प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने उत्तर प्रदेश के बरेली किसान कल्याण रैली को संबोधित करते हुए कहा कि किसान ही तो देश की शान हैं। किसान एक प्रकार से श्रम के देवता हैं। प्रधानमंत्री ने कहा, ‘किसानों को भगवान के बाद सरकार से ही उम्मीदें होती हैं और यह हमारी जिम्मेदारी है कि उनका ध्यान रखें।’ उन्होंने कहा, मैं सभी राज्य सरकारों से अनुरोध करता हूं कि वे अपनी कार्य योजनाएं तैयार करें और मुझे भरोसा है कि हमारा और आपका सपना पूरा होगा।’
देश के किसान मुश्किल में है उनके सामने कई चुनौतियां हैं लेकिन इन चुनौतियों को अवसर में बदला जा सकता है। परिवार बढ़ रहा है, जमीन के टुकड़े हो रहे हैं। परिवार के सदस्यों के हिस्से में बहुत ही कम जमीन आ रही है। ऐसे में किसान की पैदावार भी घट रही है।’ उन्होंने कहा कि जमीन कम होती है तो पैदावार भी घटती है। ऐसे में किसान देश का पेट कैसे भरेगा। प्रधानमंत्री ने कहा कि चुनौतियों को अवसर में तब्दील किया जा सकता है। अगर किसान और राज्य सरकारें साथ दें तो इन चुनौतियों से निपटा जा सकता है। उन्होंने कहा, हमें अपने किसान को ताकतवर बनाना पड़ेगा। किसान को अगर पानी मिल जाए तो वह मिट्टी से सोना पैदा कर सकता है।
2022 तक डबल होगी किसानों की इनकम
प्रधानमंत्री ने कहा- मैं उम्मीद करता हूं कि जब 2022 में हम आजादी का 75वां साल मनाएंगे तो किसानों की इनकम डबल हो गई हो। हमें अपने किसान को ताकतवर बनाना पड़ेगा। किसान को पानी मिल जाए तो वह मिट्टी से सोना पैदा कर सकता है। मैं यहां किसी की आलोचना करने नहीं आया हूं। मैं तो आग्रह करने आया हूं। भारत सरकार कंधे से कंधा मिलाकर काम करने के लिए तैयार है।
खेती के साथ-साथ पशुपालन पर भी जोर
प्रधानमंत्री ने कहा, ‘खेती के साथ-साथ पशुपालन, मधुमक्खी पालन, मछली पालन पर जोर देना होगा। पहले खेती के लिए पंजाब और हरियाणा का नाम आता था, लेकिन बाद में मध्य प्रदेश में बीजेपी की सरकार आने के बाद खेती पर काम शुरू हुआ। किसानों के लिए योजनाएं बनाई गईं।’ उन्होंने कहा कि मध्य प्रदेश का नाम खेती के लिए काफी पीछे थे, लेकिन अब यह प्रदेश खेती के क्षेत्र में लगातार आगे बढ़ता जा रहा है। वहां के किसान कृषि में काफी आगे हो गए हैं।
अर्थव्यवस्था में कृषि का एक-तिहाई हिस्सा
उन्होंने कहा कि देश की अर्थव्यवस्था को आगे बढ़ाने के लिए तीन स्तंभ की जरूरत है। अर्थरचना में एक तिहाई हिस्सा कृषि का है, एक तिहाई हिस्सा उद्योग का और एक तिहाई हिस्सा सर्विस सेक्टर का हो, तो विकास तेजी से होगा। मेरी सरकार से आने से पहले हमारे देश में दूध का उत्पादन होता 1 हजार 375 लाख टन होता था। इस साल दूध का उत्पादन 1 हजार 465 लाख टन के हिसाब से हुआ है।
प्रधान मंत्री के संवोधन कि अन्य प्रमुख बातें
– हमने वाटर मैनेजमेंट को प्राथमिकता दी है। प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना बनाई है।
– बुंदेलखंड को देखकर चिंता होती है। वहां 5 नदियां हैं, लेकिन पीने का पानी न हो तो चिंता होती है।
– किसान को पानी मिल जाए तो मिट्टी से सोना पैदा कर दे। किसान के जेब में रुपए डालने से बात बनने वाली नहीं है।
– मंडी में फसल का भाव जानने की सुविधा किसानों को मोबाइल पर मिल सकेगी।
