हर माता की यही पुकार..सुरक्षित मातृत्व हमारा अधिकार

0
722

संतोष कुमार सिंह
करनाल: बात निकलेगी तो दूर तलक जाएगी। खासकर वो बात जो माताओं की सुरक्षा से जुड़ा हो। गर्भ में पल रहे बच्चों के जीवन से जुड़ा हो। नवजातों के बेहतर लालन पालन से जुड़ा हो, उस बात को तो दूर तलक अर्थात दूर दराज के गांवो तक पहुंचना ही चाहिए। जी हां, बात हो रही है प्रधानमंत्री सुरक्षित मातृत्‍व अभियान (पीएमएसएमए) अभियान की जिसका उद्देश्‍य सुरक्षित गर्भावस्था और सुरक्षित प्रसव के जरिए मातृ एवं नवजात शिशु मृत्यु दरों को कम करना है।

imageeeee_nकेंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री जेपी नड्डा ने 4 नवंबर को देशव्यापी अभियान की शुरूआत की जिसके तहत प्रत्येक माह के नौ तारीख गर्भवती महिलाओं को सुनिश्‍चित, व्‍यापक एवं उच्‍च गुणवत्‍तापूर्ण प्रसव पूर्व देखभाल मुहैया कराने के लिए सरकारी स्वास्थ्य केंद्रों पर अपनी दूसरी या तीसरी तिमाही में स्त्री रोग विशेषज्ञों/चिकित्सकों द्वारा मुहैया कराए जाने वाले विशेष प्रसव पूर्व चेक-अप का लक्ष्य रखा गया। सरकार ने इसे अभियान का नाम दिया प्रधानमंत्री सुरक्षित मातृत्‍व अभियान (पीएमएसएमए)।

image-3_n

इसी अभियान को जमीन पर उतारने के लिए निशिंग ब्लॉक स्थित स्वास्थ्य केंद्र पर काफी संख्या में गर्भवती महिलायें एकत्रित हुई हैं। बड़ी बात यह है कि पिछले पंचायत चुनाव में मात्र 24 वर्ष की उम्र में नगर निगम चुनाव में निर्वाचित कोमल मुंजाल ने फीता काटकर इस कार्यक्रम का शुभारंभ किया। कोमल कहती हैं, प्रधानमंत्री ने जो ये मातृत्व सुरक्षा योजना चलाई है, यह काफी अच्छा है। मैं पिछले कई दिनों से अपने ईलाके में आंगणवाड़ी कार्यकर्ता और एनएनएम के साथ प्रसूति महिलाओं को आज के दिन स्वास्थ्य केंद्र पहुंचकर अपना स्वास्थ्य जांच कराने के विषय में सूचना दे रही थी। सैकडों की संख्या में जिस तरह से गर्भवती महिलाएं यहां आई हैं उसे देखकर लगता है कि हम प्रधानमंत्री के संदेश को लोगों तक पहुंचा पाए। उन्होंने कहा कि जच्चा—बच्चा सुरक्षित रहेगा तो पूरा परिवार सुरक्षित हो सकता है। कोमल उस दौर में चुनी गयी हैं जब हरियाणा में पंचायत प्रतिनिधियों के लिए पढ़ाई लिखाई अनिवार्य कर दिया गया था। जी हां, वो 12 पास हैं। अपनी जवाबदेही को समझती हैं। इस कार्यक्रम के महत्व को बखूबी समझती हैं। वे कहती हैं ये बदलाव का दौर है, और यह अभियान उसी बदलाव को आगे बढ़ायेगा।

image-4_nयहीं हमारी मुलाकात लाईन में लगी घुमंतू समाज की कुछ महिलाओं से होती है। पूछने पर पता चला कि वे राजस्थान के चुूरू जिले की हैं। यह घुमंतू महिला जिसका 9 वां महिना चल रहा है, अपने सास सुमन के साथ आयी है। सुमन बताती हैं कि पहला बच्चा तो घर में हुआ। यह दूसरी बार गर्भवती है। रोज की भांति आज सुबह हम अपने समाज के कुछ महिलाओं के साथ इधर से गुजर रहे थे तो वार्ड कमिश्नर हमारे गर्भवती बहू को देखकर हमें यहां ले आईं,ताकि डॉक्टर से जांच कराया जा सके। वे हाथ आगे बढ़ाते हुए अपना प्रसूति कार्ड दिखाती हैं और संतोष के साथ कहती हैं, डॉक्टरनी ने बढ़िया से हर तरह की जांच कर दी है। इसका वजन भी कराया गया है। ब्लड प्रेशर जांच कराया गया है।ग्लूकोज भी पिलाया गया। अब तो हमारा दूसरा लल्ला हो लल्ली अस्पताल में ही होगी।
हर एक गतिविधि को पूरी तन्मयता के साथ निरिक्षण करते करनाल के डिप्टी सीएमओ डॉ सतबीर सिंह कहते हैं कि जुलाई के माह से ही हम यह कार्यक्रम चला रहे हैं। हमारी कोशिश होती है कि कोई गर्भवती महिला छूट न जाये। पहले तिमाही के बाद हरेक गर्भवती महिला का प्रसूति रोग विशेषज्ञ से जांच हो। यदि किसी भी तरह का जोखिम किसी भी महिला में दिखाई देता है तो हम उसकी विशेष रूप से मोनिटरिंग करते हैं। बड़े अस्पताल को रेफर करते हैं। उन्हें निशुल्क एबुंलेस मुहैया कराया जाता है। आंगनवाड़ी कार्यकर्ता और एनएनएम को विशेष रूप से इन महिलाओं का नियमित स्वास्थ्य जांच करवाने की हिदायत है। जरूरत पड़ने पर उन्हें रेफरल अस्पताल भेजा जाता है। हमारी कोशिश है कि यह योजना पूरी तरह से सफल हो, और मातृ शिशू मृत्यू दर के आंकड़ों को दुरूस्त किया जा सके। जुलाई से शुरू हुए इस कार्यक्रम का परिणाम इस माह से आना शुरू हो जाएगा। हमने पाया है कि प्रत्येक माह कम से कम 1500 नये मरीज का पंजियन हो रहा है। करनाल में 97 फीसदी संस्थागत प्रसव हो रहा है। इस अभियान से इसमें और तेजी आयी है।

nadddddddddddddddddddddda
जी हां, ऐसा लगता है कि दिल्ली में कार्यक्रम लांच करते हुए केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री जेपी नड्डा ने दिलाई थी कि ‘मैं हर 9 तारीख को सेवा प्रदान करने की शपथ लेता हूं’। स्‍वास्‍थ्‍य मंत्री ने निजी क्षेत्र के डॉक्‍टरों से सरकारी प्रयासों के पूरक के तौर पर स्‍वैच्‍छिक सेवाएं मुहैया कराने की अपील की। उन्‍होंने कहा, ‘मैं सभी हितधारकों का इस राष्‍ट्रीय आंदोलन का एक हिस्‍सा बनने और मातृ एवं नवजात शिशु मृत्यु दरों में कमी करने की दिशा में समुचित योगदान देने का आह्वान करता हूं।’ निशिंग के स्वास्थ्य केंद्र में जिस तरह का उत्साह देखने को मिला उससे कहा जा सकता है कि शपथ अब जमीन तक पहुंचने लगा है। और निश्चित रूप से सरकार सतत विकास के लक्ष्य को पूरा करने की दिशा में कदम दर कदम आगे बढ़ रही है।

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here