जमशेदपुर/रांची: पंचायती राज दिवस के मौके पर झारखंड के जमशेदपुर में राष्ट्रीय पंचायती सम्मेलन को संबोधित करते हुए प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि महात्मा गांधी कहते थे कि भारत गांव में बसता है लेकिन हम देख सकते हैं कि शहर और ग्राम के बीच दूरी बढ़ती जा रही है। इस दौरान पंचायत जनप्रतिनिधियों के विशाल जनसभा को संबोधित किया। कार्यक्रम में केंद्रीय ग्रामीण विकास मंत्री वीरेंद्र सिंह चौधरी ,झारखंड के राज्यपाल द्रौपदी मूर्मू ,मुख्यमंत्री रघुवर दासभी मौजूद थे।प्रधानमंत्री ने कृषि विभाग की ओर किये गये सिंगल विंडो सिस्टम का उद्धाटन किया. इसके अलावा प्रधानमंत्री 10 राज्यों के पंचायत प्रतिनिधियों को सम्मानित किया. वहीं चार राज्यों को ई-पंचायती अवार्ड प्रदान किया।
क्या कहा प्रधानमंत्री ने
देश की 2 लाख 58 हज़ार ग्राम सभाओं को जमशेदपुर से लाइव प्रसारण के माध्यम से संबोधित कर रहे प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि इस सभा में देशभर से क़रीब 3 हज़ार पंचायत प्रतिनिधियों के हिस्सा लेने की उम्मीद जताई जा रही है। इसका मक़सद देश भर में पंचायती राज और ग्रामीण विकास जैसे मुद्दों को मज़बूती प्रदान करना है। उन्होंने कहा कि गाव को आगे बढ़ाने का माहौल पैदा हुआ है। ग्राम उदय से भारत उदय अभियान के प्रति केंद्र सरकार प्रतिबद्ध है। देश के अलग-अलग हिस्सों ने विभिन्न अभियान चलाए जा रहे हैं। उन्होंने गांवों के प्रतिनिधियों से ग्रामोदय का संकल्प लेने का आह्वान किया।
हमारा देश बहुत बड़ा है दिल्ली ही देश हैं इस भ्रम से बाहर आना चाहिए. इसलिए हमने यहां इस कार्यक्रम को यहां करने का फैसला लिया ताकि जनता के बीच में यह कार्यक्रम हो। हमने कई समारोह दिल्ली से बाहर निकलकर किया । मुझे खुशी है कि ग्रामोदय से भारत उदय का कार्यक्रम भगवान बिरसा मुंडा की धरती से कर रहे हैं ।
गांव और शहर के बीच खाई बढ़ी है प्रधानमंत्री ने गांव के विकास पर जोर देते हुए कहा, शहर में अगर बिजली है, सड़क है तो गांव को भी यह सुविधा मिलनी चाहिए। हमने बजट पर इसी का ध्यान रखा है। हमने ध्यान रखा कि गांव यह कह सके कि यह मेरा बजट है, किसान कह सके कि मेरा बजट है। हमने यही प्रयास किया। गांव तक विकास पहुंचाने की कोशिश की।
गांव के प्रतिनिधि विकास के लिए संकल्प लें
प्रधानमंत्री ने कहा, अगर गांव में शानदार सड़क है तो गांव में ऐसी सड़क तो होनी ही चाहिए की लोगों का काम चल सके।
सरकार के कई मंत्री अफसर गांव में गये। उनके साथ बैठक की। यह साफ है कि गांव को आगे बढ़ाने का संकल्प ले लिया है। कई गांव शहरों से उत्तम व्यवस्था बनाने में सफल रहे हैं। गांव के प्रतिनिधि यह फैसला करें कि पांच साल के अंदर गांव को कुछ ऐसा देकर जाऊं कि लोग याद करें कि उस प्रतिनिधि ने हमारे गांव के लिए शानदार काम किया। सबको यह संकल्प करना चाहिए कि मेरे कार्यकाल में कोई ना कोई उत्तम कार्य करके जाना है।
महिला प्रतिनिधित्व पर भरोसा
