शर्मशार हुआ गांधी का चंपारण..लज्जित महसूस कर रहा है बिहार

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             मंगरूआ

चंपारण: अप्रैल 1917 में गांधी के चंपारण सत्याग्रह के 100 वर्ष पूरा होने के अवसर पर चंपारण सहित पूरे बिहार में महात्मा गांधी को याद करने और उनके विचारों के प्रचार प्रसार के लिए कई कार्यक्रम हुए। देश में गांधी जी के 150 वीं जयंती वर्ष के मौके पर कई कार्यक्रम हुए। न सिर्फ सरकार के स्तर पर बल्कि सामाजिक संगठनों ने भी अपने—अपने स्तर पर गांधी को याद किया। उनके विचारों के प्रचार—प्रसार से खुद को जोड़ा। यही नहीं वर्ष 2022 में आजादी के 75 वर्ष पूरा होने के वर्ष में आजादी का महोत्सव मनाया जा रहा है। लेकिन इन सब कवायदों के बावजूद यदि   महात्मा गांधी की कर्मभूमि बिहार के पूर्वी चंपारण जिले के मोतिहारी में गांधी का अपमान हो इसकी कल्पना शायद ही किसी ने ​की होगी। आज चंपारण सहित पूरा बिहार असमाजिक तत्वों के इस कृत्य से लज्जित महसूस कर रहा है।
कुछ ऐसा ही घटित हुआ चंपारण के चरखा पार्क में जहां असामाजिक तत्वों के द्वारा बापू के आदमकद प्रतिमा को खंडित कर दिया गया। यह वही चरखा पार्क है जिसका निर्माण वर्ष 2017 में ऐतिहासिक गांधी स्मारक के सामने किया गया था। इसके पिछले भाग में महात्मा गांधी की आदमकद प्रतिमा की स्थापना कर पार्क की शक्ल में विकसित करने का कार्य किया जा रहा था। प्रतिमा का अनावरण 9 सितम्बर 2020 को सांसद राधामोहन सिंह, मंत्री प्रमोद कुमार आदि ने किया था। इस पार्क के रखरखाव, साज सज्जा व विस्तारीकरण रखरखाव का काम कोऑपरेटिव सोशल रिस्पांसिबिलिटी कार्यक्रम के अंतर्गत पावर ग्रिड कारपोरेशन ऑफ़ इंडिया लिमिटेड द्वारा किया जा रहा है।

आनन-फानन में पहुंचे आलाधिकारी, दोषियों पर कार्रवाई का दिया भरोसा
स्थानीय लोगों द्वारा इस घटना की सूचना दिये जाने के बाद जिला प्रशासन तुरंत हरकत में आया। घटना की सूचना मिलते ही जिलाधिकारी शीर्षत कपिल अशोक एवं पुलिस अधीक्षक डॉ. कुमार आशीष, सदर एसडीएम सौरभ सुमन यादव व सदर पुलिस उपाधीक्षक अरुण कुमार गुप्ता चरखा पार्क का जायजा लेने पहुंचे और पूरे मामले की जांच कर जिम्मेदार लोगों पर कार्रवाई का कड़ा निर्देश दिया। उन्होंने नगर आयुक्त को चरखा पार्क की समुचित सुरक्षा के लिए सीसीटीवी कैमरे लगाने, नाइट गार्ड व लाइटिंग की व्यवस्था करने का निर्देश दिया, ताकि भविष्य में ऐसी घटना नहीं हो।

घटना स्थल का निरीक्षण करने के दौरान जिलाधिकारी ने कहा कि चम्पारण गांधी की कर्मभूमि रही है जहां से उन्होंने अहिंसा की लड़ाई लड़ी थी। यही वजह है कि आज सभी लोगों के आत्मा में गांधी जी का विचार बसा हुआ है। जो असामाजिक तत्व ये समझते हैं कि मूर्ति छतिग्रस्त करने से उनके विचार समाप्त हो जाएंगे तो ऐसा नहीं है। वहीं, एसपी आशीष कुमार ने कहा कि इस घटना के चश्मदीद लोग मिले हैं, जिनके निशानेदेही पर नशा लेने वाले कुछ युवाओं को चिन्हित किया गया है। उनकी गिरफ्तारी के प्रयास किये जा रहे हैं। सदर डीएसपी अरुण कुमार गुप्त ने बताया कि प्रतिमा तोड़ने वालों की पहचान कर ली गई है। उनकी गिरफ्तारी के लिए नगर पुलिस की टीम छापेमारी कर रही है। पुलिस को जानकारी मिली है कि रविवार की रात कुछ नशेड़ियों ने प्रतिमा को क्षतिग्रस्त किया। एक चाय दुकानदान ने नशेड़ियों को देखा है।

