाइन पर कॉल करें। आयुष्मान पहले भी यूनिसेफ के कार्यक्रमों से जुड़कर विभिन्न सामाजिक मुद्दों पर जागरूकता पैदा करते रहे हैं।
क्या कहते हैं आयुष्मान खुराना
इन दिनों बच्चों को होने वाले ऑनलाइन जोखिमों के बारे में बात करते हुए, आयुष्मान कहते हैं कि, आज हम अपने जीवन का एक बड़ा हिस्सा अपने मोबाइल, कंप्यूटर के माध्यम से इंटरनेट पर जीते हैं। यह बढ़ने, फलने-फूलने, जुड़ने और संबंध बनाने के बेहतरीन अवसर प्रस्तुत करता है। हालांकि, यह उन बच्चों और युवाओं के लिए जोखिम भी प्रस्तुत करता है जो ऑनलाइन स्थान तक पहुंच और उपयोग करते हैं। सोशल मीडिया पोस्ट पर आपत्तिजनक टिप्पणियों के माध्यम से निजी संदेशों पर धमकाने और गाली देने से लेकर सार्वजनिक रूप से ट्रोल किए जाने तक, हम जानते हैं कि ऑनलाइन हिंसा बच्चों के मानसिक स्वास्थ्य और भलाई को प्रभावित कर रही है। बच्चे सामाजिक रूप से पीछे हट जाते हैं। एक की कमी के साथ संयुक्त सहायता प्राप्त करने के लिए सहायक वातावरण, या इंटरनेट तक पहुंच खोने का डर अक्सर बच्चों को चुप रहने के लिए प्रेरित करता है, जो उनके साथ हुए दुर्व्यवहार के बुरे प्रभावों को और बढ़ा देता है।
आयुष्मन की पहल से बच्चे होंगे सचेत
इंटरनेट दिवस पर अपने विचार साझा करते हुए अभिनेता आयुष्मान खुराना ने कहा कि, सबसे महत्वपूर्ण एक ऐसा माहौल बनाना है जहां बच्चे मदद लेना जानते हैं और जब वे ऑनलाइन दुर्व्यवहार या गोपनीयता भंग होने का सामना करते हैं तो मदद मांगने से डरते नहीं हैं। उन्हें पता होना चाहिए कि स्कूल में माता-पिता, शिक्षकों और साथियों सहित समर्थन लेने के लिए किसके पास जाना चाहिए।
फिल्म अभिनेता ने इंटरनेट और बच्चों को लेकर कहा कि, बच्चों को गोपनीयता सुनिश्चित करने के महत्व के बारे में जागरूक किया जाना चाहिए, ऑनलाइन और रिपोर्टिंग अपराधों के दौरान अज्ञात या संदिग्ध प्रोफाइल से संपर्क करने से बचना चाहिए। हमें अपने बच्चों को इंटरनेट के सचेत उपयोग के लिए प्रशिक्षित करना चाहिए। हमें स्वयं अच्छे ऑनलाइन व्यवहार का रोल मॉडल होना चाहिए, क्योंकि बच्चे हमसे सीखते हैं।
यह पूछे जाने पर कि वह युवा दिमाग के लिए कैसे सोचते हैं। जिससे युवा दिमाग के लिए ऑनलाइन स्थान अधिक समावेशी और सुरक्षित हो सकता हैं। इस पर अभिनेता ने ‘जागरूकता’ का तर्क दिया। अभिनेता का मानना है कि बच्चों को इंटरनेट पर सहज महसूस कराने के लिए बड़ों को रोल मॉडल बनना चाहिए। आयुष्मान का मानना है कि निजी जानकारी और तस्वीरों को अनावश्यक रूप से ऑनलाइन साझा करने से बचना चाहिए। अभिनेता आयुष्मान खुराना का मानना है कि इंटरनेट तक पहुंच खोने का डर एक कारण है कि बच्चे ऑनलाइन ट्रोल और हिंसा के बारे में बात नहीं करते हैं।
बता दे कि, इस वर्ष यूनिसेफ ने सुरक्षित इंटरनेट दिवस के विषय के रूप में एक साथ एक बेहतर इंटरनेट के लिए साझा किया है।
क्यों खास है यूनिसेफ का Stay Safe Online अभियान
यूनिसेफ बच्चों को इंटरनेट के खतरों से आगाह करते हुए कहता है कि इंटरनेट पर सुरक्षित रहने के लिए उपभोक्ताओं को इसे सुरक्षित स्थान बनाना होगा। यूनिसेफ का सुझाव है कि कुछ खास सावधानी और कुछ खास प्रक्रिया अपनाकर हम अपने बच्चों को इसके खतरे से बचा सकते हैं। इसके लिए जरूरी है कि हम इंटरनेट का उपयोग करते समय सकारात्मक संदेश दें। यदि सोशल मीडिया पर किसी से बातचीत कर रहे हैं तो साथी को स्माइली या हाई फाइव भेजकर समर्थन करें। इतना ही नहीं यूनिसेफ की राय है कि उपभोक्ताओं को ऑनलाइन सुरक्षा के बारे में प्रचार करना चाहिए। अपने दोस्तों को इंटरनेट के सुरक्षित उपयोग के बारे में बताएं और वीडियो साझा करें।
