केंद्र सरकार द्वारा जारी किये गये 20 स्मार्ट शहरों की सूची में बिहार के एक भी शहर का नाम न होने से मुख्यमंत्री नीतिश कुमार को निराशा हुई है। वे केंद्र द्वारा विकासशील राज्यों के साथ भेदभाव का आरोप लगा रहे है। इस बाबत उन्होने केंद्रीय शहरी विकास मंत्री वैंकैया नायडू से उनके संसद भवन स्थित कार्यालय में मुलाकात की और बिहार जैसे विकासोन्मुखी राज्य को सम्प्रति चयनित 20 मात्र स्मार्ट सीटी की सूची में शामिल नहीं करने पर अपनी अप्रसन्नता से अवगत् कराते हुए बिहार को ‘‘स्मार्ट सीटी‘‘ विकसित करने की सूची में पुनर्विचार का अनुरोध किया।
‘केंद्र सरकार ने पहले पूरे देश के लिए स्मार्ट सिटी बनाने की बात कही थी। आज मात्र 20 शहरों को स्मार्ट सिटी बनाया जा रहा है। केंद्र सरकार ने शहरों की संख्या सीमित कर ली और बिहार के किसी शहर को उन्होंने स्मार्ट सिटी के रूप में नहीं लिया।
नीतिश कुमार ने कहा कि चयनित ‘‘स्मार्ट सीटी‘‘ सूची को देखने से स्पष्ट होता है कि विकसित राज्यों में ही स्मार्ट सीटी भी विकसित की जा रही है। अविकसित या विकासशील राज्यों को सम्मिलित नहीं किया गया है। परिणामस्वरूप केन्द्र सरकार का समावेशी विकास की परिकल्पना न केवल धुमिल होती है, बल्कि राज्यों के बीच असंतुलन का दृश्य भी उजागर होता है। बिहार में पहले से ही शहरीकरण कम है, ऐसे में बिहार जैसे राज्यों को स्मार्ट सिटी में शामिल न किये जाने से क्षेत्रीय असंतुलन बढ़ेगा। स्मार्ट सिटी के लिए जिन शहरों का चयन हुआ है, या जो मानक रखे गये हैं उनमें बदलाव किये जाने की आवश्यकता हैं ताकि समावेशी विकास का लक्ष्य पूरा हो सके और क्षेत्रीय असंतुलन दूर हो। कुमार ने बताया कि केन्द्र सरकार द्वारा सम्प्रति प्रतिवर्ष एक शहर के लिए 100 करोड़ की राशि पाँच वर्षों तक दिए जाने की योजना है। जिसके तहत पाँच वर्षों में एक शहर को 500 करोड़ दिया जाना है, जो राशि आवश्यकता से कहीं कम है। उन्होंने आग्रह किया कि इस तरह की विषमताओं को दूर किया जाए।
नीतिश कुमार ने कहा कि स्वच्छ भारत अभियान के तहत शौचालय निर्माण हेतु शहर के लाभान्वुकों को दिए जा रहे कुल 4000 को भी न काफी बताया और कहा कि ग्रामीण क्षेत्र में राज्य सरकार द्वारा अपने निधि से कुल रू0-8000 लाभान्वुकों को दिए जा रहे है। इस सम्बन्ध में उनहोनें मांग की है कि शहरी एवं ग्रामीण क्षेत्रों में समान रूप से 12000 दिए जाने का प्रावधान किया जाए। सॉलिड वास्ट मैनेजमेंट के लिए अभी केंद्र सरकार द्वारा प्रोजेक्ट का 20 फीसदी वहन किया जाता हैं जो अपर्याप्त है।
