गर्भवती माताओं की सुरक्षा को बनाये सामाजिक अभियान: जे पी नड्डा

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संतोष कुमार सिंह
नयी दिल्ली: देश के प्रधानमंत्री के रूप में नरेंद्र मोदी अक्सर ‘मन की बात’ करते हैं। करना भी चाहिए। लेकिन सिर्फ मन की बात करें और उस पर अम्ल न हो तो फिर अविश्वास पैदा होता है। मन की बात करने के लिए मन की बात सुनना भी होता है। प्रधानमंत्री ने अपने एक मन की बात की एपीसोड में दुख जताया था कि सुरक्षित मातृत्व की दिशा में हम पीछे रह गये हैं। प्रसव के दौरान माताओं की मृत्यू चिंताजनक है। जब देश का प्रधानमंत्री माताओं को लेकर चिंतित हो तो स्वाभाविक तौर पर प्रशासनिक अम्ले में इसका असर होता है। उनके इसी सोच को आगे बढ़ाने के लिए केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय ने शुक्रवार को प्रधानमंत्री सुरक्षित मातृत्‍व अभियान (पीएमएसएमए) की शुरूआत की है। कार्यक्रम का उद्घाटन करते हुए केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री जेपी नड्डा ने विस्तार से कार्यक्रम की रूप रेखा प्रस्तुत किया। उन्होंने कहा कि अब समय आ गया है कि ‘हेल्थ फॉर आॅल’ की चर्चा से आगे बढ़ते हुए ‘हेल्थ बाई आॅल’ को अभियान के रूप में जमीन पर उतारा जाए।

The Union Minister for Health & Family Welfare, Shri J.P. Nadda addressing at the launch of the Pradhan Mantri Surakshit Matritva Abhiyaan (PMSMA), in New Delhi on November 04, 2016.
केंद्रीय परिवार एवं स्वास्थ्य कल्याण मंत्री जेपी नड्डा

क्या है उद्देश्य
नड्डा ने कहा कि प्रधानमंत्री सुरक्षित मातृत्‍व अभियान (पीएमएसएमए) का उद्देश्‍य सुरक्षित गर्भावस्था और सुरक्षित प्रसव के जरिए मातृ एवं नवजात शिशु मृत्यु दरों को कम करना है। इस राष्‍ट्रीय कार्यक्रम के जरिए देश भर में लगभग 3 करोड़ गर्भवती महिलाओं को विशेष मुफ्त प्रसव पूर्व देखभाल मुहैया कराई जाएगी, ताकि उच्‍च जोखिम वाले गर्भधारण का पता लगाने के साथ-साथ इसकी रोकथाम की जा सके।’

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माह की 9 तारीख गर्भवती महिलाओं के नाम

जेपी नड्डा ने याद दिलाया कि प्रधानमंत्री ने अपने ‘मन की बात’ में सभी स्त्री रोग विशेषज्ञों से कहा था कि वे माह में एक दिन गर्भवती महिलाओं के नाम कर दें। उनके इसी सोच को आगे बढ़ाते हुए राष्‍ट्रव्‍यापी कार्यक्रम के तहत हर महीने 9 तारीख को गर्भवती महिलाओं को सुनिश्‍चित, व्‍यापक एवं उच्‍च गुणवत्‍तापूर्ण प्रसव पूर्व देखभाल मुहैया कराई जाएगी। उन्होंने कहा कि गर्भवती महिलाएं अब सरकारी स्वास्थ्य केंद्रों पर अपनी दूसरी या तीसरी तिमाही में स्त्री रोग विशेषज्ञों/चिकित्सकों द्वारा मुहैया कराए जाने वाले विशेष प्रसव पूर्व चेक-अप का लाभ उठा सकती हैं। यह सुविधा निजी क्षेत्र के डॉक्‍टरों के सहयोग से मुहैया कराई जाएगी, जो सरकारी क्षेत्र के प्रयासों के पूरक के तौर पर उपलब्‍ध होगा।
गांव में भी उपलब्ध होंगे डॉक्टर
डॉ नड्डा ने कहा कि ग्रामीण एवं शहरी दोनों ही क्षेत्रों में चिन्‍हित स्‍वास्‍थ्‍य सेवा केंद्रों पर सामान्‍य प्रसव पूर्व चेक-अप के अलावा अल्ट्रासाउंड, रक्त और मूत्र परीक्षण सहित इन सेवाओं को उपलब्‍ध कराया जाएगा। उन्‍होंने कहा कि इसका एक उद्देश्‍य उच्‍च जोखिम वाले गर्भधारण का पता लगाना और इस दिशा में समुचित कदम उठाना है, ताकि एमएमआर और आईएमआर में कमी संभव हो सके।
निजी चिकित्सकों की अहम भूमिका
निजी चिकित्सक इस कार्यक्रम की सफलता में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे। उन्‍होंने कहा कि इसे राष्‍ट्रीय स्‍तर पर एक सामाजिक आंदोलन का स्‍वरूप प्रदान करने की जरूरत है, जिसमें निजी क्षेत्र के डॉक्‍टरों एवं अन्‍य हितधारकों की सेवाएं ली जाएंगी।
सबको दिलाई शपथ
नड्डा ने इस कार्यक्रम को अपना समर्थन प्रदान करने के लिए सभी से आग्रह करने हेतु यह शपथ दिलाई कि ‘मैं हर 9 तारीख को सेवा प्रदान करने की शपथ लेता हूं’। स्‍वास्‍थ्‍य मंत्री ने निजी क्षेत्र के डॉक्‍टरों से सरकारी प्रयासों के पूरक के तौर पर स्‍वैच्‍छिक सेवाएं मुहैया कराने की अपील की। उन्‍होंने कहा, ‘मैं सभी हितधारकों का इस राष्‍ट्रीय आंदोलन का एक हिस्‍सा बनने और मातृ एवं नवजात शिशु मृत्यु दरों में कमी करने की दिशा में समुचित योगदान देने का आह्वान करता हूं।’

