- महराजगंज के 210 किसानों ने शुरू की शकरकंद की खेती, शुरुआती दौर में 40 एकड़ में खेती की तैयारी
विश्वदीपक त्रिपाठी
महराजगंज:कुपोषण से जूझते बचपन के लिए अच्छी खबर है। महराजगंज में कुपोषित 19109 बच्चों की मुस्कान लौटाने के लिए यहां के भूमि पुत्रों ने पहल की है। अफ्रीकी देश केन्या की सुनहरी शकरकंद के सहारे अब तराई के इस जिले में कुपोषण से जंग लड़ी जाएगी। सुनहरी शकरकंद बच्चों को सेहतमंद और किसानों को दौलतमंद बनाएगी।
पिछले वर्ष प्रयोग के तौर पर महराजगंज जिले के 210 किसानों ने किचेन गार्डेन में सुनहरी शकरकंद की खेती की थी। पौष्टिकता व आर्थिक रूप से लाभप्रद साबित होने के बाद अब जिले में 40 एकड़ में खेती की तैयारी शुरू हो गई है।
गन्ने का विकल्प बना शकरकंद
महराजगंज जिले के फरेंदा व बृजमनगंज क्षेत्र के किसान इस अभिनव प्रयोग के साक्षी बने हैं। नकदी फसल गन्ने के विकल्प के रूप में आरंभ हुई यह खेती किसानों की उन्नति का द्वार खोलने को तैयार है।
कम लागत अधिक मुनाफा
कृषि विशेषज्ञ डॉ रामचेत चौधरी ने कहा कि देश में अब तक उत्पादित लाल व सफेद शकरकंद के मुकाबले सुनहरी शकरकंद में विटामिन ए की मात्र अधिक होती है। शकरकंद को स्वीट पोटैटो के नाम से भी जाना जाता है। इसमें ऊर्जा का खजाना होता है। पोषक तत्वों के चलते स्वास्थ्य के लिहाज से इसके कई फायदे हैं। डायरिया पीड़ित बच्चों के लिए भी फायदेमंद है। अच्छी बात यह है कि किसान कम लागत में अधिक मुनाफा पा सकते हैं।
क्या कहते हैं विशेषज्ञ
पोषण पुनर्वास केंद्र, महराजगंज के चिकित्सक डॉ वीके दूबे कहते हैं कि सामान्य तौर पर सुनहरी शकरकंद कुपोषण से जूझ रहे बच्चों के लिए लाभकारी है। विटामिन ए की मात्र अधिक होने के कारण लाल व सफेद शकरकंद के मुकाबले यह अधिक फायदेमंद है। भोजन में पोषक तत्वों की कमी से ही बच्चे कुपोषण के शिकार होते हैं। सुनहरी शकरकंद कुपोषण के खिलाफ जंग में कारगर सिद्ध होगी।
(दैनिक जागरण से साभार)

