Parliament Winter Session 2024: संसद का शीतकालीन सत्र शुरू हो गया है। यह सत्र 20 दिसंबर तक चलेगा। शीतकालीन सत्र के हंगामेदार रहने की संभावना है क्योंकि सत्ता पक्ष और विपक्ष दोनों की अपनी—अपनी तैयारी है। एक तरफ जहां विपक्ष मणिपुर हिंसा, दिल्ली प्रदूषण और संभल हिंसा पर सरकार से बहस करने की मांग कर रहा है। वहीं सत्ता पक्ष वक्फ संशोधन विधेयक समेत 11 नए विधेयकों को पेश करने की तैयारी में हैं।
प्रधानमंत्री ने विपक्ष को लिया निशाने पर
लेकिन सत्र शुरू होने से पहले ही संसद परिसर में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने मीडिया के जरिए विपक्ष को निशाने पर लिया और कहा कि बार—बार देश की जनता द्वारा नकारे जाने के बावजूद भी विपक्ष सदन में गतिरोध पैदा करता रहा है। इस दौरान उन्होंने कहा कि जनता ने जिन्हें 80 बार नकार दिया हो तोभी वह मुठ्ठीभर लोग अपने राजनीतिक लाभ के लिए सदन पर कंट्रोल करना चाहते हैं। देशहित के लिए हो रही सदन की कार्यवाही में बाधक बनते हैं। और जब समय आता है तो इस देश की जनता सजा भी देना जानती है। नए सांसदों का जिक्र करते हुए प्रधानमंत्री ने आगे कहा कि हुडदंगबाजी से नए सांसदों को बोलने का ज्यादा मौका नहीं मिलता है। वह नए सांसद चाहे किसी भी राजनीतिक दल से हो लेकिन सांसदों को अपने क्षेत्र की समस्या को सदन के सामने रखने का पूरा अधिकार है।
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देश 2025 के स्वागत की तैयारी में
मुठ्ठीभर लोगों की हुडदंगबाजी से नए सांसदों को सदन में बोलने का मौका नहीं मिल पाता है। यह पीड़ा की बात है। सदन में एक स्वस्थ चर्चा होनी चाहिए। ज्यादा से ज्यादा सदस्यों को चर्चा में भाग लेना चाहिए। प्रधानमंत्री ने आगे अपने संबोधन में कहा कि शीतकालीन सत्र है और माहौल भी शीत ही रहेगा। 2024 का यह अंतिम कालखंड चल रहा है। देश पूरे उमंग और उत्साह के साथ 2025 के स्वागत की तैयारी में भी लगा हुआ है। संसद का यह सत्र अनेक प्रकार से विशेष है। सबसे बड़ी बात है कि हमारे संविधान की यात्रा का 75वें साल में प्रवेश होना। ये अपने आप में लोकतंत्र के लिए एक बहुत ही उज्ज्वल अवसर है। संसद की चर्चा पर बात करते हुए पीएम मोदी ने कहा, संविधान निर्माताओं ने संविधान का निर्माण करते समय एक-एक बिंदु पर विस्तार से बहस की। इसके बाद जाकर हमने इसे प्राप्त किया। संसद इसकी महत्वपूर्ण इकाई है।
16 विधेयकों पर होगी चर्चा
बात दें कि शीतकालीन सत्र के दौरान पांच नए विधेयक पेश हुए है। जबकि वक्फ (संशोधन) समेत 11 अन्य विधेयकों को चर्चा के लिए सूचीबद्ध किया गया है। यानी कुल 16 विधेयक थे जिन्हें सरकार इस सत्र में पारित करवाने की तैयारी में है। विपक्षी पार्टियों के जिस तरह के तेवर हैं। उससे साफ है कि शीत सत्र हंगामेदार रह सकता है। विपक्ष कई मुद्दों को लेकर सरकार को घेरने की तैयारी में है।

