संतोष कुमार सिंह
नई दिल्ली – इस देश में मीडिया कर्मियों की स्वास्थय संबंधी प्रशिक्षण की दशा क्या है यह किसी से छुपी नहीं। लेकिन देश के अग्रणी संस्थान आईआईएमसी, और यूनिसेफ जैसे संस्थानों ने इस दिशा में पहल की है। कहते हैं कि कोशिश करने वालों की कभी हार नहीं होती। और आज उनकी कोशिश का नतीजा भी सामने आया, जब सार्वजनिक स्वास्थ्य, पत्रकारिता और संचार में अपनी तरह का पहला ‘महत्वपूर्ण मूल्यांकन कौशल पाठ्यक्रम प्रमाणपत्र आज भारतीय जनसंचार संस्थान के द्वारा 40 उभरते पत्रकारों को दिया गया। पत्रकारिता क्र छात्रों को प्रशिक्षण देने की यह कोशिश आगे कितनी फलीभूत होगी यह तो तब पता चलेगा जब ये किसी संस्थान में काम करेंगे लेकिन ऐसे जनस्वास्थय एवं संचार विषय पर आयोजित क्रिटिकल अप्रेजल स्किल प्रोग्राम की आवश्यकता है इससे सभी सहमत हैं। इसलिए यूनिसेफ एवं इसके साझेदार 2016 में मीडिया विश्वविद्यालयों एवं स्कूलों की साझेदारी में क्लासरूम शिक्षण एवं आॅनलाईन माध्यम के द्वारा इस पाठ्यक्रम को बढ़ावा देना चाहते हैं।
यूनिसेफ द्वारा पेश की गई इस प्रोग्राम की अवधारणा यूनिवर्सिटी ऑफ़ ऑक्सफोर्ड, थामसन रयूटेर्स फाउन्डेशन, जॉर्ज इन्सटीट्यूट ऑफ़ ग्लोबल हेल्थ की साझेदारी में तैयार की गई और इसे भारत के आईआईएमसी में शुरू किया गया है। पाठ्यक्रम मीडिया कर्मियों के लिए कौशल निर्माण की एक पहल है जो सार्वजनिक स्वास्थ्य से जुड़े मुद्दों पर प्रमाण आधारित रिपोर्टिंग में विशेषज्ञता का अवसर प्रदान करती है।
अपने सम्बोधन के दौरान देश के लिए यूनिसेफ के प्रतिनिधि लुईस जॉर्ज आर्सेनौल्ट ने बाल स्वास्थ्य के महत्वपूर्ण मुद्दे पर प्रकाश डालते हुए कहा, ‘‘देश भर में मीडिया एवं पत्रकारिता स्कूलों के साथ विचार-विमर्श करने के बाद हमने एक ऐसे साधारण पाठ्यक्रम की आवश्यकता महसूस की जो सार्वजनिक स्वास्थ्य, विशेष रूप से बच्चों के स्वास्थ्य से जुड़े मुद्दों पर वैज्ञानिक एवं प्रमाण आधारित रिपोर्टिंग को बढ़ावा दे।’’
इस मौके पर आईआईएमसी के महानिदेशक के. जी सुरेश ने कहा, ‘‘यह पाठ्यक्रम मीडिया कर्मियों और पत्रकारों के लिए बेहद महत्वपूर्ण है और उन्हें सार्वजनिक स्वास्थ्य के मुद्दों पर बेहतर रिपोर्ट देने में सक्षम बनाएगा। इसलिए जब आईआईएमसी को इस पायलट प्रोग्राम के लिए चुना गया, हमने बेहद खुशी से यूनिसेफ एवं अन्य राष्ट्रीय एवं अन्तरराष्ट्रीय साझेदारों के साथ इस प्रस्ताव को स्वीकार किया।’’ आईआईएमसी ने अपने दिल्ली परिसर में पिछले तीन महीने के दौरान इस पाठ्यक्रम का संचालन किया।
स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय में टीकाकरण के उपायुक्त डा. प्रदीप हल्दर ने कहा, ‘‘भारत का सार्वभौमिक टीकाकरण कार्यक्रम दुनिया के सबसे बड़े टीकाकरण कार्यक्रमों में से एक है तथा देश में सार्वजनिक स्वास्थ्य की दृष्टि से महत्वपूर्ण हस्तक्षेप है। हम मिशन इन्द्रधनुष के माध्यम से वैक्सीन के द्वारा रोकी जा सकने वाली बीमारियों से बच्चों को अधिकतम संरक्षण प्रदान करने हेतू प्रयासरत हैं। ये जीवन रक्षक टीके न केवल बच्चों के स्वास्थ्य की गुणवत्ता में सुधार लाती हैं बल्कि इन बीमारियों के कारण अस्पताल में भर्ती की दर को भी कम करती हैं, इससे निश्चित रूप से देश में स्वास्थ्य सेवाओं पर होने वाले व्यय का बोझ कम होता है।’’
सार्वजनिक स्वास्थ्य की गुणवत्ता बढ़ाने में मीडिया की सक्रिय भूमिका को ध्यान में रखते हुए युनिसेफ के द्वारा स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय के सहयोग से तथा अन्य साझेदारो की साझेदारी में इस प्रोग्राम की शुरूआत की गई है जो भारत सरकार के मुख्य मिशन इन्द्रधनुष प्रोग्राम के तहत आरआई में समग्र पारदर्शी वातावरण को बढ़ावा देगा।

