बदलते मौसम में बरतें सावधानी..कीट प्रबंधन पर दें ध्यान

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new-logo_nपंचायत खबर टोली
मऊ : मौसम का मिजाज बदल रहा है। इस बदलते मौसम ने किसानों की परेशानी बढ़ा दी है। ऐसे में नित नए तेवर-कलेवर धारण कर रहे मौसम में दलहन-तिलहन को लेकर किसान भाई चिंतित हैं। लेकिन सिर्फ चिंतित होने से बात नहीं बनने वाली  इस दौरान सचेत रहने की आवश्यकता है। सरसों में फूल आने के बाद माहू कीट का नियंत्रण न होने पर यह उपज काे 50 प्रतिशत प्रभावित कर देता है। दूसरी ओर दलहन में मौसम की अनदेखी करने पर फूल झड़ जाते हैं। ऐसे में किसानों को तिलहन की फसल के बचाव के लिए बहुत ही सचेत रहने की आवश्यकता है। इस बीच विशेषज्ञों ने समय से दवा के साथ नीम आधारित कीटनाशक सहित दो प्रतिशत यूरिया का छिड़काव करने की सलाह दिया है।

dalhannnnnnnnnnnnn2_nक्या कहते हैं विशेषज्ञ
जिला कृषि सलाहकार व कृषि विज्ञान केंद्र के वरिष्ठ वैज्ञानिक डा.एनके सिंह बताते हैं कि सरसों में फूल बनने प्रारंभ हो गए हैं। फसल में पूर्णतया फूल आने के दौरान माहू कीट का प्रकोप बढ़ता है। आंशिक रूप से यह फूल को 20-25 प्रतिशत नष्ट कर देते हैं। कीट का प्रभाव बढ़ने पर यह फसल को आधा या उससे ज्यादा नुकसान पहुंचाते हैं। रोग लगने से पूर्व इसके बचाव के लिए नीम आधारित कीटनाशक का प्रयोग श्रेयकर होगा। नीम आयल या नीम रक्षक आदि दवा की आधा लीटर मात्रा सौ लीटर पानी में मिलाकर छिड़काव करना चाहिए। कीट का प्रभाव होने के बाद मिथाइल डाई मिथिएट या रिबोर नाम से बाजार में उपलब्ध दवा की 250-300 एमएल मात्रा सौ लीटर पानी में मिलाकर प्रति बीधा की दर से छिड़काव करना चाहिए। गलन और ठंड के दौरान शीत लहर चलने पर अरहर, चना-मटर सहित दलहनी फसल के फूल झड़ने लगते हैं। ऐसे में दो प्रतिशत यूरिया (4 किग्रा) सौ लीटर पानी में मिलाकर छिड़काव करने फूल से झड़ना रूक जाता है।

materकरें उचित प्रबंधन
डा. सिंह ने बताया कि रबी की मुख्य फसल गेहूं के लिए पूर्णतया अनुकूल बने मौसम में किसानों को उर्वरक प्रबंधन को लेकर सचेत रहना होगा। इस दौरान घास नियंत्रण भी आवश्यक है। घास की अधिकता होने पर पौधे की बढ़वार रुकने साथ कल्लों की संख्या भी प्रभावित होगी।

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