सारण: जिले के दिघवारा प्रखण्ड मे विभिन्न बालू घाट पर सरकार ने तो परिवहन के चलान काटने पर रोक लगा दिया लेकिन बालू की ढुलाई जारी रहा जिसके चलते सरकार को लाखो के राजस्व की क्षति उठाना पर रहा है। बताते चले की बरसात के लगभग 4 महीने जैसे ही शुरू हो जाते है वैसे ही प्रखण्ड के पश्चमी छोर और गंगा नदी से जुड़े इलाको में सोन नदी में मिलने वाले लाल बालू लदी नावों का आना शुरू हो जाता है।
इसी के साथ शुरू हो जाता है बालू ढुलाई का कार्य।इस मौसमी व्यवसाय को देखते हुय विगत लगभग 8 वर्षो से सरकार ने बालू ढुलाई को लेकर टैक्स भी निर्धारित करके निजी कम्पनी को टेंडर दे राजस्व वसूली का काम सौप दिया। टेंडर मिलने के बाद से पिछले वर्ष दिसम्बर महीने तक कम्पनी ने प्रति फिट की दर से ढुलाई चलान वसूल किया। वही पिछले दिनों एन जी टी में दायर एक याचिका की सुनवाई के पश्चात बालू ढुलाई पर लगने वाले टैक्स वसूली पर सरकार ने रोक लगा दिया।
इस वर्ष जब गंगा में पानी आना शुरू हो गया और प्रखण्ड के झौआ, इसुपुर दिघवारा बालू घाट गोराइपूर, हराजि मोड़ घाट पर नावों का परिचालन पुनः शुरू हुआ और बालू ढुलाई पर लगे रोक की धज्जिया उर गयी ।इस ढुलाई पर लगी रोक का फायदा इलाके के सैकड़ो ट्रक मालिको ने उठाना शुरू कर दिया और वे लोग किसी तरह के टैक्स दिए बगैर बालू ढुलाई शुरू कर दिये।
7 घाट पर पहले होती थी टैक्स वसूली
दिघवारा प्रखण्ड के झौआ इसुपुर दरियापुर रहरिया घाट डोरीगंज महुआ घाट डोरीगंज और तिवारी घाट डोरीगंज एव डोरीगंज घाट पर
ही ठेकेकी कम्पनी ब्राडसन कमोडिटीज के प्रतिनिधि प्रत्येक बालू लदी गाड़ियो से लाखो रूपय की वसूली करते थे।लगभग 50 से 55 लाख रुपये प्रतिदिन के हिसाब से हो रहा राजस्व नुकसान स्थानीय प्रखण्ड एव डोरीगंज में जारी इस धनदे में एक और जहाँ हजारो फिट बालू अपने गन्तब्य पर भेज दिया जा रहा है मगर सरकार को टैक्स रूप में एक भी रुपया नही। इलाके 7 चेक प्वाइंट एव निजी राजस्व वसूली के केंद्र संचालको से मिले आकड़ो के अनुसार प्रत्येक केंद्र से लगभग 3 हजार फिट बालू की ढुलाई हो जाती है और अगर इस आकड़ो को जोर दिया जाय तो प्रतिदिन लगभग 30000 फिट बालू प्रति दिन बाहर भेजे जाते है।400 रुपये फिट के हिसाब से लगभग 1 करोड़ रुपये प्रतिदिन।
दिन के उजाले से लेकर रात तक सरक किनारे ही जारी है यह खेल।
दिघवारा प्रखण्ड के हराजि गांव से लेकर झौवा तक निर्मानाधिन फॉर लेन पर लगे ट्रक यह बखूबी दर्सा रहे है की शायद नाव और ट्रक मालिको के अंदर से ख़ौफ़ समाप्त हो गया है।और सरक पर सुबह से लेकर अहले सुबह 3 बजे तक लगातार बालू ढुलाई जारी है।
कुछ और इसारा करता है लाल बालू का काला कारोबार
खुलेआम इस तरह ट्रको की ढुलाई और परिवहन विभाग की सुस्ती साथ ही जिला पुलिस की कार्यशैली से प्रश्न चिन्ह उठने लगा है की आखिर क्या कारण है की खनन विभाग की रोक चलान काटने पर रोक बालू ढुलाई पर रोक के बावजूद कैसे यह धनदा जारी है ।
खनन विभाग द्वारा की गई करवाई है एक बड़ा साक्ष्य
स्थानीय घाट पर बालू ढुलाई की जाने की पुस्टि खुद खनन विभाग की करवाई से होता है।की अगर ढुलाई होता ही नही तो फिर किस तरीके से दो दिनों में लगभग 2 दर्जन वाहन पकरे गए।
सड़क किनारे ही खुलेआम खड़े रहते है सैकड़ो ट्रक
बालू के कारोबारियों के हिम्मत और सम्पर्क का सबसे बड़ा उदाहरण यह है की लगभग 12 किलोमीटर लम्बे इस गंगा तटीय इलाके के समीप बने एन एच 19 पर सैकड़ो ट्रक बालू ओभर लोड कर सड़क किनारे खड़े रहते है।




