जितेन्द्र चतुर्वेदी
गोवंश के संरक्षण और विकास के लिए एक अलग मंत्रालय का गठन किया जाना चाहिए। राष्ट्रीय गोवंश आयोग की कई सिफारिशों में एक यह भी है। इसका गठन अटल बिहारी वाजपेयी सरकार ने किया था। आयोग के अध्यक्ष इतिहासकार धर्मपाल थे। यह रिपोर्ट 2002 में सरकार को सौंपी गई थी। हालांकि सरकार ने उसे सार्वजनिक नहीं किया। रिपोर्ट में जो लिखा है अगर सरकार उसे मान ले तो गोवंश की हत्या पूरी तरह से रोकी जा सकती है। लेकिन उस पर न तो तत्कालीन वाजपेयी सरकार ने कुछ किया और न ही उसके बाद आने वाली सरकारों ने कोई सुध ली। वे क्यों बचती रही? इसका जवाब तो सरकार के पास होगा। हालांकि रिपोर्ट में सीधे कहा गया है कि राजनीतिक इच्छा शक्ति कमी है। यही वजह है कि कतलखानों को आर्थिक सहायता जारी है।
रिपोर्ट में कहा गया है कि गोवंश को पशुपालन विभाग से अलग रखना होगा। वजह, विभाग का काम संरक्षण है ही नहीं। वह तो पशु उत्पादों को बढ़ावा देने में लगा रहता है जिसका एक हिस्सा मांच और चमड़ा भी है। ऐसे में पशुपालन विभाग गोवंश की रक्षा करेगा, यह सोचना बेईमानी होगा। आयोग के मुताबिक कतलखानों को सरकारी सहायता नहीं मिली चाहिए। बजाए इसके सरकार को गोशालाओं के रख-रखाव पर ध्यान देना चाहिए। गोवंश के लिए चारागाह की व्यवस्था उसी का हिस्सा हो। उसका मानना है कि गोवंश के बारे जागरूकता फैलाने के लिए अभियान की जरूरत है। इसके लिए सरकार को जनसंचार माध्यमों का सहारा लेना चाहिए। तभी लोग गोवंश की उपोयगिता के बारे में जान पाएगें। गोरक्षा लोगों के संस्कार का हिस्सा बन जाए इसके लिए आयोग का कहना है कि इसे पाठ्यक्रम में भी शामिल करने की आवश्यकता है। इससे उन्हें गोवंश और उसके उत्पादों के बारे में जानकारी होगी। वे समझ पाएगे कि गोधन का कितना महत्व है। उनके मन में गोवंश को लेकर अलग तरह का भाव पैदा होगा। उसका यह भी मानना है कि देशी प्रजातियों को बढावा देने चाहिए। उनके कतल पर हर हाल रोक लगाने की दरकार है। कायदे से तो उसे पूरी तरह से प्रतिबंधित कर देना चाहिए।
कमोवेश यही बात बीफ निर्यात पर भी लागू होती है। उसके निर्यात पर प्रतिबंधित बिना किसी किंतु-परंतु के लगना होगा। आयोग इस मसले में किसी तरह की लापरवाही के पक्ष में नहीं है। रिपोर्ट में साफ तौर पर कहा गया है कि भैंस के नाम पर भी बीफ निर्यात को अनुमति नहीं दी जानी चाहिए। यह सही भी है क्योंकि मौजूदा समय में उसकी आड़ में गोवंश के मांस और चमड़े का निर्यात हो रहा है।
आयोग ने गोवंश के अवैध व्यापार को रोकने और उसके संरक्षण के लिए एक ‘विशेष सुरक्षा दल’ बनाया जाए। उसमें गोरक्षकों को रखने की व्यवस्था हो। जो लोग गोवंश की अवैध तस्करी करते है और गौमांस के निर्यात करते है, उन्हें सजा देने के लिए लिए सख्त कानून बने। ऐसा करने वालों के खिलाफ 3-10 साल तक सजा का प्रावधान हो। रिपोर्ट के मताबिक संविधान में संशोधन करना चाहिए ताकि गोवंश को राज्यसूची से निकालकर संघ सूची में डाला जा सके। (यथावत से साभार)


