संसद या विधानमंडलो में महिलाओं को 33 फीसदी आरक्षण दिये जाने का विधेयक भले ही राजनीतिक दलों में आम सहमती के नाम पर लटका हुआ हो, और आगामी बजट सत्र में भी महिला संगठनों की तरफ से लगातार हो रही मांग के बावजूद कोई राह बनता हुआ न दिख रहा हो। लेकिन सरकार पंचायतों में हर तरह के सुधार चाहती है। हर तरह के संशोधन लाने को तैयार है ताकि महिलाओं की भागीदारी बढ़े। केंद्र सरकार ने आज कहा है कि वे संसद के आगामी बजट सत्र में पंचायतों में महिलाओं के लिए 33 प्रतिशत आरक्षण को बढ़ाकर 50 प्रतिशत करने के बारे में संशोधन लाएगी।
‘पंचायती राज (अनुसूचित क्षेत्रों का विस्तार) अधिनियम के कार्यान्वयन: विषय और दिशा’ संबंधी एक राष्ट्रीय कार्यशाला में बोलते हुए ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज मंत्री बिरेंदर सिंह ने कहा कि यद्यपि कुछ राज्य पंचायतों में महिलाओं को 50 प्रतिशत आरक्षण प्रदान कर रहे हैं, लेकिन संविधान में संशोधन के बाद इसे पूरे देश में लागू कर दिया जाएगा। उन्होंने आशा व्यक्त की कि सभी राजनैतिक दल इस संशोधन का समर्थन करेंगे। उन्होंने यह भी बताया कि इससे कानून में बदलाव भी होगा, जिसके तहत मौजूदा एकल कार्यकाल के बदले 5 सालों के दो कार्यकालों के संबंध में महिलाओं के लिए वार्ड आरक्षित किए जाएंगे ताकि वे विकास गतिविधियों की निरंतरता बनाए रख सकें।
बिरेंदर सिंह ने कहा कि 1995 में प्रदत्त भूरिया समिति के रिपोर्ट के आधार पर पंचायती राज (अनुसूचित क्षेत्रों का विस्तार) अधिनियम 1996 में लागू किया गया था। बिरेन्द्र सिंह ने जोर दिया कि जनजातियों के विकास के लिए सभी राज्य अधिनियम को लागू करें क्योंकि जनजातियां विकास के लिए अब और इंतजार नहीं कर सकतीं। जनजातियां 65 वर्षों से विकास की प्रतीक्षा कर रही हैं। उन्होंने कहा कि यदि अधिनियम को प्रभावशाली तरीके से लागू किया जाए तो इससे निर्णय लेने की प्रक्रिया में लोगों की भागीदारी बढ़ेगी क्योंकि ऐसी स्थिति में जनजातीय आबादी ग्राम पंचायत स्तर की अपेक्षाकृत गांव स्तर पर छोटी ग्राम सभाओं में अपने मुद्दे आसानी से उठा सकेंगी।
(केंद्रीय ग्रामीण विकास, पंचायती राज, पेयजल एवं स्वच्छता मंत्री, श्री चौधरी बीरेंद्र सिंह 04 फरवरी, 2016 को नई दिल्ली में पेसा अधिनियम (अनुसूचित क्षेत्रों में पंचायतों के विस्तार संबंधी प्रावधान) विषय पर आयोजित सम्मेलन के अवसर पर, पंचायती राज राज्य मंत्री, निहालचंद और पंचायती राज विभाग के सचिव, एस.एम. विजयनंद भी मौजूद हैं।
इस अवसर पर पंचायती राज राज्य मंत्री निहाल चंद ने कहा कि अधिनियम से उग्रवाद को रोकने और जनजातीय आबादी की शिकायतों को दूर करने में बहुत सहायता होगी। उन्होंने 20 वर्षों के बाद उक्त अधिनियम पर कार्यशाला का आयोजन करने के लिए राजग सरकार को धन्यवाद दिया। निहाल चंद ने कहा कि पांचवें अनुसूचित क्षेत्रों के लिए 14वें वित्त आयोग के तहत वित्तीय सहायता उपलब्ध है, जिससे बुनियादी सेवाओं को प्रदान करने में सहायता होगी।
गौरतलब है कि इस कार्यशाला में 10 राज्यों के पंचायती राज्य एवं जनजातीय विकास मंत्री हिस्सा ले रहे हैं। दो दिवसीय कार्यशाला में अधिनियम संबंधी नियमों, राज्य पंचायती राज अधिनियमों के प्रावधानों के अनुपालन, संबंधित कानूनों, ग्राम सभा अधिकारिता, क्षमता निर्माण रणनीतियों, ग्राम पंचायतों की संरचनाओं आदि पर चर्चा की जाएगी।