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने महिला प्रतिनिधित्व पर भरोसा जताते हुए कहा कि आप मां हैं । आप पर जनता ने भरोसा किया है। अगर 40 प्रतिशत महिलाएं पंचायत में बैठी हैं। कानून ने अपना काम किया, मतदाताओं ने अपना काम किया। अब आपको फैसला लेना होगा. शौचालय और स्वच्छता के लिए आगे बढ़ना होगा। अगर एक बुढ़ी मां भी संकल्प कर लें कि मैं किसी को खुले में शौच नहीं जाने दूंगी। इसलिए मैं माताओं- बहनों से आग्रह करता हूं कि इस पर ध्यान दें।
आप फंड की चौकसी करें
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मिड डे मिल का जिक्र करते हुए कहा कि फंड पर नजर ऱखने की जिम्मेदारी आपकी है।गांव के स्कूल में बच्चों को सही खाना मिलता है या नहीं इस पर नजर रखने की जिम्मेदारी आपकी है।बालक तो भगवान का रूप है। आपको यह ध्यान देने की जरूरत है कि उस बच्चों को उचित भोजन मिलता है या नहीं। क्या किसी गांव में महिलाएं जब प्रसव पीड़ा में हो तो उसका ध्यान रखने की जिम्मेदारी गांव नहीं ले सकता। उसे अच्छा भोजन दे। उसका ध्यान रखे। दुख होता है जब प्रसव के दौरान किसी बहन की मौत हो जाती। क्या 40 प्रतिशत माताएं- बहनें इस पर ध्यान नहीं दे सकती। जिस लगन से आप परिवार संभालती है उसी लगन से आपको अपने गांव को संभालना है।
गांव के प्रतिनिधि के कंधे पर बड़ी जिम्मेदारी
गांव को अब फंड मिलता है। इससे आप अपनी पंचायत व्यवस्था को मजबूत बना सकते हैं। अब तो पंचायत चुनाव में भी प्रतिस्पर्धा बढ़ रही है। आपको अपनी ग्राम सभा को मजबूत बनाना होगा। प्रधानमंत्री ने गांव के प्रतिनिधि के कंधे पर बड़ी जिम्मेदारी का जिक्र करते हुए कहा, गांव में अगर कोई बच्चा स्कूल नहीं जा रहा है।
गांव के प्रतिनिधि को इस पर चिंता करनी चाहिए। उस बच्चे के मां – बाप से जाकर मिलना चाहिए। उसे प्रेरित करना चाहिए. पोलियो प्लस के लिए भी प्रतिनिधि को ध्यान रखना चाहिए कि गांव का कोई भी बच्चा प्लस पोलियो से बाकि ना रहे। प्रतिनिधि के सक्रिय होने से गांव विकास करता है। सरकारी अधिकारी भी ऐसे गांव में जाना पसंद करते हैं जहां के प्रतिनिधि और गांव एक्टिव हों। निष्क्रिय पंचायत में कोई नहीं जाना चाहता ।
क्या गांव के लोग यह तय नहीं कर सकते कि उनका अगले साल का लक्ष्य क्या है। हम अगर ऐसी योजना बनायें कि हमारा गांव सबसे अधिक हरियाली वाला गांव होगा, दहेज मुक्त गांव होगा, हमें लक्ष्य तय करना होगा। जबतक जन प्रतिनिधि और आम लोग जुड़कर काम नहीं करते तबतक गांव का विकास नहीं होगा। जबतक गांव का विकास नहीं होगा देश विकास नहीं करेगा।
आगे बढ़ रहे लोग ना रूके
गांव के विकास के लिए आपको काम करते रहना। प्रधानमंत्री ने बिजली के लिए अपने संकल्प को एक बार फिर दोहराते हुए कहा कि हमने लक्ष्य बनाया है कि गांव – गांव तक बिजली पहुंचायेंगे। गांव के लोगों को इसके लिए जागरूक होना होगा। योजना और पैसों की कमी नहीं है. बस जरूरत है आपको समझने की. (इनपुट प्रभात खबर से साभार)


