अंकित पांडे
चंडीगढ़: उत्तर भारत के कुछ राज्यों जैसे हिमाचल प्रदेश, उत्तराखण्ड तथा पंजाब लगभग पिछले दो महीने से भारी बारिश का सामना कर रहे हैं। भारी बारिश से जन जीवन प्रभावित होने के साथ साथ इन राज्यों में कृषि भी प्रभावित हो रही है। पंजाब के लगभग 8 जिले बाढ़ जैसी स्थिति का सामना कर रहे हैं। इन जिलों में ज्यादातर में कपास की खेती की जाती है। औसत से अधिक वर्षा के बाद अब कपास की फसल गुलाबी गोल कृमी के हमले से जूझ रही है। राज्य सरकार ने खेतों का दौरा करने के बाद प्रतिदिन स्थिति को लेकर मुख्यालयों को रिपोर्ट देने का निर्देश दिया है। सरकार ने यह भी कहा कि अगर किसी भी तरह की लापरवाही होती है तो संबंधित अधिकारी की जवाबदेही तय की जाएगी और अनुशासनात्मक कारवाई भी की जा सकती है। सरकार ने कपास की फसल बचाने के लिए अपनी प्रतिबद्धता जाहिर की है। पंजाब सरकार का कहना है कि यह समय किसानों के सांथ खड़े होने का है।
पंजाब का मालवा क्षेत्र स्वेत सोने के रुप मे जाना जाता है क्योकि इस क्षेत्र के कुछ जिले जैसे भटिंडा, मुक्तसर, मनसा, फाजिल्का, संगरुर, मोगा और फरीदकोट दुनिया की सबसे अच्छी किस्म की कपास का उत्पादन करते हैं। इस समय इस क्षेत्र की कपास की फसलें गुलाबी क्रिमी का समना कर रहीं हैं। कपास की फसल के लिए आगामी 15 दिन बेहद महत्वपूर्ण हैं इसीलिए राज्य सरकार ने किसानों की सहायता के लिए इन जिलों में 4 वरिष्ठ कृषि अधिकारियों को तैनात किया है। साथ ही अन्य कृषि अधिकारियों की छुट्टियां रद्द कर दी गई है।
आपको बता दें कि जो अधिकारी नियुक्त किये गए हैं वे लगातार खेतों मे जा जाकर कपास की फसल का निरीक्षण करेंगे, जो की एक सराहनीय पहल है। इससे किसानों को काफी राहत मिलेगी जिससे समय रहते फसल को सही उपचार मिल सकेगा और उत्पादन भी कम प्रभावित होगा।
