अपनी किस्मत बदलने के इंतजार में है थारू बस्ती

0
634

logo_n-जनजातिया हक से वंचित समाज मूलभूत सुविधाओं से दूर, मुख्यधारा से कटे
पंचायत खबर टोली
मऊ : 1973 में परदहा ब्लाक के सेमऊर गांव के पूर्वी-उत्तरी क्षेत्र के वीराने में तीन परिवारों का कुनबा आकर जमीदारों की सहमति से बस गया। इनका रहन-सहन, जाति, पहचान और क्षेत्र की जांच किए बगैर सरकारी कागजात में इन्हें अनुसूचित जाति के नोना उपवर्ग में सम्मिलित कर लिया गया। मूल रूप से थारू जनजाति के उस तीन परिवार का कुनबा अाज भले ही 55 से 60 घरों में तब्दील हो गया हो, लेकिन अपने जनजातिय हक और सरकारी सुविधाओं से यह लोग आज भी वंचित हैं। वैज्ञानिक युग के इस दौर में ढ़िबरी संस्कृति के बीच जी रहे इस जनजाति के लोगों में अपनी किस्मत बदलने का अभी इंतजार है। सामाजिक बदलाव की मुख्यधारा से पूर्णतया कटे इस समाज का अभी रोशनी की किरण का इंतजार है। इन्हें इंतजार है एक ऐसे बदलाव का जो इनके अधिकारों को प्राप्त करने में इनका सहायक हो सके।

kosish-nजनपद मुख्यालय से मात्र तीन किमी दूरी पर एक एकड़ प्रक्षेत्र में स्थित इस बस्ती में सर्व शिक्षा अभियान को मुंह चिढ़ाते दर्जनों बच्चे यहां-वहां दिख जाएंगे। एकमात्र इंडिया मार्का हैंडपंप प्रदूषित जल उगल रहा है। शिक्षा के स्तर में आंशिक सुधार आने के बाद भी अधिकांश शब्द ज्ञान से अपरिचित हैं। अभी भी रहन-सहन, खानपान और जीवन शैली में थारू जनजाति की झलक दिख जाती है। माइक्रो ओवन और इंडक्शन के दौर में खुले आसामन में मिट्टी के चूल्हा पर नित्यप्रति अपने आहार का प्रबंध करते हैं। राशन, रोजगार की तलाश में बंजारे की तरह यहां-वहां घूम यायावरी जीवन पद्वति के बीच शाब्दिक ज्ञान से दूर अपनी संस्कृति और परंपरा के प्रति प्रतिबद्ध दिखते हैं। मुुख्यालय से लेकर ब्लाक तक कई बार कोशिश करने के बाद कामयाबी न मिलने के बाद भी यह समाज अपने हक को लेकर संगठित है। दो किमी की दूरी स्थित विकास खंड द्वारा इस बस्ती की सुधि कभी ली ही नहीं गई। बस्ती निवासी रामराज, सुबाष, मदन, सरवन, मनोज, मंजित, महरूना आदि बताते हैं कि बस्ती का यह क्षेत्रफल पहले नगरपालिका में होने की वजह से मिर्जाहादीपुरा में सरकारी सस्ते राशन गल्ले की दुकान होने से लोग इस सुविधा से वंचित रह गए। ग्रामीण क्षेत्र में समायोजित होने के बाद भी अभी तक इसका सबको नहीं मिल पा रहा है। आज तक मनरेगा योजना द्वारा रोजगार गारंटी के तहत किसी को कार्य नहीं मिल पाया है।

kosish-2_nकोशिश संस्था ने इस समाज को उनके अधिकार के बारे में जागृत करना सिखाया। उसके प्रयास से बिजली और सड़क की सुविधा तो प्राप्त हो गई, लेकिन पेयजल और जल निकासी की समस्या का निजात न होने से बस्ती में संक्रामक रोगों का खतरा बढ़ता ही जा रहा है। शौचालय के अभाव में लोग खुले में शौच करने के लिए विवश हैं। ब्लाक एवं जिला मुख्यालय द्वारा स्थिति को संज्ञान में लेते हुए थारू समाज के विकास के लिए आवश्यक प्रयास करने की नितांत आवश्यकता है। कोशिश ने इस दौरान शिविर का आयोजन किया.

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here