ग्राम देवता के जागेंगे भाग्य, केवीके ने लिया पांच गांव गोद -समग्र ग्रामीण विकास पर जोर

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पंचायत खबर टोली

मऊ: केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री राधामोहन सिंह ने हाल ही घोषणा की ​थी कि कृषि वैज्ञानिक गांवो को गोद लेगें। कृषि विज्ञान केंद्र पिलखी ने ​इस दिशा में पहल शुरू कर दी है। केवीके के इस पहल से जिले के पांच गांवों की माटी के दिन बहुरने वाले हैं। कृषि विज्ञान केंद्र पिलखी ने पांच ब्लाकों में एक-एक गांव को गोद लेकर इसे माडल रूप में विकसित करने की योजना बनाई है। तकनीकी के प्रयोग से इन गांवों में उन्नत खेती के सभी आयामों को अपनाने के साथ पशुपालन, मत्स्य पालन का भी विकास किया जाएगा। इसके साथ ही मशरूम उत्पादन, मधुमख्खी पालन सहित छोटे-छोटे कार्यों से लोगों को रोजगार की दिशा में भी प्रेरित किया जाएगा। समग्र ग्रामीण विकास की अवधारणा के साथ इन गांवों को माडल रूप देने का प्रयास केंद्र करेगा।

kvkkkkkkkk3पिलखी कृषि विज्ञान केंद्र प्रभारी डॉ डीपी सिंह ने बताया कि जिले के खुखुंदवा, सरवां, सेमरी जमालपुर, रामपुर सोहड़ और परमानंद पट्टी गांव को आदर्श रूप में विकसित करने के लिए केंद्र द्वारा गोद लिया गया है। इस गांवों कृषि विज्ञान केंद्र द्वारा कृषक हित में सभी तरह की तकनीकों का प्रयोग करते हुए उनके समग्र विकास पर बल दिया जाएगा। गांव में खेती-किसानी के साथ पशुपालन और बागवानी और मत्स्य पालन पर भी विस्तार से कार्य किया जाएगा। केंद्र के वरिष्ठ वैज्ञानिक डॉ. एनके सिहं व डॉ. वीके सिंह ने बताया कि गोद लिए गांवों का बेसलाइन सर्वे कार्य कर गांव की स्थिति का आधारिय डाटा तैयार किया जाएगा। इसमें खेती के पारंपरिक स्वरूप की स्थित और सुधार की दशा के साथ मिट्टी की जांच भी किया जाएगा। डाटा में प्रत्येक परिवार की परिसंपत्तियों के साथ पशुधन, बाग-बगीचों और जलाशयों का भी विवरण लिया जाएगा। गांव के लोगों को रोजगार से जोड़ने के लिए पुरुष व महिलाओं के अलग-अलग समूह बनाकर उन्हें प्रशिक्षित किया जाएगा। समूह द्वारा स्थानीय स्तर के उत्पादन पर जोर दिया जाएगा। रोजगार से संबंधित विषयों पर उन्हें प्रशिक्षित कर स्वावलंबी बनाया जाएगा। इस कार्य में केंद्र से जुड़े सभी विषय विशेषज्ञों द्वारा विकास की रणनीति पर व्यापक कार्य किया जा रहा है। एक गांव को माडल बनाकर आसपास के गांवों को प्रेरित किया जाएगा।

kvkkk2s2जैविक खेती पर होगा जोर

कृषि विज्ञान केंद्र प्रभारी डॉ डीपी सिंह ने बताया कि गांव में तकनीकों के प्रयोग में जैविक खेती पर जोर दिया जाएगा। अंधाधुंध रसायनों के प्रयोग से मिट्टी में हो रहे बदलाव के साथ खाद्यान्न पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है। इससे स्वास्थ्य भी प्रभावित होता है। जैविक खेती को बढ़ावा देते हुए जैविक उर्वरक उत्पादन की इकाईयों का भी निर्माण किया जाएगा। परंपरागत खेती में जैविक उर्वरको के प्रयोग के साथ उन्नत कृषि उत्पादन पर जोर देकर आसपास के गांवों को इससे जोड़ा जाएगा।

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गौरतलब है कि हाल ही में केंद्रीय कृषि एवं किसान मंत्रालय ने केवीके की विभिन्न गतिविधियों की जानकारी प्रदान करने एवं उसकी उच्च स्तर पर निगरानी एवं प्रबंधन हेतु एक पोर्टल लांच किया है। इस पोर्टलhttp://kvk.icar.gov.in/ पर किसानों के लिए योजनाओं की जानकारी उपलब्ध है।

 

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