पंचायत खबर टोली
मऊ : नदी की सुरक्षा व स्वच्छता को लेकर वैसे तो बड़े—बड़े दावे हैं। राष्ट्रीय स्तर पर निरंतर प्रयास किया जा रहा है। नमामि गंगे परियोजना में देव नदी गंगा व उसकी सहायक नदियों की साफ-सफाई को लेकर भारी-भरकम पैसा खर्च किया जा रहा है। लेकिन जमीन पर हकिकत क्या है और इन दावों की किस तरह से पोल खुल रही है वो तमसा के किनारे गंदगी को देखकर समझा जा सकता है। पौराणिक नदी तमसा का तटबंध वर्षों से निरंतर जल रहा है। नगरपालिका परिषद द्वारा नियमित सफाई के कचरे को स्लाटर हाउस के बगल में गिराकर नियोजित रूप से जलाया जा रहा है। हालांकि जिला प्रशासन द्वारा नदी पर दो बार सफाई अभियान के दौरान तटबंध पर कचरा न गिराने की प्रतिबद्धता जताई गई पर हकीकत में आज भी प्रतिदिन नदी की कगार पर जलते अंगार व उसके अवशेष देखे जा सकते हैं। इससे नदी तट पर अतिक्रमण के साथ जल व पर्यावरणीय प्रदूषण का खतरा बढ़ता ही जा रहा है।

एक तरफ पौघा रोपण दूसरी तरफ कचरा विसर्जन
इस बीच वन विभाग द्वारा मानसून सीजन प्रारंभ होते ही नगर में नदी तटबंध पर 25 पौधरोपण किए जाने की योजना है। ऐसे में नियमित कचरा गिराकर जलाए जाने वाले इस क्षेत्र विशेष में पौधरोपण की योजना को ग्रहण लग सकता है। वर्ष 2013 में प्रशासन द्वारा नदी पर चलाए अभियान के दौरान सड़क के किनारे लगाए गए पौधे अब वृक्ष का रूप ले चुके हैं। इसके बाद आगे ईंट की दीवार बनाकर निरंतर कचरा जलाए जाने की स्थिति में इस वर्ष पौधरोपण के लिए विभाग ने इस स्थल पर गड्ढा की खोदाई नहीं किया है। इतना ही नहीं भेदसरा से भीटी तक 10 किमी तक डेढ़ लाख लोगों के मलजल को 10 नालों से निरंतर गिराया जा रहा है।

जगह—जगह कचरे का ढ़ेर
वैसे तो यहां स्लॉटर हाउस कागजात में बंद कर दिए गये हैं लेकिन स्लाटर हाउस से निकलने वाले अवशेष मस्जिदिया घाट पर देखे जा सकते हैं। सर्वत्र प्लास्टिक, गंदगी और प्रदूषित जलप्रवाह का उपयोग नित्यप्रति हजारों लोग करते हैं। प्रदूषण का आंकड़ा खतरनाक स्तर को पार कर गया है। राष्ट्रीय उपयोगी कृषि सूक्ष्मजीव ब्यूरो (एनबीएआईएम) कुशमौर की रिपोर्ट में नदी तट पर उगने वाली फसल भी प्रदूषित जल के कारण स्वास्थ्य के लिए हानिकारक हो गई है। प्रदूषण रोकने के लिए सभी नालों पर नगरपालिका द्वारा डबल घेरादार चेंबर बनाने की योजना अभी पूरी तरह से क्रियान्वित नहीं हो पाई है। बेलवाघाट पर पहली बार सफल क्रियान्वयन के बाद बमघाट में भी इसका निर्माण कराया गया लेकिन इसके बाद भी अन्य नालों को लेकर नगरपालिका के निष्क्रिय प्रयास से नदी में दिन प्रतिदिन प्रदूषित मल-जल गिर रहा है।
नदी की सुरक्षा हो, बने मनोरम
प्रसिद्ध चिकित्सक डा. संजय सिंह, होम्योपैथिक चिकित्साधिकारी डा. नम्रता श्रीवास्तव, डा. अरविंद श्रीवास्तव, साहित्यिकार पंडित दयाशंकर तिवारी, श्रीगंगा-तमसा सेवा मिशन संस्थापक ज्ञानेंद्र मिश्र बताते हैं कि नदी पर हो रहे अवैध अतिक्रमण को ध्यान में रखते हुए प्रशासन द्वारा यथोचित कार्रवाई करने की आवश्यकता है। इस दौरान नदी पर निरंतर जल रहे कचरा का तत्काल प्रभाव से रोक लगाने की आवश्यकता है। नदी व तटबंध की सुरक्षा के साथ नालों से गिरने वाली गंदगी से रोक के त्वरित प्रयास किए जाने चाहिए। तमसा नगर की लाइफ लाइन है। इसकी सुरक्षा को लेकर नगरपालिका व जिला प्रशासन को सार्थक प्रयास करने की आवश्यकता है। पूर्व में दो बार चलाए गए सफाई अभियान के दौरान गंदगी साफ करने के साथ जल प्रवाह के सभी अवरोध को समाप्त कर दिया गया है। स्वयंसेवी संस्थाओं व बुद्धिजीवियों को भी इस दिशा में आगे बढ़कर प्रतिभाग करना होगा।
