
नई दिल्ली: दलहनी फसलों में कम पानी में बेहतर उपज देने वाली नकदी फसलों की सूची में बीन्स का नाम आता हैं। इसे कम लागत वाली फसल भी मानी जाती है। ऐसा इसलिए क्योंकि इसकी खेती के लिये अलग से खाद-पानी की जरूरत नहीं होती। ये कम पानी और सूखे इलाकों में भी उतनी ही अच्छी उपज देती है। भारत में इसकी खेती पशु चारे के उद्देश्य से भी की जाती है। वहीं, किसान इसकी खेती कर बेहतर मुनाफा भी कमा सकते हैं। अगर आप भी बीन्स की खेती करना चाहते हैं और उसकी उन्नत वैरायटी कोहिनूर 51-IUS-500 का बीज मंगवाना चाहते हैं तो आप नीचे दी गई जानकारी की सहायता से बीज ऑनलाइन अपने घर पर मंगवा सकते हैं।
यहां से खरीदें बीन्स के बीज
किसान मौजूदा समय में धान-गेहूं के अलावा दलहनी फसलों की खेती बड़े पैमाने पर करने लगे हैं। इससे किसानों की बंपर कमाई भी हो रही है। इसलिए किसान बड़े स्तर पर इसकी खेती कर रहे हैं। ऐसे में किसानों की सुविधा के लिए राष्ट्रीय बीज निगम ऑनलाइन बीन्स के बीज बेच रहा है। इस बीज को आप एनएससी के ऑनलाइन स्टोर से खरीद कर बंपर कमाई कर सकते हैं। साथ ही इसे ऑनलाइन ऑर्डर करके अपने घर भी मंगवा सकते हैं। हालांकि बीन्स की खेती मार्च-अप्रैल में की जाती है।
बीन्स के किस्म की खासियत
बीन्स की कोहिनूर 51-IUS-500 किस्म का फल हरे रंग का होता है। इसके फल अन्य किस्मों से लंबे होते हैं। इस बीन्स की बीज को लगाने के 50-60 दिनों के अंदर पहली तुड़ाई शुरु हो जाती है। वहीं, ये किस्म 90 से 100 दिनों में पूरी तरह से तैयार हो जाती है। इस किस्म की खेती किसान तीनों सीजन यानी रबी, खरीफ और जायद में कर सकते हैं।
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इतने में खरीदें बीन्स के बीज
अगर आप भी बीन्स की कोहिनूर 51-IUS-500 किस्म की खेती करना चाहते हैं तो इस किस्म के बीज का 500 ग्राम का पैकेट फिलहाल 42 फीसदी की छूट के साथ 550 रुपये में राष्ट्रीय बीज निगम की वेबसाइट पर मिल जाएगा। इसे खरीद कर आप आसानी से बीन्स की खेती कर सकते हैं।
किस विधि से करें इसकी खेती
बीन्स की खेती किसी भी मौसम में की जा सकती है। ऐसे में एक हेक्टेयर खेत में बीन्स की बुवाई के लिए कम से कम 15-20 किलो बीज लेकर बीजोपचार कर लें। फिर खेत की तैयारी करने के बाद बीन्स की बुवाई कतारों में करें। हर लाइन के बीच 30 सेमी. की दूरी और हर पौधे के बीच 10 सेंमी. का फासला रखें। बुवाई के तुरंत बाद खेत में हल्की सिंचाई कर दें, जिससे फसल को अंकुरण में मदद मिल सके।