इसके साथ ही इंटरनेट का उपयोग करते समय हमें गोपनीयता का ध्यान रखना चाहिए और उसके लिए जरूरी है कि इंटरनेट का उपयोग करते समय अपनी सेटिंग्स और पासवर्ड की जांच करें।
न करें पासवर्ड साझा
चाहे इंटरनेट हो या सोशल मीडिया अपने मित्रों के साथ पासवर्ड साझा करने से बचें। अपने पासवर्ड के कोर्ड को इतना आसान नहीं बनायें कि लोग आसानी से उसका दुरूपयोग कर लें। समय—समय पर प्राईवेसी सेटिंग की समीक्षा करनी भी जरूरी है ताकि आपको पता रहे कि सोशल मीडिया अकाउंट पर आप जो पोस्ट करते हैं, वह कौन देख सकता है। मित्रता का आग्रह भेजने व स्वीकार करने भी सावधानी बरतने की जरूरत है। किसी को मित्रता का आग्रह भेजने या स्वीकार करने से पहले ये देखें कि क्या आप दोनों के सामान्य फ्रेंड कितने हैं। क्या आप एक ही शहर के हैं? अगर आप किसी अनजान को अपनी मित्रता सूची में जोड़ने को लेकर दबाव में हैं तो सबसे पहले अपनी गोपनीयता सेटिंग्स की जांच कर लें। ताकि जिन लोगों को आप नहीं जानते, वह आपकी ऐसी कोई जानकारी न देख पाए, जो आप उन्हें नहीं दिखाना चाहते हैं। दोस्ती के बाद भी हर जानकारी इंटरनेट के जरिए साझा नहीं करनी चाहिए। वेबसाइट पर पाॅप होने वाले नोटिफिकेशन पर भी अपनी जानकारियां साझा न करें।
अफवाहों के प्रति रहें सचेत
हम अक्सर देखते हैं कि सोशल मीडिया पर लोग अफवाह फैलाते हैं लेकिन एक उपभोक्ता होने के नाते हमें न तो अफवाह फैलाना चाहिए बल्कि यदि कोई अफवाह फैलाता है तो उन अफवाहों से बचें। न तो खुद ही हानिकारक या शर्मनाक कहानियां व तस्वीरें साझा करें और यदि कोई ऐसा करता है तो उससे बचें भी। अगर आप सोशल मीडिया पर कुछ ऐसा देखते हैं जो आपको परेशान या आहत करता है तो आप इसकी रिपोर्ट कर सकते हैं। सामुदायिक मानकों के खिलाफ होने वाली किसी विशिष्ट पोस्ट या फोटो की रिपोर्ट कर सकते हैं। अधिकतर सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म आपको ब्लॉक करने का विकल्प भी देता है। जिस सामग्री, व्यक्ति या संदेश को आप नहीं देखना चाहते उसे ब्लॉक कर सकते हैं।
निजता के अधिकार का करें सम्मान
बड़ी बात यह है कि हमें खुद के निजता का अधिकार की रक्षा तो करनी ही है साथ ही दूसरे के निजता का सम्मान भी करना है। हर किसी को निजता का अधिकार प्राप्त है। आपके पास यह अधिकार है तो ध्यान रखें कि दूसरे के पास भी है। इसलिए किसी अन्य के सोशल मीडिया अकाउंट को लॉग इन करने का प्रयास न करें और न ही बिना अनुमति उनके फोन का उपयोग करें।
ये कुछेक सावधानियां हैं जिनके जरिए हम इंटरनेट के दुरूपयोग के खतरों से पूरी तरह बच तो नहीं सकते लेकिन कुछ हद तक कम जरूर कर सकते हैं।
उल्लेखनीय है कि यूनिसेफ के सेलिब्रिटी एडवोकेट आयुष्मान खुराना समय—समय पर यूनिसेफ के कार्यक्रमों और अभियानों से जुड़कर बच्चों से जुड़कर जागरूकता पैदा करते रहे हैं। इंटरनेट के दुरूपयोग के प्रति यूनिसेफ द्वारा चलाये जा रहे कैंपेन स्टे सेफ ऑनलाइन कैंपेन को मिले आयुष्मान के समर्थन से निश्चित ही बच्चे इंटरनेट के बढ़ते खतरे के प्रति जागरूक होंगे।
