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पंजवार तो झांकी है..अन्य गांव बाकी हैं

सिवान: कोरोना का कहर ​धीरे—धीरे बिहार के गांवों में पांव पसारने लगा है। सरकार की तैयारियां नाकाफी साबित हो रही है। लोग दहशत के माहौल में जीने को अभिशप्त हैं। खेती किसानी का समय है। प्रवासियों का गांव आना जाना इस माह में हमेशा से होता रहा है। इस बीच बिहार के एतिहासिक गांव पंजवार …

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…दूर रहकर भी कहां रहा कभी गांव से दूर

यह सिवान, रघुनाथपुर थाना का कौसड़ स्टेशन है मगर आज भी यहां से न कोई ट्रेन गुजरती है, न बस। आज भी यह गांव है। मेरा गांव। हालांकि सुना है कि सरयू ( घाघरा ) के किनारे गांव के दक्षिण में जो बांध है वह 20 फीट चौड़ी पक्की सड़क में तब्दील हो रही है। …

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टुकुर-टुकुर दोमुंहा में बैठ अपनों का बाट जोहती आंखें

शक्ति शरण जीवन तो कमोबेश शहर में ही गुजरा। अभी भी रोजी-रोटी की चाहत लिये बाल-बच्चे समेत महानगर में हूं। लेकिन हर प्रवासी का एक ठांव होता है, हर शहरी का एक गांव होता है, वैसे ही मेरा भी एक गांव है। तो आईये आपको गांव की ओर ले चलता हूं। विचरण कराता हूं गांव …

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