-आदर्श गांव की घोषणा के बीते 3 साल 3 माह..सांसद सिर्फ दो बार गए बड़ौरा; नहीं जाते अधिकारी
कैमूर: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देश भर के गांवों को आदर्श बनाने का सपना दिखाया। सांसदों को गांव आदर्श बनाने का जिम्मा दिया। बड़े ही जोर शोर से गांव को गोद लिया गया इन गांव के विकास के बड़े बड़े वायदे और दावे किए गए लेकिन 3 साल 3 माह बीतने को है गांव को दिखाए गए सपने अधूरे के अधूरे ही हैं रविवार को बक्सर सांसद अश्वनी कुमार चौबे केंद्रीय स्वास्थ्य राज्य मंत्री बने लिहाजा उनके संसदीय क्षेत्र बक्सर का माहौल खुशनुमा दिखा लेकिन एक दूसरी तस्वीर भी है जो उदासी की है। लोग उस वादे की बाबत पड़ताल कर रहे हैं कि सांसद चौबे ने आदर्श गाँव बडौरा का आदर्श ग्राम बनाने का जिम्मा लिया था उसका क्या हुआ?
बक्सर संसदीय क्षेत्र का बडौरा गांव बहुत बड़ा है करीब 10 हजार की आबादी साल 2015 में पीएम मोदी के फरमान के बाद गांव को आदर्श बनाने का सपना दिखाया गया इस सपने ने गांव के लोगों की नींद खत्म कर दी लोगों को लगा गांव ऐसा होगा कि यहां स्वास्थ्य, शिक्षा, सड़क, सिंचाई, सुरक्षा, बिजली, पेयजल, बैंक शाखा यानी हर बुनियादी सुविधाएं गांव में मौजूद रहेंगी लेकिन आधा से अधिक समय बीत जाने के बाद भी गांव में एक भी सुविधा मयस्सर नहीं हुई। ग्रामीण बताते हैं कि सांसद के द्वारा एक व्यायाम शाला भवन जरूर बनवाया गया है लेकिन व्यामशाला में उपकरण नहीं है। 5-6 साल पहले स्थानीय राज्य सरकार ने उप स्वास्थ्य केंद्र बनवाया लेकिन आज तक इस स्वास्थ्य केंद्र पर ना तो एक डॉक्टर की नियुक्ति हुई और ना ही एक एएनएम की। यानी स्वास्थय भी भगवान भरोसे, शिक्षा की स्थिति यह है कि मिडिल स्कूल रामगढ़ से बडौरा को जोड़ने वाली सड़क काफी जर्जर है और चलना मुश्किल है लेकिन दो साल पहले राज्य सरकार की पहल पर सड़क की आधुनिकीकरण हुई। बिजली बांस बल्ली के सहारे गांव की गलियां नर्क से भी बदतर है। ग्रामीणों ने बताया कि सांसद आदर्श ग्राम बडौरा के बदलाव में प्रयास शुरु ही नहीं किए गए लिहाजा ऐसा एक भी काम जमीन पर नहीं दिख रहा जिसे देख आदर्श माना जाए अभी तक सांसद निधि से 10-15 लाख रुपए खर्च किए गए हैं वह भी एक व्यामशाला बनाने के नाम पर। गांव में शौचालय नहीं है न ही निजी और ना ही सामुदायिक।
सांसद अश्वनी कुमार चौबे 3 साल 3 महीने के भीतर दो बार बडोरा गांव पहुंचे हैं एक वह मौका जब उनका अभिनंदन समारोह का आयोजन ग्रामीणों ने किया था और दूसरा सांसद आदर्श गांव चयन करने के बाद चौपाल लगाया था। वैसे अश्वनी कुमार चौबे के बारे में कहा जाता है कि वह आसमानी बाबा है जो जमीन पर नहीं आसमान से ही निगरानी करते हैं! बड़ौरा के ग्रामीण बताते हैं कि गांव की आधी जमीन जो नदी के उस पार है लिहाजा खेती करने के लिए 20-25 किलोमीटर दूरी तय कर के जाना होता है नदी पुल पर एक छोटा पुल बनाने की मांग की गई थी यह पुल आज तक आश्वासनों की ढेर तले दबा हुआ है! और तो और ग्रामीण इस बात से भी खासे नाराज हैं कि केंद्र में स्वास्थय राज्य मंत्री बनने के बाद पहला बयान भागलपुर में एम्स बनाने को लेकर दिया है जबकि सांसद आदर्श गांव मंत्री जी से अच्छे दिनों की उम्मीद कर रहा है।
सोशल मीडिया पर चलाया गया है गुमशुदगी का कैंपेन
विगत मार्च में ग्रामीणों ने एक कैपेन चलाया था जिसमें पूछा गया था कि यदि आपने हमारे सांसद को देखा है तो उन्हें आदर्श गांव लाने का कष्ट करें। फेसबुक पर उनके लापता होने की तस्वीर लगा दी गई है और सभी से अपील की गई है कि सांसद जिन्हें भी मिले वो उन्हें उनके संसदीय क्षेत्र बक्सर पहुंचाने की कृपा करें। स्थानीय लोगों का कहना है कि ‘सांसद आदर्श ग्राम योजना’ प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अति महत्वाकांक्षी योजना है।
इस योजना के तहत सभी सांसद को प्रत्येक वित्तीय वर्ष में अपने संसदीय क्षेत्र में एक गांव को गोद लेकर उसे आदर्श ग्राम के रूप में विकसित करना है ताकि गांव में सभी बुनियादी सुविधाएं उपलब्ध हों तथा वे सभी सुविधाएं ग्रामीणों को मिले। ग्रामीण बताते हैं कि बक्सर के सांसद महोदय ने भी पहले वित्तीय वर्ष में रामगढ़ विधानसभा के बड़ौरा गांव का चयन सांसद आदर्श ग्राम के लिए किया था, परन्तु आज चौबे जी के सांसद बने करीब तीन साल बीत गये हैं। लेकिन, विडंबना यह है कि अब तक न तो ‘बड़ौरा’ आदर्श ग्राम बना और न ही सांसद महोदय का ‘दर्शन’ ही क्षेत्रवासियों को मिल रहा है। लोगों ने शिकायत करते हुए कहा कि सांसद आदर्श ग्राम के नाम पर यहां एक भी ईंट तक नहीं लगी।
दुर्लभ हो गये सांसद के दर्शन
स्थानीय लोगों की मानें तो उनकी आंखें सांसद के इंतजार के लिए तरस रही हैं। लोगों का कहना है कि सांसद अश्विनी चौबे पिछले 1 अप्रैल 2015 से ही लापता हैं। बडौरा गांव को गोद लिये तीन साल हो गये, लेकिन इन तीन सालों में मात्र दो बार सांसद अश्विनी चौबे इस गांव में गये।

