
जयपुर: आज के दौर में जलवायु परिवर्तन, खेती की लागत में बढ़ोतरी, और कीट-रोगों का बढ़ता खतरा किसानों के सामने बड़ी चुनौतियां है। इन समस्याओं के समाधान के लिए संरक्षित खेती का मॉडल तेजी से लोकप्रिय हो रहा है।
इसके अलावा यह खेती का एक आधुनिक और वैज्ञानिक तरीका है। जिसमें फसलों को पॉलीहाउस या ग्रीन हाउस जैसे संरक्षित वातावरण में उगाया जाता है। इन ढांचों में तापमान, नमी और अन्य पर्यावरणीय कारकों को नियंत्रित किया जाता है। जिससे फसलें प्रतिकूल मौसम और कीटों से सुरक्षित रहती है।
राजस्थान सरकार ने किसानों को संरक्षित खेती की ओर प्रोत्साहित करने के लिए ग्रीन हाउस पर सब्सिडी देने की योजना शुरू की है। इस योजना के तहत किसान अब मौसम की परवाह किए बिना सालभर फूलों, फलों और सब्जियों जैसी उच्च मूल्य वाली फसलों की खेती कर सकते है। ग्रीन हाउस संरचना न सिर्फ फसल की गुणवत्ता बढ़ाती है, बल्कि बाजार में ऊंचे दाम भी दिलवाने में मदद करती है। इसके अलावा, ग्रीन हाउस में कीट और रोगों का प्रभाव भी काफी हद तक कम हो जाता है। जिससे रासायनिक दवाओं पर खर्च भी घटता है। यह मॉडल छोटे और मझोले किसानों के लिए एक लाभकारी विकल्प साबित हो सकता है।
कितनी मिलेगी सब्सिडी
सामान्य श्रेणी से आने वाले किसानों को ग्रीन हाउस की कुल लागत पर 50 फीसदी की सब्सिडी मिलती है। इस दौरान छोटे, सीमांत, एससी और एसटी श्रेणी से आने वाले किसानों को 70 फीसदी सब्सिडी मिलती है। ग्रीन हाउस पर सब्सिडी का लाभ अधिकतम चार हजार वर्ग मीटर क्षेत्र तक ही लिया जा सकता है।
कौन है पात्र
1. किसान के पास एक सिंचाई का स्रोत होना चाहिए।
2. किसान खेती की जमीन का मालिक होना चाहिए, और आवश्यक कागजात
3. 6 महीने के अंदर की जमाबंदी नकल।
4. आधार कार्ड या जन आधार कार्ड।
5. खेत की मिट्टी और सिंचाई वाले पानी की जांच रिपोर्ट।
6. सब्सिडी के तहत अनुमोदित फर्मों से कोटेशन।
7. किसान की श्रेणी का प्रमाण पत्र।
ऐसे करें आवेदन
इस योजना के तहत पात्र किसान ई-मित्र केंद्र पर जाकर ऑनलाइन माध्यम से आवेदन कर सकते हैं। इस योजना के तहत आवेदन के साथ प्रशासनिक मंजूरी मिलने के बाद ग्रीन हाउस का निर्माण शुरू हो सकता है।
सब्सिडी का पैसा कब मिलेगा
ग्रीन हाउस का निर्माण होने पर एक समिति सत्यापन करेगी। अनुदान की राशि किसान के बैंक खाते में सीधे भेजी जाएगी, या फिर किसान की सहमति से यह राशि निर्माण करने वाली फर्म को भी दी जा सकती है।
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इन फसलों के लिए करें ग्रीन हाउस कि खेती
ग्रीन हाउस तकनीक में कृषि जलवायुवीय कारकों जैसे तापमान, आर्द्रता और सूर्य प्रकाश को नियंत्रित किया जाता है। इसमें टमाटर, शिमला मिर्च, खीरा, स्ट्रॉबेरी, गुलाब, जर्बेरा जैसी नकदी फसलें संरक्षित खेती में बहुत अच्छा परिणाम देती हैं। इसके अलावा औषधीय पौधों की खेती भी ग्रीन हाउस में की जा सकती है। इसके साथ ही किसान सब्जियों, फूलों और फलों जैसी उद्यानिकी फसलों की खेती सालभर कर सकते है। और मौसम के प्रभाव से बचते हुए बेहतर उत्पादन और मुनाफा कमा सकते है।



