लोकल के लिए बने वोकल..बनाएं जीवन मंत्र : मोदी

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मंगरूआ
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा आज से हर भारतवासी को अपने लोकल के लिए ‘वोकल’ बनना है, न सिर्फ लोकल प्रोडक्ट्स खरीदने हैं, बल्कि उनका गर्व से प्रचार भी करना है। मुझे पूरा विश्वास है कि हमारा देश ऐसा कर सकता है। उन्होंने कहा कि कोरोना संकट का सामना करते हुए, नए संकल्प के साथ मैं आज एक विशेष आर्थिक पैकेज की घोषणा कर रहा हूं। प्रधानमंत्री ने मोदी ने कहा कि आत्मनिर्भरता, आत्मबल और आत्मविश्वास से ही संभव है। आत्मनिर्भरता, ग्लोबल सप्लाई चेन में कड़ी स्पर्धा के लिए भी देश को तैयार करती है। ये आर्थिक पैकेज, ‘आत्मनिर्भर भारत अभियान’ की अहम कड़ी के तौर पर काम करेगा। 

आत्मनिर्भर भारत का संकल्प
विश्व की आज की स्थिति हमें सिखाती है कि इसका मार्ग एक ही है- “आत्मनिर्भर भारत”। एक राष्ट्र के रूप में आज हम एक बहुत ही अहम मोड़ पर खड़े हैं। इतनी बड़ी आपदा, भारत के लिए एक संकेत लेकर आई है, एक संदेश लेकर आई है, एक अवसर लेकर आई है। थकना, हारना, टूटना-बिखरना, मानव को मंजूर नहीं है। सतर्क रहते हुए ऐसी जंग के सभी नियमों का पालन करते हुए अब हमें बचना भी है और आगे भी बढ़ना है। आज हमारे पास साधन हैं, हमारे पास सामर्थ्य है, हमारे पास दुनिया का सबसे बेहतरीन टैलेंट है, हम बेस्ट प्रोडक्ट बनाएंगे, अपनी क्वालिटी और बेहतर करेंगे, सप्लाई चेन को और आधुनिक बनाएंगे, ये हम कर सकते हैं और हम जरूर करेंगे। आत्मनिर्भर भारत की ये भव्य इमारत, 5 पिलर्स पर खड़ी होगी। पहला पिलर इकोनॉमी, दूसरा पिलर इंफ्राक्ट्रचर, तीसरा पिलर-सिस्टम चौथा पिलर- हमारी डेमोग्राफी, 5वां पिलर डिमांड।
इसे जीवन मंत्र बनाएं
मोदी ने आगे कहा, “समय ने हमें सिखाया है कि लोकल को हमें अपना जीवन मंत्र बनाना ही होगा। आपको जो आज ग्लोबल ब्रांड लगते हैं, वो भी कभी ऐसे ही लोकल थे। जब वहां के लोगों ने उनका इस्तेमाल और प्रचार शुरू किया। उनकी ब्रांडिंग की, उन पर गर्व किया तो वे प्रोडक्ट्स लोकल से ग्लोबल बन गए। इसलिए, आज से हर भारतवासी को अपने लोकल के लिए वोकल बनना है। न सिर्फ लोकल प्रोडक्ट्स खरीदने हैं, बल्कि उनका गर्व से प्रचार भी करना है। मुझे पूरा विश्वास है कि हमारा देश ऐसा कर सकता है। आपके प्रयासों ने तो हर बार आपके प्रति मेरी श्रद्धा को और बढ़ाया है।’’
खादी का दिया मिसाल

प्रधानमंत्री ने स्थानीय उत्पादों यानी लोकल प्रोडक्ट्स को लेकर खादी की मिसाल दी। कहा, “मैं गर्व के साथ एक बात महसूस करता हूं, याद करता हूं। जब मैंने आपसे, देश से खादी खरीदने का आग्रह किया था। तब ये भी कहा था कि देश के हैंडलूम वर्कर्स को सपोर्ट करें। आप देखिए, बहुत ही कम समय में खादी और हैंडलूम, दोनों की ही डिमांड और बिक्री रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गई है। इतना ही नहीं, उसे आपने बड़ा ब्रांड भी बना दिया। बहुत छोटा सा प्रयास था, लेकिन परिणाम मिला, बहुत अच्छा परिणाम मिला।’’

गुणवत्ता और प्रभाविता पर हो जोर
प्रधानमंत्री ने रिफॉर्म्स पर भी जोर दिया। कहा, “रिफॉर्म खेती की चेन से भी जुड़ेंगे, ताकि किसान भी सशक्त हो और कोरोना जैसे संकट में खेती पर कम से कम असर हो। यह रिफॉर्म मजबूत फाइनेंशियल सिस्टम के निर्माण के लिए भी होंगे। ये निवेश को आकर्षित करेंगे और मेक इन इंडिया के सपने को साकार करेंगे। आत्मनिर्भरता दरअसल, आत्मबल और आत्मविश्वास से ही संभव है। आत्मनिर्भरता ग्लोबल सप्लाई चेन की स्पर्धा में देश को तैयार करेगी। इसे समझते हुए आर्थिक पैकेज में कई प्रावधान किए गए हैं। इससे हमारे सभी सेक्टर्स की इफिशिएंसी बढ़ेगी और क्वालिटी भी तय होगी।’’

हाल में सरकार ने कोरोना संकट से जुड़ी जो आर्थिक घोषणाएं की थीं, जो रिजर्व बैंक के फैसले थे, और आज जिस आर्थिक पैकेज का ऐलान हो रहा है, उसे जोड़ दें तो ये करीब-करीब 20 लाख करोड़ रुपए का है। ये पैकेज भारत की GDP का करीब-करीब 10 प्रतिशत है। 20 लाख करोड़ के आर्थिक पैकेज के विषय में उन्होंने कहा कि ये आर्थिक पैकेज देश के उस श्रमिक के लिए है, देश के उस किसान के लिए है जो हर स्थिति, हर मौसम में देशवासियों के लिए दिन रात परिश्रम कर रहा है। ये आर्थिक पैकेज हमारे देश के मध्यम वर्ग के लिए है, जो ईमानदारी से टैक्स देता है, देश के विकास में अपना योगदान देता है।

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