पंचायत खबर टोली
नई दिल्ली: सरकार की तरफ से बार—बार यह कहा जा रहा है कि गांव में कैस की दिक्कत नहीं होगी। खेती किसानी करने वालों को हर तरह की सुविधा दी जा रही है। उन्हें नकदी की कोई कमी नहीं होगी। बातें तो कैसलेस सोसाईटी तक पहुंच गयी है। इस बीच सुप्रीम कोर्ट ने ग्रामीण इलाकों में नोटबंदी से हो रही परेशानी को लेकर केंद्र सरकार से जवाब तलब किया है। सुप्रीम कोर्ट ने सरकार से पूछा कि ग्रामीण इलाकों में रहने वाले ज्यादातर लोग सहकारी बैंकों पर निर्भर रहते हैं। नोटबंदी से ग्रामीण क्षेत्रों में जूझ रहे लोगों के लिए सरकार ने क्या कदम उठाए हैं। सहकारी बैंको के समक्ष जो परेशानियां हैं उसे कम करने के लिए क्या उपाय किए गये।
अदालत ने कपिल सिब्बल और पी चिदंबरम के हवाले से कहा कि इनका कहना है कि को-ऑपरेटिव बैंकों के कामकाज ना होने से किसान परेशान हैं। वकील पी चिदंबरम ने सहकारी बैंकों का पक्ष रखते हुए कहा कि नोटबंदी के बाद से ग्राामीण इलाकों के सहकारी बैंकों को शामिल न करने से गांव की अर्थव्यवस्थ चरमरा गई है।
इसके जवाब में अटॉनी जनरल मुकुल रोहतगी ने अदालत को बताया कि केंद्र ने जो अतिरिक्त हलफनामा दिया है वे सहकारी बैंकों की स्थिति को लेकर ही है। ऐसा नहीं है कि हमें स्थिति की जानकारी नहीं है लेकिन सहकारी बैंकों में उचित बुनियादी ढांचे और व्यवस्था की कमी है। साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि सरकार ने नोटबंदी के बाद सहकारी बैंकों को जान बूझकर इससे बाहर रखा है, क्योंकि नकली नोटों का पता लगाने के लिए इन बैंकों के पास व्यवस्था नहीं है। आठ नवम्बर को नोटबंदी अधिसूचना के बाद स्थिति को सामान्य करने के लिए उठाये गए कदमों को रेखांकित करते हुए कहा गया है कि नये नोटों के अनुरूप परिवर्तित किये गए एटीएम की संख्या दिन पर दिन बढ़ रही है और सरकार किसानों को दिये जाने वाले अनुदान की निगरानी कर रही है। उसने अदालत को बताया था कि सरकार अभियान के दौरान दी गई विभिन्न छूटों की भी निगरानी कर रही है और आज शुक्रवार (2 दिसंबर) से पेट्रोल पंप पर 500 रुपये के पुराने नोट नहीं लिये जाएंगे क्योंकि डेबिट कार्ड और क्रेडिट कार्ड के इस्तेमाल में तेजी आ रही है।

अदालत ने नोटबंदी को लेकर डाले गये याचिकाओं के संबंध में कहा कि सारी याचिकाओं को वर्गीकृत करके सूची बद्ध कर पेश किया जाए। नोटबंदी पर अगली सुनवाई 5 दिसंबर को होगी।