पूरा करेंगे सतत विकास लक्ष्य

स्वास्थ्य मंत्री ने कहा कि भारत मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य सेवा में सतत विकास लक्ष्यों (एसडीजी) को प्राप्त करने की दिशा में काम करने के लिए तैयार है। उन्होंने कहा कि भारत ने हाल के वर्षों में अनेक सूचकांकों के बारे में महत्वपूर्ण प्रगति की है और देश में नवजात शिशु मृत्यु दर (आईएमआर), मातृ मृत्यु दर (एमएमआर), कुल प्रजनन दर (टीएफआर) जैसे राष्ट्रीय स्वास्थ्य संकेतकों में पर्याप्त प्रगति की है और देश में पांच मृत्यु दरों के अधीन विश्व की तुलना में तेजी से गिरावट आई है। प्रधानमंत्री सुरक्षित मातृत्व अभियान (पीएमएसएमए) के तहत मंत्रालय का उद्देश्य इसे आगे बढ़ाना और स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता और कवरेज में सुधार लाना है।

The Minister of State for Health & Family Welfare, Shri Faggan Singh Kulaste addressing at the launch of the Pradhan Mantri Surakshit Matritva Abhiyaan (PMSMA), in New Delhi on November 04, 2016.
स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण राज्य मंत्री फग्गन सिंह कुलस्ते

इस अवसर पर स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण राज्य मंत्री फग्गन सिंह कुलस्ते ने ग्रामीण भारत की समस्याओं की चर्चा की और कहा कि जब हम ग्रामीण क्षेत्रों को देखते हैं, तो वहां बहुत कठिनाई है। स्वास्थ्य की पर्याप्त सुविधा उपलब्ध नहीं है। वहां पर्याप्त संसाधन नहीं पहुंचता है। इस कार्यक्रम के जरिए ग्रामीण क्षेत्र और दूर दराज के ईलाकों में गर्भवती महिलाओं को स्वास्थ्य लाभ मिले और देश में मातृ मृत्यु दर कम करने की दिशा में प्रयास हो इस लिहाज यह एक महत्वपूर्ण कदम है। हमारा लक्ष्य उन महिलाओं पर केंद्रित है जिनकी एएनसी जांच नहीं हुई है या बीच में छूट गई है इसलिए पीएमएसएमए क्लीनिक में जाने वाली सभी गर्भवती महिलाओं को आईएफए और कैल्शियम सप्लीमेंट जैसी जांच और दवाइयों का न्यूनतम पैकेज उपलब्ध कराया जाएगा। निदान और उपचार सेवाओं के अलावा विशेष रूप से उच्च जोखिम वाले गर्भधारण के मामलों में गर्भवती महिलाओं को परामर्श देना बहुत महत्वपूर्ण है। कुलस्ते ने कहा कि राज्य सरकारों और आईएमए, एफओजीएसआई, लॉयन्स एवं रोटरी क्लब जैसी शीर्ष संकायों के साथ-साथ विकास भागीदारों की मदद इस अभियान को आगे बढ़ाने में बहुत महत्वपूर्ण है।

स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण सचिव सी.के. मिश्रा ने कहा कि देश में मातृ एवं नवजात मृत्यु दर को कम करने में बहुत प्रगति हुई है। पीएमएसएमए कार्यक्रम इस वादे पर आधारित है कि देश की हर गर्भवती महिला की चिकित्सक द्वारा जांच की जाए और गर्भावस्था के दौरान कम से कम एक बार उचित जांच की जाए और उसके बाद उचित कार्रवाई करके इस अभियान के द्वारा रोकी जा सकने वाली अनेक मौतों से बचा जा सकता है।
लांच किया गया वेब पोर्टल
मीडिया माध्यमों के जरिए आम जन तक इस कार्यक्रम को पहुंचाने का लक्ष्य रखते हुए जे. पी. नड्डा ने अभियान के बारे में जागरूकता बढ़ाने के लिए समस्त संचार पैकेज के साथ पीएसएमए वेब पोर्टल और मोबाइल एप लांच किया।

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यूनिसेफ के प्रतिनिधि लुइस जॉर्ज आर्सेनॉल्‍ट
यूनिसेफ का पूरा सहयोग
भारत में यूनिसेफ के प्रतिनिधि लुइस जॉर्ज आर्सेनॉल्‍ट ने कहा कि भारत सरकार द्वारा चलाये जा रहे सभी कार्यक्रमों में यूनिसेफ हर स्तर पर भागीदारी करता है। हमारी कोशिश होगी कि प्रधानमंत्री सुरक्षित मातृत्‍व अभियान (पीएमएसएमए) दूर दराज के ईलाकों तक भी पहुंचे जहां के लोग योजनाओं के कार्यान्यवयन में पीछे छूट जाते हैं। इस दिशा में यूनिसेफ सरकार को सहयोग देगा।
आईएमए के राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ. एस. एस. अग्रवाल; एफओजीएसआई की अध्यक्ष डॉ. अलका कृपलानी और एफओजीएसआई, आईएमए और रोटरी इंटरनेशनल के अनेक डॉक्टर भी इस समारोह में उपस्थित थे। इन सभी संगठनों ने इस कार्यक्रम में मदद करने के लिए अपनी प्रतिबद्धता को दोहराया।

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