दुखी हैं गांधी वादी कार्यकर्ता व स्थानीय लोग
इस घटना को लेकर गांधी के अनुयायियों में गहरा क्षोभ देखा जा रहा है। स्थानीय वरीय चिकित्सक आशुतोष शरण ने इसे शरारती तत्वों द्वारा किया गया मूर्खतापूर्ण कार्य करार दिया है। उन्होंने कहा कि यहां महात्मा गांधी को एसडीओं कोर्ट में सजा सुनाई गयी थी। शताब्दी वर्ष समारोह के अवसर पर
प्रतिमा को लगाया गया है और पार्क को विकसित किया गया है। गांधीवादी व युवा समाजसेवी रंजीत गिरि के नेतृत्व में कई लोगों ने चरखा पार्क स्थिति गांधी जी की प्रतिमा तोड़े जाने के विरोध में चरखा पार्क पहुंच कर प्रशासन के खिलाफ रोष व क्षोभ व्यक्त किया। वही महात्मा गाँधी की आत्मा से इस कुकृत्य के लिए माफी मांगी गई। समाजसेवी रंजीत गिरि ने कहा कि जिस महात्मा गांधी ने निलहे अंग्रेजों के अत्याचार देश को आज़ादी दिलाई उसी कर्मभूमि में उनका अपमान चम्पारण के माथे पर एक तरह से कलंक के समान है।


सोशल मीडिया पर इस घटना को लेकर तीखी प्रतिक्रिया दी गई है। वरिष्ट पत्रकार और चंपारण के वासी अनुरंजन झा ने लिखा है कि चम्पारण में गांधी की मूर्ति को जिन लोगों ने तोड़ा है निश्चित तौर पर उन लोगों को गांधी के बारे में रत्ती भर मालूम नहीं होगा। शायद उनके जन्मदिन और पुण्यतिथि तक की भी जानकारी न हो । दोष उनका नहीं है जिन्होंने तोड़ा वो तो निमित्त मात्र हैं, दोष तो उन आत्माओं का है जो उनसे ऐसे कर्म करवाने के लिए तैयार कर रहा है एकदम फिदायीन की तरह। इसलिए अगर चेतना है तो अब भी चेतिए। जिस दिन उस चम्पारण में जॉर्ज ऑरवेल की प्रतिमा को क्षतिग्रस्त किया गया था उस दिन अगर वहां के समाज ने उसका पुरजोर विरोध किया होता तो आज गांधी तक बात नहीं पहुंचती। रही बात चम्पारण की तो उस शहर के गांधी संग्रहालय पर काबिज कुछ ऐय्याश लोगों से बेहतर तो ये उदंडी हैं जिन्होंने सबकुछ दिखाकर किया, वो तो सालों से गांधी की प्रतिमाओँ को अंदर ही अंदर खोखला कर रहे हैं । नजर उस तरफ भी घुमानी पड़ेगी।
उल्लेखनीय है कि चंपारण सत्याग्रह को जानिए
चंपारण का किसान आंदोलन अप्रैल 1917 में हुआ था जिसे चंपारण सत्याग्रह के रूप में जाना जाता है। महात्मा गांधी ने दक्षिण अफ्रीका में सत्याग्रह और अहिंसा के अपने आजमाए हुए अस्र का भारत में पहला प्रयोग चंपारण की धरती पर ही किया। यहीं उन्होंने यह भी तय किया कि वे आगे से केवल एक कपड़े पर ही गुजर-बसर करेंगे। इसी आंदोलन के बाद उन्हें ‘महात्मा’ की उपाधि से विभूषित किया गया। इसी आंदोलन के दौरान ही राजेंद्र प्रसाद, आचार्य कृपलानी, मजहरूल हक, ब्रजकिशोर प्रसाद जैसी महान विभूतियां गांधी के संपर्क में आईं।

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