आलोक रंजन
वाराणसी. गमछा पूरबियों की पहचान रही है। लेकिन फैशन के इस दौर में युवा पीढ़ी गमछे को भूलते जा रही थी। गमछे का स्थान टोपी ने ले लिया था। लेकिन कोरोना के संक्रमण से बचाव में गमछा हर बुजुर्ग,युवा, अधेड़ के लिए न सिर्फ सहायक है बल्कि फैशन ट्रेंड का सूचक भी। ये ट्रेंड प्रधानमंत्री के संसदीय क्षेत्र बनारस में भी खूब दिखाई दे रहा है। विशेष तौर पर प्रधानमंत्री नरेंद्र फोन के बाद तो सबलोग गमछाधारी हो गए हैं।
उल्लेखनीय है कि प्रधानमंत्री मोदी ने गुरुवार और शुक्रवार को अपने संसदीय क्षेत्र बनारस में कई नेताओं से फोन पर बातचीत किया था। उन्होंने बनारस में कोरोना की स्थिति जानने के साथ ही लोगों को मदद करने और आरोग्यसेतू ऐप डाउनलोड कराने की अपील किया था। साथ ही साथ भाजपा जिलाध्यक्ष हंसराज विश्कर्मा द्वारा मॉस्क बांटने के जवाब में पीएम ने सलाह दिया था कि मॉस्क की जगह गमछा से फेस सेफ किया जाय तो भी कोरोना के खतरे से सुरक्षित रहा जा सकता है। प्रधानमंत्री के इस सन्देश के बाद बनारस में खुद जिलाध्यक्ष और भाजपा के नेता जहां भी लोगों की मदद करने या राशन बांटने जा रहे हैं वहां गमछा भी देने का काम कर रहे हैं।
खूब दिख रहा गमछा इफेक्ट
हंसराज समेत भाजपा नेता गमछा देना शुरू किए उधर सोशल मीडिया पर भी गमछा चैलेंज शुरू हो गया। केवल बनारस में ही नहीं बल्कि पूर्वांचल की माटी से जुड़ने वाला हर शख्स गमछे में दिखाई दे रहा है और लोगों को इसके लिए प्रेरित भी कर रहा है। फेसबुक पर ट्विटर पर बनारसियों ने एक दूसरे को चैलेंज देने का काम शुरू हो गया। लोगों ने इसे खूब एक्सेप्ट किया और शेयर भी किया। कई ग्रुपों के साथ ही फेसबुक पेज पर भी गमछा चैलेंज हिट रहा। इस कड़ी में भाजपा नेता शुक्रवार को भदैनी, श्री नगर कालोनी, शिवरवा, बैंक कालोनी समेत कई जगहों पर गमछा वितरण करने का काम किया।
प्रधानमंत्री ने इन नेताओं को किया फोन
प्रधानमंत्री मोदी इस भाजपा के जिलाध्यक्ष हंसराज विश्कर्मा के साथ ही यूपी सरकार में मंत्री र
विन्द्र जायसवाल को फोन कर बनारस का हाल लिया था। इसके अलावा शुक्रवार को उन्होंने रोहनियां सीट से विधायक सुरेंद्र नारायण सिंह को भी फोन कर लोगों के दुख दर्द बांटने को कहा था। सबसे उन्होंने आरोग्य सेतू ऐप डाउनलोड कराने के लिए युद्ध स्तर और जुट जाने का निर्देश दिया था।
ये है बनारस की स्थिति
प्रधानमंत्री मोदी के संसदीय क्षेत्र में अब तक कोरोना के कुल नौ केस सामने आए। जिसमें एक की जान गई जबकि दो पूरी तरह से स्वस्थ होकर अपने घर जा चुके हैं। वहीं छह मरीजों का भी इलाज किया जा रहा है। उनकी सेहत में भी तेजी से सुधार हो रहा है। साथ ही साथ प्रशासन इस लॉक डाउन पीरियड में किसी भी व्यक्ति को किसी भी तरह की कोई परेशानी न आये। गरीबों को राशन या खाने पीने के सामान की कोई दिक्कत न हो, यह सुनिश्चित करने में कोई कोर कसर नहीं छोड़ रहा है।
