गेहूं की जड़ में डाल दें ये चीज, होगी बंपर पैदावार, मिलेगा मुनाफा जोरदार

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पूजा

गेहूं की खेती में किसानों को फायदा नजर आता है। इसलिए गेहूं की खेती करने वाले किसानों का रकबा भी बढ़ रहा है। और सरकार भी गेहूं की खेती के लिए किसानों को प्रोत्साहित कर रही है। इस समय गेहूं के फसल की खेती की जा रही है। चाहे किसानों ने गेहूं के अगेती किस्म की खेती की हो या पछेती किस्म की फसल लगाई हो। दोनों ही फसल में दाने आने शुरू हो गए हैं। जिस वक्त गेहूं के फसल में दाने आने लगते है। अगर इसी दौरान किसान अपने खेतों में थोड़ा सा ध्यान दें। तो गेहूं की फसल की उपज को बढ़ा सकते हैं।

 

 

गेहूं की जड़ में सल्फर या पोटेशियम का घोल मिलकर उसका छिड़काव करते है। इससे गेहूं के दानों का वजन बढ़ेगा। इससे आपकी पैदावार अच्छी हो जाएगी। सल्फर प्रोटीन संश्लेषण, क्लोरोफिल निर्माण और एंजाइम सक्रियण के लिए आवश्यक है। यह गेहूं की गुणवत्ता और उपज को बेहतर बनाने में मदद करता है। इसके अलावा पोटेशियम पौधों में पानी के संतुलन को बनाए रखने और पोषक तत्वों के परिवहन में सहयोग करता है। साथ ही यह गेहूं के पौधों को रोगों और सूखे के प्रति अधिक रुकवट बनाने में मदद करता है। कृषि वैज्ञानिक डॉ. प्रमोद कुमार बताते हैं कि इस समय फसल की सही देखभाल और पोषक तत्वों की पूर्ति से दानों का वजन बढ़ाया जा सकता है। उन्होंने कहा कि इस समय सिंचाई, पोषक तत्वों का संतुलित प्रयोग और कीट-रोगों से बचाव पर विशेष ध्यान देना जरूरी है।

 

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गेहूं की फसल में करें इस चीज का छिड़काव
कृषि वैज्ञानिक डॉ प्रमोद कुमार ने बताया कि गेहूं की फसल में जब दाने बन रहे हों तो पहली सिंचाई बुवाई के 21 दिन बाद करें। और दूसरी सिंचाई दानों के भरने की अवस्था में करनी चाहिए। इसके साथ ही नाइट्रोजन, फास्फोरस और पोटेशियम की संतुलित मात्रा देना आवश्यक है। सल्फर और जिंक जैसे सूक्ष्म पोषक तत्व भी फसल के विकास में अहम भूमिका निभाते हैं। कृषि वैज्ञानिक ने कहा कि कुछ किसान इस समय स्प्रे के रूप में सल्फर या पोटेशियम का घोल बनाकर फसल पर छिड़काव करते हैं। जिससे दानों का आकार और वजन बढ़ता है।

 

 

फसल संरक्षण को लेकर करें यह उपाय
उन्होनें ने बताया कि इस दौरान गेहूं की फसल को किसी भी तरह के रोग और कीटों से बचाना बेहद जरूरी होता है। इस समय झुलसा रोग, करनाल बंट और माहू कीट का खतरा रहता है। अगर गेहूं की फसल में रोग दिखे तो तुरंत दवा का छिड़काव करना चाहिए। जैविक खेती अपनाने वाले किसान नीम का तेल या ट्राइकोडर्मा का उपयोग कर सकते हैं। सही समय पर उचित देखभाल करने से गेहूं की फसल के दाने बड़े और भारी बनते हैं। जिससे किसानों को अधिक उपज और बेहतर मुनाफा मिल सकता है। तो आप भी अपने खेतों की सही देखभाल कर अपने फसल की उपज को बढ़ा सकते हैं।

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