बिहार का एक नशामुक्त शाकाहारी गाँव:
शराब बंदी के बावजूद जहरीली शराब पीकर मरने वालों की संख्या में बिहार, देश में सबसे आगे है। इसकी सबसे बड़ी वजह यह है की शराबबंदी के बावजूद भी बिहार सरकार अवैध शराब बनाने वालों और कारोबारियों पर नकेल कसने में विफल रही है। आएदिन कोई न कोई जहरीली शराब पीकर अपनीं जान गवां देता है।
बिहार के वैशाली जिले का कुशवाहा टोला जिसे लोग शाकाहारी गाँव की संज्ञा भी देते हैं, ने खुद को शराब और मांसाहार से मुक्त घोषित कर दिया है। ऐसे में यह निश्चित ही एक सकारात्मक समाचार है।
बिहार को शराब मुक्त बनाने के लिए सीएम नीतीश कुमार ने प्रदेश में पूरी तरह से शराबबंदी कर दी, लेकिन इसके बावजूद शराब से जुड़े कारोबारियों पर नकेल नहीं कस पाई है। वहीं वैशाली जिले का कुशवाहा टोला, जिसे लोग ‘शाकाहारी गांव’ की संज्ञा भी देते हैं, बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के बिहार के शराब मुक्त सपने को साकार करता नज़र आता है।
गाँव के लोगों का मानना है कि जब कोरोना का दौर था तब देश का कोई ऐसा कोना मुश्किल से बचा होगा जहाँ कोरोना के मरीज न रहें हों। लेकिन हमारा गांव कोरोना के प्रकोप से बिलकुल बचा हुआ था क्योकि यहाँ नशा तो दूर कोई मांसाहारी भी नहीं था।
ग्रामीण बताते हैं कि इनके पूर्वज न तो मांसाहारी थे और न ही नसा करते थे। अब ये उन्ही की तरह फिर से गांव को नशामुक्त बरकरार रखने में जुटे हैं।
इस गांव में मांस का सेवन या फिर किसी भी प्रकार का नशा करना किसी जुर्म से कम नहीं है। ग्राम पंचायत इसपर नज़र रखती है। गांव में शराब का सेवन तो दूर पान, गुटखा तक बेचना वर्जित है। गांव में मुर्गी और बकरी पालन भी नहीं किया जाता है।
शाकाहारी गाँव की यह पहल आस-पास के गावों को भी प्रभावित कर रही है। पास गावों के लोग इसी तर्ज पर अपने गाव को नशामुक्त करने की बात करने लगे हैं।
शाकाहारी टोले के लोगों का कहना है कि हमारा गाँव नशामुक्त होने के साथ मुकदमा मुक्त भी है। क्योकि यहाँ कोई अनावश्यक विवाद भी नहीं होता और हमें थाने के चक्कर काटने से भी मुक्ति है। इसके पीछे का कारण लोग नशामुक्ति को बताते हैं। ज्यादातर घरेलू विवाद और हिंसा के पीछे नशा ही जिम्मेदार होता है।
ग्रामीणों ने कहा कि मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के राज्य में शराबबंदी से बहुत पहले से ही इस गाँव में नशा वर्जित है।
प्रदेश के मुखिया नितीश कुमार को एक बार यहाँ का दौरा करना चाहिए और इस गाँव की उपलाभ्धि को देश भर में प्रस्तुत करना चाहिए ताकि लोगों को पता लग सके कि लोग बिना नशा के भी रह सकते हैं।
