- इलाहाबाद के चाका विकासखंड में जिम्मेदारों के दावों की कलई खोल रहे हैं ये अधूरे शौचालय।
- उत्तर प्रदेश के पहले ओडीएफ का तमगा मिलने के बाद भी जमीनी हकीकत से दूर है इलाहाबाद की दांदूपुर ग्रामसभा। कई घरों में शौचालय नहीं बने हैं और जिनके बन गए हैं वे अभियान को झूठला रहे हैं।
विमल पांडेय
इलाहाबाद: ‘यह गांव अपनी तरक्की की कहानी खुद कह रहा है। गांव के लोगों में तरक्की की भूख बहुत होती है। उन्हें रिश्ता निभाना भी आता है’। 23 अप्रैल 2016 को इलाहाबाद स्थित दांदूपुर ग्राम सभा में आयोजित एक कार्यक्रम में ये शब्द तत्कालीन मुख्यमंत्री अखिलेश यादव के थे। उन्होंने उक्त गांव को प्रदेश का पहला ओडीएफ (खुले में शौचमुक्त) ग्राम सभा घोषित करते हुए कई योजनाओं का तोहफा दिया था। समय बीता, सियासत बदली, लेकिन जिस ग्राम सभा को ओडीएफ का तमगा मिला, वह अभी इसकी जमीनी हकीकत से कोसों दूर है। पड़ताल करने पर पता चला कि जिनके पास शौचालय नहीं है वे मजबूरी में बाहर जाते हैं। लेकिन जिनके यहां शौचालय बन चुके हैं, वे भी इस अभियान को झुठला रहे हैं। ग्राम दांदूपुर में शौचालय निर्माण के नाम पर सिर्फ खानापूर्ति की गई।
सपा सरकार ने दिए थे दो सौ शौचालय
अखिलेश सरकार के कार्यकाल में इस ग्राम सभा को दो सौ शौचालय दिए गए। सरकार बदलने के बाद सौ शौचालय और दिए गए। बावजूद इसके हरिजन बस्ती की बदहाली देखने लायक है। यहां दर्जनों शौचालय अभी भी अपूर्ण हैं। यहां के लोग हर रोज लोटा लेकर खेत में जाते दिख जाते हैं। पूछे जाने पर वह कहते हैं कि क्या करें शौचालय नहीं है तो बाहर जाना मजबूरी है। गांव की कुछ बहू-बेटियां भी शौचालय न होने की मजबूरी बयां करती हैं।
दावे से अलग है सच्चाई
दांदूपुर ग्राम सभा में तीन सौ शौचालय देने के बाद अफसरों का यह मानना है कि पूरा गांव ओडीएफ हो चुका है। ग्राम विकास अधिकारी जितेंद्र कुमार सिंह इस पर जोर देते हैं कि गांव में गठित निगरानी समिति लोगों को शौच के लिए बाहर जाने से रोकती है। उनकी बात में कितनी सच्चाई है यह गांव के बाहर फैली गंदगी को देखकर समझा जा सकता है।
सच्चाई इनकी जुबानी
गांव की महिला सीमा बानो पत्नी जाकिर हुसैन के दरवाजे पर देखा गया कि शौचालय की ईंट पड़ी है लेकिन शौचालय नहीं बना है। सीमा का कहना था कि शौचालय निर्माण के लिए कई बार मांग की गई है। मजदूरी करने वाले गरीब सुभाष की कहानी भी यही है। उनकी पत्नी उर्मिला बोलीं, बीपीएल सूची में नाम न होने के कारण शौचालय नहीं दिया गया। उन्हें आज भी बाहर जाना पड़ता है। इसी तरह अन्य लोगों ने भी अपनी मजबूरी बयां की।
क्या कहते हैं अधिकारी
मुख्य विकास अधिकारी सैमुअल पाल एन के मुताबिक, बीपीएल सूची में चयनित लोगों को ही शौचालय दिया गया है। सभी लोगों को शौचालय नहीं दिए गए हैं। लोगों को स्वत: जागरूक होना चाहिए। (दैनिक जागरण से साभार)
