गर्मीस में निरीह जीवों की प्यास बुझाने आगे आया बिहार, शुरू हुआ सेवा भाव से भरा नया अभियान

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वर्षा वर्मा

 

 

पटना: बिहार में भीषण गर्मी के बीच पशुपालन निदेशालय ने पशु-पक्षियों के लिए पानी की व्यवस्था सुनिश्चित करने की अपील की है। निदेशालय ने एक विज्ञापन जारी कर आम लोगों से छोटे-छोटे प्रयासों के जरिए मूक प्राणियों की जान बचाने का आग्रह किया। लोगों से छतों, बालकनियों और परकोटों पर पानी के बर्तन रखने की सलाह दी गई है। दरअसल, हरियाली की कमी, जलाशयों के सूखने और नदियों के जलस्तर में गिरावट से पशु-पक्षियों के सामने पेयजल संकट गहरा गया है। ऐसे में यह अभियान पर्यावरण संरक्षण और जीव कल्याण की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है।

 

 

 

 

पानी का संकट, पक्षियों के लिए चुनौती
भीषण गर्मी ने न केवल इंसानों, बल्कि पशु-पक्षियों के लिए भी संकट पैदा किया है। नदियों का जलस्तर गिरने और जलाशयों के सूखने से पक्षियों और मवेशियों को पीने का पानी नहीं मिल पा रहा। पशुपालन निदेशालय के अनुसार, पानी की कमी के कारण कई पक्षी और पशु बेहोश होकर गिर पड़ते हैं और कुछ की मृत्यु तक हो जाती है। पशु चिकित्सा विशेषज्ञों का कहना है कि पानी में खनिज लवण और ऊर्जा की कमी पक्षियों के स्वास्थ्य को गंभीर रूप से प्रभावित करती है। इस स्थिति में आम लोगों की जागरूकता और छोटे प्रयास इन मूक जीवों की जिंदगी बचा सकते हैं।

 

 

 

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पशुपालन निदेशालय की अपील
पशुपालन निदेशालय ने कहा कि गर्मी में पानी अमृत के समान है। खासकर पशु-पक्षियों के लिए, निदेशालय ने लोगों से घरों के बाहर, छतों, बालकनियों और परकोटों पर पानी के बर्तन रखने की अपील की है। इसके साथ ही, छाया की व्यवस्था करने और पानी में थोड़ा गुड़ मिलाने की सलाह दी गई है, ताकि पक्षियों के शरीर में इलेक्ट्रॉलाइट्स का संतुलन बना रहे। उपयोग किए गए नारियल के खोल जैसे बायो-वेस्ट को पानी के बर्तन के रूप में इस्तेमाल करने से पर्यावरण संरक्षण को भी बढ़ावा मिलेगा।

 

 

 

 

नागरिकों की भूमिका और बायो-वेस्ट प्रबंधन
निदेशालय ने सुझाव दिया कि लोग सार्वजनिक जल स्रोतों को गंदा न करें और पक्षियों के लिए छायादार स्थान बनाएंं। पुराने नारियल के खोल या अन्य बायो-वेस्ट का इस्तेमाल आप पानी रखने के लिए कर सकते हैं। छोटे बर्तनों में पानी रखने से पक्षी आकर्षित होते हैं और उनकी प्यास बुझती है। यह अभियान ना केवल जीव कल्याण को बढ़ावा देता है, बल्कि बायो-वेस्ट प्रबंधन के जरिए पर्यावरण संरक्षण को भी प्रोत्साहित करता है। पशुपालन निदेशालय ने लोगों से इस नेक पहल में हिस्सा लेने और मूक प्राणियों की मदद करने की अपील की है।

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