बजट 2016: गांव की झोली में क्या हो?

0
612

प्रत्येक वर्ष की भांति इस साल के लिए केंद्र सरकार आगामी कुछ दिनों में बजट पेश करेगी। जैसा कि ज्ञात है कि 72 फीसदी आबादी आज भी गांव में है। ऐसे में सवाल उठता है कि चुनी हुई सरकार की प्राथमिकता में गांव कहां खड़ा है। गांव के विकास, गांव के मुददे, हमारे गांव—गवई, छोटे कस्बों के मतदाताओं ने लोकतांत्रिक प्रक्रिया में बढ—चढकर भागीदारी के बावजूद केंद्र सरकार कितनी तवज्जो देती हैं। इस भागीदारी से लोकतंत्र मजबूत होता है, और अपेक्षा भी बढती है। पानी,शौचालय, स्वास्थय, कृषि, पलायन के रूप में जो समसयायें उनके सामने मुंह बाये खड़ी हैं और इस सत्ता के विकेंद्रीकरण के जरिए उनका समाधान चाहती हैं, वास्तविक स्वराज मांगती हैं, उनको हल करने में यह स्पस्ट से भी ज्यादा बहुमत वाली सरकार क्या रूख अख्तियार करती है। इन्ही सब सवालों के इर्द—गिर्द गांव की तस्वीर बदलने वाली प्रत्येक योजना, उनका कार्यान्यवयन, कार्यान्यवयन में उभरती कमिंयों और शासन द्वारा किये जा रहे प्रयासों को लेकर सवाल पूछा जाना जरूरी है।

chandan budget_nआगामी बजट के जरिए चुनी हुई स्पस्ट बहुमत वाली सरकार की तरफ गांव और गांव में रह रहे देश के दो तिहाई लोग इस उम्मीद से देख रहे हैं कि यह सरकार उनके जनजीवन में कितना बदलाव लाती है। हमे यह पूछना होगा कि आपने हमारे सवालों को कितना तरजीह दिया, उसके समाधान की दिशा में क्या प्रयास किये जिससे हमारा जीवन स्तर उंचा उठा और भारतीय लोकतंत्र जो कि गांवो में बसता है, वह किस हद तक अपना हक मांग सका। वे हमारी अपेक्षाओं पर कितने खड़े उतरे। पिछले दिनों केंद्र सरकार ने मनरेगा को जिस तरह से एतिहासिक बताया है उससे उम्मीद भी बंधी है, कहा जा रहा है कि भूमि अधिग्रहण बिल को लेकर कांग्रेस द्वारा बनाई गई किसान विरोधी छवि को दूर करने के लिए मोदी सरकार बजट में महत्वपूर्ण ऐलान कर सकती है। केंद्र सरकार इस महीने के अंत में पेश होने वाले बजट में गांवों पर खास फोकस कर सकती है। मनरेगा और फूड सिक्योरिटी जैसी योजनाओं पर होने वाले खर्च में भारी बढ़ोतरी की जा सकती है। फूड सिक्योरिटी एक्ट के तहत होने वाले खर्च में दोगुना बढ़ोतरी की जा सकती है और फसल बीमा योजना के तहत आवंटित राशि भी बढ़ाई जा सकती है। इसके अलावा प्रधानमंत्री ग्रामीण सड़क योजना में तेजी लाई जाएगी और दीनदयाल उपाध्याय ग्राम ज्योति योजना पर खर्च बढ़ाया जाएगा। इसके साथ ही प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा प्रत्येक सांसद के जरिए मॉडल विलेज बनाने के सपने को क्या बजट के जरिए पंख लगाया जाएगा ताकि विकास के काम तेज गती से हों, या इस पर आपकी क्या राय है, इसके लिए किस तरह का बजट आवंटन किया जाना चाहिए, आपकी राय सामने आना जरूरी है।

हमारा मानना है कि हर दिल में एक गांव बसता है। हम इस विषय पर न सिर्फ आपकी राय लेना चाहते हैं बल्कि बजट को समझने वाले विशेषज्ञों, ग्रामीण विकास पर काम कर रहे जानकारों, किसानों, खेतिहर मजदूरों की भी राय लेंगे ताकि बजट से पूर्व सभी पहलू पर चर्चा हो, एक दिशा मिले। हम अपेक्षा करते हैं कि आप भी इस सफर में सहर्ष सहभागी बनेंगे और पूछेंगे कि गांव के लिए बजट में क्या? हम जेटली के बजट पर नजर रखेंगे और टटोलने की कोशिश करेंगे कि आपने हमारे सवालों को कितना तरजीह दिया, जिससे हमारा जीवन स्तर उंचा उठा और भारतीय लोकतंत्र जो कि गांवो में बसता है, वह किस हद तक अपना हक मांग सका। वे हमारी अपेक्षाओं पर कितने खड़े उतरे। गांव और पंचायतों की समस्याओं, वहां के मुददों, चिंताओं और व्याप्त समाधान को सामने लाने के लिए गांव—गवंई की खबर को प्रमुखता देने के लिए पंचायत खबर के नाम से फेसबुक पर पेज बनाया है। आप से उम्मीद है कि आप भी इससे जुड़ेंगे। इस पेज को देख्नने के लिए आप इस लिंक पर क्लिक करें। www.facebook.com/panchayatkhabar आपके सहयोग और सहकार की अपेक्षा रखते हैं। इस पेज को लाईक करें।
आप हमारे वेबसाईट https://panchayatkhabar.com/ सै भी अवश्य जुड़ें।

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here