
Grapes Cultivation: कहा जाता है कि अगर इरादे मजबूत हों, तो कोई भी मुश्किल रास्ता रोका नहीं जा सकता। कुछ ऐसी ही कहानी है नासिक की रहने वाली संगीता पिंगले की, जिन्होंने जीवन की सबसे कठिन परिस्थितियों में भी हार नहीं मानी और आज सफलता की मिसाल बन चुकी हैं। दरअसल संगीता पिंगले ने केमिस्ट्री में ग्रेजुएशन किया था, लेकिन जीवन ने अचानक ऐसी करवट ली कि उन्हें खेती की ओर रुख करना पड़ा। पति और बेटे की मृत्यु के बाद संगीता ने खेती को न केवल अपनाया, बल्कि उसे एक सफल व्यवसाय में भी तब्दील कर दिया। आज संगीता 13 एकड़ जमीन पर आधुनिक तरीकों से खेती कर रही हैं। और सालाना 20 से 25 लाख रुपए की कमाई कर रही हैं।
पढ़ाई में होशियार, किसान के घर शादी
संगीता पिंगले का जन्म नासिक के शिलापुर गांव में हुआ था। संगीता को बचपन से पढ़ाई का शौक था। फैमिली ने संगीता को पढ़ाई में साथ भी दिया। साल 2000 में संगीता ने केमिस्ट्री से ग्रेजुएशन किया। इसी साल उनकी शादी मातोरे गांव के अनिल पिंगले से हो गई। अनिल खेती-किसानी का काम करते थे। संगीता भी घर-परिवार संभालने में जुट गई। शादी के एक साल बाद साल 2001 में संगीता की एक बेटी हुई। बेटी होने की खुशी तो हुई। लेकिन इसी साल संगीत पर दुखों का पहाड़ टूटा। संगीता के पिता का निधन हो गया। यह उनके लिए बहुत बड़ा झटका था, इस झटके बाद संगीता से जैसे-तैसे खुद को संभाला।
बेटे और पति की मौत
साल 2004 में संगीता को एक बेटा हुआ। बेटा दिव्यांग था और छोटी उम्र में ही उसकी मौत हो गई। बेटे की मौत से संगीता टूट गई। लेकिन जिंदगी तो जीना ही पड़ता है। संगीता किसी तरह से जिंदगी काटने लगी। लेकिन अभी उनकी जिंदगी में इससे भी बड़ा तूफान आने वाला था। साल 2007 उनके लिए जिंदगी का सबसे बड़ा तूफान लेकर आया। एक सड़क हादसे में संगीता के पति अनिल की मौत हो गई। जब अनिल की मौत हुई। इस समय संगीता 9 महीने की गर्भवती थी। पति की मौत के 15 दिन बाद संगीता ने बेटे को जन्म दिया। अब संगीता के सामने बच्चों की परवरिश की चुनौती थी। संगीता ने बच्चों के लिए सारे दुख भुला दिए।
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संपत्ति का बंटवारा, फिर शुरू की खेती
संगीत पिंगले संयुक्त परिवार में बच्चों की परवरिश करने लगी। लेकिन साल 2016 में फैमिली में संपत्ति का बंटवारा हो गया। संगीता के हिस्से 13 एकड़ जमीन आई। संगीता के पास खेती का अनुभव नहीं था, लेकिन फैमिली पालने के लिए काम करना ही था। संगीता ने हिम्मत नहीं हारी और खेती पर फोकस करना शुरू किया। उन्होंने खेती के बारे में जानकारी हासिल की, बंटवारे के 3 महीने बाद ससुर की भी मौत हो गई।
अंगूर की खेती से 25 लाख की कमाई
ससुर की मौत के बाद संगीता ने खेती की सारी जिम्मेदारी खुद संभाल ली। उन्होंने अंगूर की खेती करने का फैसला किया। संगीता ने खूब मेहनत की, उनकी मेहनत रंग लाई। संगीता ने एक हजार टन अंगूर का उत्पादन किया। इससे सालाना 20-25 लाख रुपए की कमाई होने लगी। संगीता इलाके की महिलाओं के लिए प्रेरणास्रोत बन गई हैं।


