कृषि उत्पादन और उत्पादकता बढ़ाने के लिए कृषि क्षेत्र को देंगे रियायतें:अरूण जेटली

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यह भी सुझाव दिया गया कि फ्लोराइड प्रभावित क्षेत्रों के लिए विशेष पैकेज और मनरेगा को ज्यादा प्रभावी बनाने के लिए उसके स्वरूप को बदला जाए। मनरेगा में श्रम अनुपात में बदलाव का भी सुझाव दिया गया, जिससे यह ज्यादा प्रभावी और रोजगार देने के साथ ही बुनियादी ढांचे के निर्माण में भी इस्तेमाल किया जा सकता है। कुछ सदस्यों ने कहा कि ग्रामीण क्षेत्रों में ज्यादा रोजगार की संभावनाएं पैदा करने, कृषि उत्पादकता बढ़ाने और सस्ती दरों पर कृषि उधारी बढ़ाने; शिक्षा, कौशल विकास और मछुआरे समुदाय के आवासों के लिए ज्यादा आवंटन का भी सुझाव दिया। यह भी सुझाव दिया गया कि आगामी बजट गरीब और आम आदमी पर केंद्रित होना चाहिए

केंद्र सरकार इस वर्ष बजट में कृषि और ग्रामीण विकास को खास तरजीह दे सकती है। कुछ इसी तरह के सुझाव वित्त मंत्री अरूण जेटली को बजट पूर्व परामर्श के लिए बुलाई बैठक में दी गयी है। वित्त मंत्री आज यहां संसद के इंटर-सेशन के दौरान वित्त मंत्रालय से संबद्ध परामर्श समिति की पहली बैठक में उद्घाटन भाषण देते हुए कृषि क्षेत्र को आगे बढ़ाने की बात कही। बैठक का विषय ‘बजट के लिए सुझाव’ थे। अरुण जेटली ने कहा कि बीते दो साल से मुख्य रूप से अपर्याप्त मानसून के चलते कृषि की वृद्धि दर प्रभावित हुई है। मौजूदा वित्त वर्ष 2015-16 के दौरान सूखा राहत के लिए राज्यों को सबसे ज्यादा धनराशि दी गई है और कृषि उत्पादन व उत्पादकता बढ़ाने के लिए कृषि क्षेत्र को ज्यादा रियायतें दी जाएंगी।

Picture courtsey: Babulal ji_n

अरुण जेटली ने कहा कि बैठक में भाग लेने वाले परामर्श समिति के सदस्यों ने कई सुझाव दिए। कुछ बड़े सुझावों में कृषि क्षेत्र के लिए ज्यादा आवंटन, आईसीएआर और आईसीएमआर की तर्ज पर दुग्ध उत्पादन बढ़ाने आदि के उद्देश्य से इंडियन काउंसिल फॉर वेटिनरी रिसर्च (आईसीवीआर) की स्थापना आदि शामिल है। उन्होंने केंद्र सरकार की नई फसल बीमा योजना की सराहना की, लेकिन योजना में ज्यादा स्पष्टता, योजना के प्रति जागरूकता बढ़ाने की जरूरत और इसे ज्यादा व्यापक बनाने का प्रस्ताव किया, जिससे इस तक ज्यादा से ज्यादा लोगों की पहुंच हो सके। एक अन्य सुझाव यह दिया कि आगामी बजट में पर्यावरण को स्वच्छ रखने के क्रम में सीवेज और एफ्लुएंट शोधन संयंत्र की स्थापना पर उद्योगों को राहत दी जा सकती है। अन्य सुझावों में जल संरक्षण के लिए ड्रिप इरीगेशन सिस्टम और उत्पादकता बढ़ाने के वास्ते फसल के लिए बीजों की उन्नत प्रजातियों के इस्तेमाल को बढ़ावा देना शामिल है। एक अन्य सुझाव यह भी दिया गया कि चूंकी भारतीय अर्थव्यवस्था कृषि आधारित अर्थ व्यवस्था है, इसलिए इस साल कृषि पर केंद्रित बजट पेश किया जाए। विभिन्न राज्यों में कृषि से संबंधित सिंचाई परियोजनाओं में सुधार के लिए ज्यादा आवंटन किया जाना चाहिए, जो खराब स्थिति में हैं। यह सुझाव दिया गया कि कौशल विकास कार्यक्रमों को जमीनी स्तर पर प्रभावी बनाने के लिए ब्लॉक स्तर पर लागू किया जाए और स्टार्ट-अप इंडिया व मेक इन इंडिया को वास्तव में सफल बनाया जा सके। यह भी सुझाव दिया गया कि फ्लोराइड प्रभावित क्षेत्रों के लिए विशेष पैकेज और मनरेगा को ज्यादा प्रभावी बनाने के लिए उसके स्वरूप को बदला जाए। मनरेगा में श्रम अनुपात में बदलाव का भी सुझाव दिया गया, जिससे यह ज्यादा प्रभावी और रोजगार देने के साथ ही बुनियादी ढांचे के निर्माण में भी इस्तेमाल किया जा सकता है। कुछ सदस्यों ने कहा कि ग्रामीण क्षेत्रों में ज्यादा रोजगार की संभावनाएं पैदा करने, कृषि उत्पादकता बढ़ाने और सस्ती दरों पर कृषि उधारी बढ़ाने; शिक्षा, कौशल विकास और मछुआरे समुदायर के आवासों के लिए ज्यादा आवंटन का भी सुझाव दिया। यह भी सुझाव दिया गया कि आगामी बजट गरीब और आम आदमी पर केंद्रित होना चाहिए, साथ ही बाल कुपोषण को खत्म करने के लिए ज्यादा आवंटन का सुझाव दिया जाना चाहिए। बैठक में केंद्रीय वित्त मंत्री अरुण जेटली, वित्त राज्य मंत्री जयंत सिन्हा सहित परामर्श समिति के सदस्यों ने हिस्सा लिया।

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