आया वसंत.. गूंजने लगे फाल्गुनी गीत और ढोलक-नगढि़या पर जम कर लग रहे हैं थाप

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पूजा

वसंत पंचमी से फाल्गुन गीतों का मधुर गायन शुरू हो गया है। नगढि़यों और ढोलक के मधुर स्वर गूंजने लगे हैं। यह फाग गायन रंग पंचमी तक होंगे। इसके साथ ही होली की तैयारियां भी शुरू हो गई हैं। जो फरवरी मार्च और अप्रैल के मध्य इस क्षेत्र में अपना सौंदर्य बिखेरती है। हालांकि माघ महीने की शुक्ल पंचमी से वसंत ऋतु का आरंभ होता है। यह फाल्गुन वर्ष का अंतिम मास है। और चैत्र पहला। इस प्रकार हिंदू पंचांग के वर्ष का अंत और प्रारंभ वसंत में ही होता है। इस ऋतु के आने पर सर्दी कम हो जाती है। और मौसम सुहावना हो जाता है। पेड़ों में नए पत्ते आने लगते हैं। आम के पेड़ मीठे आम से लद जाते है। और खेत सरसों के फूलों से भरे पीले दिखाई देते हैं।

प्राकृतिक सुंदरता से परिपूर्ण वसंत ऋतु का विशेष धार्मिक और सांस्कृतिक महत्व है। लोग कलाकार नगढि़यों, ढोलक आदि वाद्य यंत्रों की पूजा करते हैं। सरसों के फूल देवी-देवताओं को अर्पित किए जाते हैं। इसके साथ ही होली की तैयारियां भी शुरू हो जाती हैं। फाल्गुन और होली के गीत मधुर स्वर चारो ओर गूंजने लगते हैं।

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वसंत ऋतु से रंग पंचमी तक लोक कवि ईसुरी की फाल्गुन और अन्य लोक कवियों के चौकड़िया, छंद और होली के गीत गाए जाते हैं। फाल्गुन गायन की तैयारियां हर जगह शुरू होती हैं। मंदिरों में फाल्गुन एवं मधुर भजन व ब्रज के गीत गाए जाते हैं।

 

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