घूंघट बनाम स्त्री और एक समृद्ध गांव

0
1097

vivek umrao_n

​विवेक उमराव,संपादक- ग्राउंड रिपोर्ट आफ इंडिया

मैं अपनी जीवन संगिनी के साथ एक गांव में था। बहुत समृद्ध गांव। मेरी बेगमसाहिबा ने उस गांव की महिलाओं को घूंघट करते देखा। कुछ महिलायें मुझे भी घूंघट कर रहीं थीं। मेरी पत्नी मुझ पर बहुत नाराज मुझसे कहने लगीं कि आप घूंघट के विरोध में काम क्यों नहीं करते, यहां तक कि आप मना भी नहीं करते कि आपको घूंघट न किया जाए।…मैंने अपनी पत्नी से कहा कि मैं बिलकुल नहीं चाहता कि मुझसे घूंघट किया जाए। मैं घूंघट का बिलकुल भी समर्थक नहीं। गांव समृद्ध है, महिलाएं तेज तर्रार हैं, वे खुद तय करें कि उनको घूंघट करना है या नहीं।

ghoonghat-bspablaमैंने कहा इस गांव में घर में LCD टीवी कितने इंच का आए, कार किस माडल की आए, रेफ्रीजेरेटर किस कंपनी का आए, एसी व कूलर कितने लगेंगें, घर व बाथरूम में कौन कौन सा सामान लगे, बच्चों को साइकिल मोटरसाइकिल कौन सी खरीदी जाए, बच्चे किस स्कूल में पढ़ने जाएं आदि आदि। कितनी भैंसे व गाएं घर में रहें आदि सबकुछ महिलाएं ही तय करतीं हैं। वह भी टीवी में प्रचार देख देख कर, तो टीवी देखकर घूंघट का विरोध करना क्यों नहीं सीखतीं हैं।

सास से झगड़ा।
ससुर व जेठों से घूंघट काढ़कर भी जबरदस्त शब्दावली के साथ घंटों का झगड़ा व तू तू मैं मैं करना।  संपत्ति के बटवारे के लिए कमर कस कर लड़ने के तैयार रहना।
जब इन सब बकवास बातों, बेहूदगी करने व सुविधाओं को भोगने के लिए हिम्मत है तो घूंघट के लिए क्यों नहीं। संतान की सरकारी नौकरी घूस देकर लगवानी है, संतान को डोनेशन से इजीनियरी व मेडिकल पढ़वाना है, संतान की शादी कैसे हो, दहेज का लेनदेन आदि भी तय करतीं हैं। तो घूंघट का विरोध क्यों नहीं। यह इस गांव की महिलाओं को तय करना है कि उन्हें घूंघट करना है या नहीं। सक्षम महिलाएं हैं, पतिओं को नियंत्रित करने का आनंद लेती हैं,  ससुर व जेठों आदि को ठेंगें में रखतीं हैं। संपत्ति को अपना हक बताते हुए लड़ने के लिए कमर कसे तैयार रहतीं हैं, तो घूंघट का विरोध क्यों नहीं।

ghunghatमैंने कहा कि ए महिलाएं यह तक तय करतीं हैं कि उनका पति किससे कैसे व्यवहार करे, किस रिश्तेदार से कैसे रिश्ते रखे आदि आदि वरना पति का मानसिक सकून छीन लेती हैं। जब य़ह सब करने का मजा लेतीं हैं तो घूंघट का विरोध क्यों नहीं। घूंघट के विरोध के लिए कोई दूसरा क्यों अभियान चलाए, महिलाएं खुद क्यों न चलाएं।

मैंने कहा कि महिलाएं घूंघट के विरोध के लिए दो कदम चलें मैं सौ कदम साथ चलने को तैयार हूं, लेकिन चूंकि इस गांव की महिलाएं मजबूत हैं, समृद्ध हैं, बहुत कुछ नियंत्रित करतीं हैं, निर्णय प्रक्रिया को नियंत्रित करतीं हैं, संपत्ति के लिए झगड़े करतीं हैं। तो घूंघट के लिए संघर्ष की शुरुआत इनको खुद ही करनी होगी।

नोट –
यह एक सच्ची घटना पर आधारित है।  एक गांव की स्थिति पर आधारित है, हर गांव की स्थितियां भिन्न हो सकतीं हैं।

_

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here