खेती को तीन हिस्सों में बांटें किसान – परंपरागत खेती करें- धान, गेहूं, जौ, मक्का, दलहन, तिलहन आदि उपजाएं।
– खेत की बाउंड्री पर वृक्षारोपण करें। बेटी के जन्म पर कम से कम एक पेड़ लगाएं।
– पशुपालन- दूध उत्पादन, शहद उत्पादन, पॉल्ट्री फॉर्म, मत्स्य पालन आदि।
– इससे आय बढ़ेगी और सूखा, अकाल या किसी अन्य आपदा में भी रोजी-रोटी रहेगी।
– हमारी सरकार से पहले देश में दूध का उत्पादन 1 हजार 375 लाख टन होता था।
– इस साल दूध का उत्पादन 1 हजार 465 लाख टन के हिसाब से हुआ है। यह पैसा हमारे किसानों के पास गया है।
भू–जलस्तर बढ़ाने के टिप्स – बोरे में मिट्टी, रेत और पत्थर भरकर बारिश के समय बहने वाले पानी को बांध दें। – इससे छोटे-छोटे डैम बन जाएंगे और पानी जमीन के अंदर चला जाएगा। – इससे भू-जलस्तर बढ़ जाएगा। कुएं का वाटर लेवल बढ़ जाएगा।
स्वाइल (soil) हेल्थ कार्ड
– हमारी गलतियों के कारण धरती माता की तबियत खराब हो गई है।
– केंद्र सरकार ने अभियान चलाया है। किसान यह कार्ड बनवाएं।
– मिट्टी की जांच करवाकर कार्ड पर रिकॉर्ड दर्ज करवाएं। – सलाह के अनुसार ही मिट्टी में कम हो रहे पोषक तत्वों को दूर करें। – इससे जमीन की रक्षा होगी और पैदावार बढ़ेगा।
फसल बीमा योजना
– प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना लागू। – बीमा करवाने पर 90 फीसदी से ज्यादा प्रीमियम केंद्र सरकार देगी। – किसानों को एक सीजन में खरीफ के लिए 2 फीसदी और रबी पर डेढ़ फीसदी प्रीमियम देना होगा। – पहले पूरे एरिया में फसल नुकसान होने पर बीमा का भुगतान होता था, अब किसी भी किसान के फसल नुकसान पर बीमा मिलेगा। – बारिश नहीं होने या अन्य कारण से फसल नहीं बोने पर भी बीमा का लाभ मिलेगा। – फसल कटने के बाद 14 दिनों तक किसी आपदा से नुकसान होने पर भी बीमे का लाभ मिलेगा।
यूरिया के बारे में क्या कहा?
– पहले यूरिया की कालाबाजारी होती थी, लेकिन इस बार सरकार ने यूरिया पर नीम कोटिंग का काम किया।
– ऐसे में अगर आप अपने खेत में यूरिया का उपयोग करते हैं तो 10 किलो की बजाय 7 किलो ही डालना होता है।
– नीम कोटिंग से गांव की महिलाओं को रोजगार मिला तो केमिकल के लिए जो यूरिया जाता था, वह भी बंद हो गया।
– इस बार किसी भी सीएम ने यूरिया के लिए चिट्ठी नहीं लिखी है।
मनरेगा को लेकर क्या बोले मोदी?
– हमारे देश में मनरेगा की बातें बहुत होती हैं। पैसे आए होंगे तो जेब में गए होंगे, लेकिन किसान से पूछो तो सच्चाई पता चलेगी।
– हमने राज्य सरकारों से कहा है कि मनरेगा के पैसों से सिंचाई की व्यवस्था की जाए।
– हम चाहते हैं कि राज्य सरकार मनरेगा के पैसे का इस्तेमाल सिंचाई के लिए करे, पानी बचाने के लिए करे।
गृह मंत्री राजनाथ सिंह ने की किसानों की तारीफ करते हुए कहा कि
-भारत का किसान खेत में मेहनत करता है, पसीना बहाता है, लेकिन ओलावृष्टि और आपदा से किसान परेशान है, इसीलिए पीएम ने किसानों को 2860 करोड़ की मुआवजे की राशि देने का एलान किया है ।
इस कार्यक्रम में राधामोहन सिंह, मेनका गांधी, संतोष गैंगवार, प्रदेश प्रभारी ओम माथुर, यूपी बीजेपी प्रमुख लक्ष्मीकांत वाजपेयी, संजीव बालियान, बीजेपी किसान मोर्चा के राष्ट्रीय अध्यक्ष सहित पार्टी के कई नेता और मंत्री मौजूद थे।


