
— खेलना है बांके बिहारी संग होली तो पहूचें, मथुरा वृंदावन
Mathura: आज ब्रज में होली रे रसिया…होरी रे रसिया…बरजोरी रे रसिया…। फाग का मौसम आ गया है और ब्रज क्षेत्र सजने लगा है क्योंकि…ब्रज के होली का एक अपना ही अलग महत्व है। यहां होली का पर्व बड़े ही हर्ष उल्लास के साथ धूमधाम से मनाया जाता है। वसंत पंचमी के दिन से ही ब्रज में होली उत्सव की शुरुआत हो जाती है। ब्रज के बृजवासी और यहां के मंदिर होली के रंग में रंगना शुरू हो जाते हैं। वसंत पंचमी पर फाल्गुन उत्सव जैसे ही शुरू होता है। तो मथुरा वृंदावन के प्रमुख मंदिरों में भगवान होली अपने भक्तों के साथ खेलते हैं।
वसंत पंचमी से शुरू हो जाता है फाग उत्सव
वसंत पंचमी पर होली का डांडा गड़ने के बाद 3 फरवरी से ब्रज में 40 दिवसीय फाग महोत्सव की धूम शुरू हो जाती है। इधर बरसाना में राधारानी के चरणों में गुलाल अर्पित होगा, तो उधर वृंदावन में ठाकुर बांके बिहारी फेंटा बांधकर हजारों भक्तों के साथ अबीर-गुलाल की होली खेलकर ब्रज में होली का प्रारंभ करेंगे। इसी के साथ धीरे-धीरे ब्रज के मंदिरों में होली की धूम शुरू हो जाएगी। जो 7 मार्च को रंगभरनी एकादशी से चढ़ जाएगी।
40 दिवसीय होली का आयोजन
दिव्या फाग महोत्सव एक 40-दिवसीय उत्सव है। जो बसंत पंचमी से शुरू होता है। और होली तक चलता है। यह महोत्सव मथुरा और वृंदावन में बहुत धूमधाम से मनाया जाता है। हालांकि वसंत पंचमी दुनियां भर में सरस्वती पूजन और बसंत ऋतु के आगमन के रूप में मनाया जाता है। लेकिन ब्रजभूमि में बसंत को लेकर ब्रज के मंदिरों में तैयारियां शुरू हो गयी हैं। खासकर, बरसाना और वृंदावन में इस दिन आस्था का रंग उमड़ेगा। पहले दिन राधारानी के चरणों में गुलाल अर्पित किया जाएगा। इसी के साथ मंदिर में होली का डांढा गाड़ा जाएगा।
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इसी के साथ वृंदावन में ठाकुर बांके बिहारी महाराज के दर्शन करने के साथ भक्तकुंज गलियों में होली का आनंद उठायेंगे। रंग-बिरंगी पोशाक में विराजमान ठाकुरजी को गुलाल अर्पित कर पंच मेवा युक्त केसरिया मोहनभोग का भोग लगाया जाता है। मंदिरों में वसंत पंचमी के दिन से ही अबीर रंग और गुलाल उड़ाना शुरू हो जाता है। यहां इस फाग उत्सव में देश ही नहीं, बल्कि विदेशों से श्रद्धालु इस फाल्गुन उत्सव का आनंद लेने के लिए ब्रज पहुंचते हैं।


