देशज भाषा में कैसे हो पर्यावरण पत्रकारिता ये अनुपम मिश्र से सीखा: रवीश कुमार

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 संतोष कुमार सिंह

सखिया वा घर सबसे न्यारा..सखिया वा घर सबसे न्यारा
जहां नहीं सुख—दुख, सांच झूठ नहीं..पाप न पुण्य पसारा
……सखिया वा घर सबसे न्यारा…
जहां पूर्ण पुरूष हमारा ..सखिया वा घर सबसे न्यारा।
…………….उड़ जाएगा हंस अकेला..जग दर्शन को आएगा। जी हां,हंस अकेला ही उड़ गया है लेकिन उनकी कर्म भूमी रही गांधी शांती प्रतिष्ठान कैसे यह भरोसा कर ले कि मात्र 22 साल की उम्र में इस प्रांगण में आकर यहीं का होकर रह गया,वो उन्हें छोड़ कर चला गया है। मौका है गांधीवादी,पर्यावरण विद्अनुपम मिश्र की श्रद्धांजली सभा..का।

anupammmmmmmmmmmmmmmmmmm_nजो आया है उसकी अपनी यादें हैं अनुपम मिश्र के साथ। प्रतिष्ठान के सचिव रामचंद्र राही अनुपम मिश्र को याद करते हुए कहते हैं कि एक मौलिक आदमी, जिसने विश्वविद्यालय की डिग्रियां लीं लेकिन समाज,प्रकृति और उसके समक्ष उपस्थित संकटों से सीखा। जिज्ञासा पैदा हुआ तो जिज्ञासा पूरी की,लोगों में जिज्ञासा बढ़ाई और जिज्ञासुओं का साथ दर्ज करता गया। जल संकट में डूबकर,उसके समाधान की दिशा में भरपूर प्रयास कर, उसके संरक्षण की बारीकियों को हमारे सामने रख गया। उस विरासत को सहेजना एक चुनौती है। उन्होने कहा कि अनुपम मिश्र की अभिलाषा और आकांक्षा राजसत्ता के करीब जाकर गौरव पाने की कभी नहीं रही। आंदोलन में शामिल हुआ। चंबल के बीहड़ों की यात्रा की लेकिन कभी कैपिटल आई नहीं हुआ। मैं को हम में विलित करने का प्रयास करता रहा।

ravveish_nसाहित्यकार विश्वनाथ त्रिपाठी ने कहा कि हमें अनुपम मिश्र के गांधीवादी सौंदर्यबोध पर ध्यान देना चाहिए। उनकी सुंदरता निरंतर साधना के द्वारा अर्जित है। उन्हें देखकर गांधी और गांधी के विचार याद आते हैं। व्यक्ति की भाषा उसके व्यक्तित्व की गहराई बता देती है। अनुपम जब बिहार की नदियों का बयान करते हैं तो लगता है जल सजिव हो गया।
टीवी पत्रकार रविश कुमार ने अनुपम मिश्र को याद करते हुए कहा कि भले ही आमने—सामने की मुलाकात अनुपम जी से कम हुई हो लेकिन टेलीफोनिक संवाद के जरिए मैनें उनसे बहुत कुछ सीखा है। उनसे बात होने पर मेरी भाषा कुछ दिन के लिए ठीक हो जाती थी। अनुपम मिश्र की वजह से गांधी को पढ़ा। वे एक अच्छे लाईब्रेरियन की तरह थे..जिन्होंने गांधी को पढ़ने का तरीका समझाया। रवीश ने कहा कि उनके सुझाए हुए बिंदूओं और बताये हुए तरीकों से पर्यावरण पर 50 कार्यक्रम बने जिसे लोगों ने काफी पसंद किया। पर्यावरण की पत्रकारिता अपनी भाषा में कैसे की जा सकती है..इसकी सीख अनुपम मिश्र ने दी। एक बार उन्होंने टॉपिक सुझाया कि ‘खेती अहिंसक तरीके से कैसे की जा सकती है। मेरे लिए बिल्कुल नया था। लेकिन उनकी प्रेरणा से कार्यक्रम बना और काफी सफल हुआ। अनुपम मिश्र का जाना हम जैसे अनगढ़ों के लिए काफी नुकसान है। प्रोफेसर आनंद कुमार ने कहा कि अनुपम मिश्र की जिंदगी जिससे बहुतों ने अपनी जिंदगी का चिराग जलाया।

pradarshani_nवरिष्ट पत्रकार रामबहादुर राय, साहित्यकार मंगलेश डबराल, वरिष्ट पत्रकार बनवारी, गांधी स्मृति एवं दर्शन समीति के कर्ता धर्ता दीपांकर श्रीज्ञान आदि ने संबोधित किया।दिल्ली सरकार के जल संसाधन मंत्री कपिल मिश्रा ने कहा कि वे अनुपम मिश्र की बताये हुए रास्तों से दिल्ली के 20 बावड़ियों और वाटर बॉडिज को पुर्नजीवित करने का प्रयास करेंगे..और इन सब का नाम अनुपम मिश्र के नाम से रखा जाएगा।
जीपीएफ में आयोजित श्रद्धांजली सभा में बड़ी संख्या में गांधीवादियों,पर्यावरण विद् और छात्र—छात्राओं ने शिरकत की। सभा का संचालन सोपान जोशी ने किया।

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