
नयी दिल्ली: वैसे तो मानसूनी फुहार बरस रही है। शहरी लोग उसका आनंद भी ले रहे हैं लेकिन गांव देहात के किसान इस बात परेशान है कि इस बार पिछली बार की तुलना में कम वर्षा हुई है। विशेष रूप से उत्तर पश्चिम भारत और उत्तर पूर्व भारत में पिछले साल अत्याधिक वर्षा हुई थी जिसे किसानों को प्रचुर लाभ हुआ लेकिन विगत वर्ष की तुलना में इस साल मानसूनी बारिश हो तो रही है लेकिन वो अभी सामान्य से कम है जिससे खेती-किसानी के कार्य प्रभावित हुए हैं।
आंकड़ों की माने तो पूर्व और उत्तर पूर्व भारत में 8 अगस्त तक 11 फीसदी कम बारिश हुई वहीं उत्तर पश्चिम भारत में मानसून के बादल 5 फीसदी कम बरसे हैं, जबकी मानसून सीजन अब लगभग खत्म होने पर ही है, लेकिन देश के कई हिस्सों में अभी भी कम बारिश हुई है जिससे सूखे जैसी हालात बनते जा रहे हैं और खेती पर प्रतिकूल असर पड़ा है।
इसका प्रभाव यह हुआ है कि कम बारिश के कारण खरीफ फसलों की बुवाई में देरी हुई और सिंचाई भी समय से नहीं हो पाई। उत्तर पश्चिम भारत और उत्तर पूर्व भारत के किसान कम बारिश होने से काफी ज्यादा परेशान हैं। देश में 1 जून से 8 अगस्त तक भले ही सामान्य से 7 फीसदी अधिक बारिश हो चुकी हो, लेकिन उत्तर और पूर्वोत्तर भारत में मानसूनी बारिश अभी भी सामान्य से कम है।
क्या कहते हैं आंकड़े
आईएमडी द्वारा उत्तर पश्चिम भारत की बात करें तो यहां पर भी मानसून सामान्य से कम ही थी जिसकी वजह से इस इलाके में भी बारिश कम ही हुई। अगर हम पंजाब-हरियाणा और हिमाचल को देखें तो यहां सबसे कम बारिश हुई है। मौसम विभाग के मुताबिक, पंजाब में 42, हरियाणा-चंडीगढ़,दिल्ली में 27, हिमाचल प्रदेश में 28 फीसदी, जम्मू-कश्मीर और लद्दाख में 33 फीसदी, पश्चिमी उत्तर प्रदेश में 4 फीसदी, पूर्वी उत्तर प्रदेश में 14 और उत्तराखंड में 1 फीसदी कम बारिश हुई है।
वहीं मध्य और दक्षिण भारत में इस वर्ष मानसून काफी अच्छा रहा है। मध्य भारत में 8 अगस्त तक सामान्य से 19 फीसदी और दक्षिण भारत में सामान्य से 25 फीसदी अधिक बारिश हो चुकी है।
वैसे तो सिंचाई के साधन काफी विकसित हुए हैं बावजूद इसके देश के कई क्षेत्रों में आज भी किसान खेती-बाड़ी के लिए बारिश के पानी पर ही निर्भर रहते हैं। इस बार बारिश कम होने से खेती किसानी प्रभावित हुई है। दरअसल देश में इस साल मानसून की शुरुआत अच्छी रही थी, खासकर मध्य और दक्षिण भारत में भारी बारिश हुई थी। लेकिन उत्तर और पूर्वोत्तर भारत पहुंचते—पहुंचते भारत में मानसून की गति धीमी पड़ गई, जिसका असर अब यह है की खेती—किसानी प्रभावित हो रही है
अगस्त-सितंबर में हो सकती है झमाझम बारिश
आईएमडी ने अगस्त और सितंबर के महीनों में सामान्य से अधिक बारिश का अनुमान जताया है। हालांकि, देश के दूसरे हिस्से में कुछ क्षेत्रों में सामान्य से कम बारिश की संभावना भी बनी हुई है,लेकिन अगस्त—सितंबर में अधिक बारिश होने की वजह से किसानों को राहत मिलेगी और जहां सूखे जैसे हालात बनते जा रहे हैं वहां बारिश होने से फिर से किसानों को लाभ होने का अनुमान है।
