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आओ बनाएं…‘सबका भारत’

शिवाजी सिंह 16 अगस्त, 1947 लाल किला का लाहौरी गेट प्रचीर। स्वतंत्र भारत का तिरंगा झंडा खुले गगन में लहराने के लिए उद्वेलित हो रहा था। भारत के प्रथम प्रधानमंत्री पंडित जवाहर लाल नेहरू ने जैसे ही तिरंगा लहराया, तोपों की सलामी के बीच ‘भारत माता की जय’ का उद्घोष चारों दिशा में गुंजयमान होने …

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गांव में ही मिल रहा है रोजगार, जल-जीवन-हरियाली योजना बन रहा है जीविका का आधार

मंगरूआ पटना: लॉकडाउन के कारण जिस तरह से प्रवासी मजदूर गांव लौट रहे हैं वैसे में बाहर से अपने गांव लौटे ग्रामीणों को लेकर एक तरफ गांव वालों के मन में इनके संक्रमित होने को लेकर आशंका के बादल तो हैं, वहीं इनके लौटने से गांव में चहल पहल है। कहीं क्वारंटिन सेंटर सजा हुआ …

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प्रवासियों के गांव लौटने में तलाशें भविष्य की संभावना

डॉ सत्यवान सौरभ कोरोना संक्रमण से जूझ रहे विश्व में भारत की स्थिति अभी तक सही बनी हुई है। भारत की जनसँख्या को देखते हुए यहाँ संक्रमण के मामले एवं मौते बहुत कम हुई है। मगर लॉक डाउन के बाद भी हमें सचेत रहना होगा। एक छोटी सी चूक हमारे सब किये पर पानी फेर …

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गांव के बदलाव में पलायन की बड़ी भूमिका

अरविन्द मोहन पूर्वी चम्पारण में सुगौली के निकट मेरा गांव पजिअरवा पर्याप्त चर्चित और मुझसे काफी ज्यादा नाम और धन कमाने वालों का गांव है। पर मजदूरों के पलायन सम्बन्धी अपने अध्ययन के दौरान मुझे इस गांव का जो परिचय मिला वह काफी कुछ नया था। यह अध्ययन मैंने बिड़ला फाउंडेशन के फेलोशिप के तहत …

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‘आज मेरा गांव है. घर है. पता नहीं कल होगा या नहीं…’

कमलेश कुमार सिंह सुपौल: ‘भरल – भरल छलै बाग बगैचा, सोना कटोरा खेत, देख – देख मोरा हिया फटैया, सगरो पानी गांव …’. बारिश की फुहारों के बीच सहरसा से सुपौल जाने वाली सड़क पर कार फर्राटा भर रही थी. और 55 साल के ड्राइवर अनवर इस लोक गीत के जरिए हाल ए कोसी बयां …

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बुंदेलखंड से दस लाख लोगों का पलायन

अमित त्रिपाठी 3600करोड़ रुपया भी युवाओं को रोजगार नहीं दे सका, नहीं लग सका बुन्देलखण्ड से युवाओं के पलायन पर ब्रेक 2016 में कराये गया था सर्वे। दिल्ली, पंजाब, सूरत, मुंबई, चंडीगढ़ नौकरी की तलाश में जाते हैं यहां के युवा। बांदा: बदहाल बुंदेलखंड से अब तक लगभग 10 लाख लोग पलायन कर चुके हैं। …

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प्रदेश में ​विकास का दावा..खाड़ी देशों में सबसे ज्यादा यूपी-बिहार के मजदूर

संतोष कुमार सिंह  नई दिल्ली: बिहार,उत्तर प्रदेश खासकर  पूर्वांचल से बड़ी संख्या में पलायन देश के महानगरों में ही नहीं अपितु छोटे—छोटे शहरों में भी रोजी रोटी की तलाश में होता रहा है। एक तरह से कहें तो इस पूरे क्षेत्र में ये प्रवासी मजदूर ही गांव—गंवई के लोगों के खुशहाली का सबब बने हुए …

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